छत्तीसगढ़ कर्मचारी संघ की 6 सूत्रीय मांगें: 2% DA और अन्य लाभों के लिए कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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छत्तीसगढ़: प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ का आर-पार का रुख, 6 सूत्रीय मांगों को लेकर गरमाया माहौल

विशेष संवाददाता | अम्बिकापुर | 12 जून 2026

अम्बिकापुर: छत्तीसगढ़ में शासकीय कर्मचारियों का आक्रोश अब सड़कों पर उतरने लगा है। प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर आज सरगुजा जिला मुख्यालय में एक बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। संघ के पदाधिकारियों ने अपने काम के घंटों में कटौती करते हुए ‘भोजन अवकाश’ के दौरान एक बड़ा ज्ञापन सौंपकर शासन को अपनी मांगों के प्रति आगाह किया है।

‘मोदी की गारंटी’ और अधूरा वादा: कर्मचारियों का दर्द

प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बिंदु सरकार द्वारा चुनाव के दौरान किए गए वादे थे, जिन्हें कर्मचारी ‘मोदी की गारंटी’ के रूप में देख रहे थे। संघ के प्रदेश महामंत्री आनंद सिंह यादव ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। राज्य के अन्य विभागों में जहां लाभ पहुंचाए जा रहे हैं, वहीं सामान्य कर्मचारी वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है।

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प्रमुख मांगे जिन पर टिकी है नजर:

  • 1. महंगाई भत्ता (DA) में समानता: विद्युत मंडल और न्यायिक सेवा के अधिकारियों को जनवरी 2026 से 2% डीए मिल चुका है, लेकिन 4.50 लाख सामान्य कर्मचारी वंचित हैं।
  • 2. कैशलेस चिकित्सा: बजट सत्र में वित्त मंत्री की घोषणा के बावजूद नियमावली का इंतज़ार जारी है।
  • 3. अवकाश नगदीकरण: मध्यप्रदेश की तर्ज पर सेवानिवृत्ति पर 300 दिनों का प्रावधान लागू हो।
  • 4. नियमितीकरण: संविदा और अनियमित कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा के लिए ठोस नीति बने।
  • 5. शिक्षक एल.बी. संवर्ग: प्रथम नियुक्ति तिथि से गणना का लाभ सुनिश्चित हो।
  • 6. अनुकंपा नियुक्ति: 10% सीलिंग को हटाकर परिवारों को राहत दी जाए।

आर्थिक विषमता का मुद्दा

संघ के कार्यकारी संभागीय अध्यक्ष राजेश्वर सिंह ने बताया कि सरकार की दोहरी नीति कर्मचारियों में असंतोष पैदा कर रही है। जब एक ही प्रदेश में अलग-अलग संवर्गों के लिए अलग-अलग नियम होते हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक भेदभाव को दर्शाता है। महंगाई के इस दौर में, जहां आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं, कर्मचारियों को उनका देय महंगाई भत्ता न मिलना आर्थिक प्रताड़ना के समान है।

भविष्य की रणनीति और चेतावनी

ज्ञापन सौंपने के बाद संघ के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल चेतावनी है। यदि शासन स्तर से इन मांगों पर जल्द ही ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो कर्मचारी संघ आने वाले समय में चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगा। इसमें कलमबंद हड़ताल से लेकर सामूहिक अनशन तक के विकल्प खुले हैं।

आज के कार्यक्रम में सरगुजा के अनेक वरिष्ठ कर्मचारी नेता जैसे बिंदेश्वरी सिंह, सुधीर राणा, मुकेश झलरीया, एम.पी. वसीम, एस.के. दुबे, और अमित कुमार सिंह सहित सैकड़ों कर्मचारी उपस्थित रहे।

शासन के सामने अब विकल्प कम

छत्तीसगढ़ सरकार के सामने अब अपनी ‘गारंटी’ को धरातल पर उतारने की चुनौती है। प्रशासनिक महकमे की कार्यकुशलता बनाए रखने के लिए इन कर्मचारियों का संतुष्ट रहना अनिवार्य है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय इस ज्ञापन पर क्या संज्ञान लेता है।