मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द: टीएस सिंहदेव ने भाजपा और चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप





मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द: कांग्रेस का आरोप, ‘लोकतंत्र की हत्या’

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मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द: कांग्रेस ने इसे बताया ‘लोकतंत्र की हत्या’ और ‘साजिश’

भोपाल: मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया ने अचानक एक नाटकीय मोड़ ले लिया है। कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र चुनाव अधिकारी (रिटर्निंग ऑफिसर) द्वारा रद्द कर दिया गया है, जिस पर विपक्षी दल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने इस घटना को भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत करार देते हुए इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ और ‘सुनियोजित साजिश’ बताया है।

विवाद की जड़: नामांकन में कथित जानकारी छुपाने का आरोप

रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा के अनुसार, मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ तेलंगाना की एक अदालत में लंबित एक मामले की जानकारी छुपाने के आधार पर उनका नामांकन रद्द किया गया। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी।

अधिकारी ने अपने आदेश में कहा कि मीनाक्षी नटराजन को अदालत द्वारा जारी नोटिस की पूरी जानकारी थी और उन्होंने इसका जवाब भी दाखिल किया था। इसलिए, चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार शपथ पत्र (फॉर्म 26) में इस जानकारी को न देना एक गंभीर चूक मानी गई है।

कांग्रेस का तीखा पलटवार: टीएस सिंहदेव और पार्टी नेतृत्व की कड़ी निंदा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस पूरे घटनाक्रम पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीनाक्षी नटराजन के नामांकन में कोई तकनीकी खामी नहीं थी।

“मीनाक्षी नटराजन के नामांकन में किसी भी प्रकार की कोई खामी नहीं है। न उनके खिलाफ कोई FIR है, न कोई चार्जशीट, न ही कोई विधिवत मामला दर्ज है। सिर्फ़ एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति पर दायर निजी शिकायत में कहीं उनके नाम का एक उल्लेख भर है। जब उन पर कोई आपराधिक मामला लंबित ही नहीं है, तो नामांकन पत्र में ऐसी किसी बात को दाखिल करने का प्रश्न ही नहीं उठता।” – टीएस सिंहदेव

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सिंहदेव ने आगे कहा कि यह पूरी तरह से तथ्यों के विपरीत और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कार्रवाई है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की एक षड़यंत्रकारी कोशिश है।

क्या है ‘वोट चोरी’ और ‘सीट चोरी’ का आरोप?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया है कि भाजपा अपनी संख्याबल की कमी को देखते हुए अनैतिक हथकंडों का सहारा ले रही है। केसी वेणुगोपाल और अन्य नेताओं ने इसे ‘डेलाइट रॉबरी’ (दिनदहाड़े डकैती) करार दिया।

  • षड्यंत्र का आरोप: कांग्रेस का तर्क है कि भाजपा जानती थी कि वह लोकतांत्रिक तरीके से तीसरा राज्यसभा चुनाव नहीं जीत सकती, इसलिए विपक्षी उम्मीदवार को रेस से बाहर करने के लिए कानूनी नोटिस का सहारा लिया गया।
  • लोकतंत्र पर सवाल: कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मोदी सरकार के इस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं को जिस तरह कमजोर किया जा रहा है, वह भारत के इतिहास में एक ‘काले धब्बे’ की तरह याद रखा जाएगा।
  • विपक्ष को रोकने की कोशिश: पार्टी ने आरोप लगाया कि पहले विधायकों की खरीद-फरोख्त की कोशिश की गई, और जब वह नाकाम रही तो विपक्षी उम्मीदवारों को ही चुनाव लड़ने से रोका जा रहा है।

राजनीतिक स्थिति और आगामी कदम

नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा के तीसरे उम्मीदवार की जीत का रास्ता साफ हो गया है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर चुनाव आयोग के उच्च अधिकारियों से मिलने का समय मांगा है और कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। मध्य प्रदेश विधानसभा में संख्याबल के हिसाब से भाजपा दो सीटें आसानी से जीत रही थी, लेकिन तीसरी सीट के लिए उसे समर्थन की आवश्यकता थी, जिसे अब निर्विरोध तरीके से हासिल कर लिया गया है।

राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया है। उन्होंने कांग्रेस पर ही अपने ही उम्मीदवार के खिलाफ साजिश रचने और तथ्य छुपाने का आरोप लगाया है।


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