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अंबिकापुर महापौर मंजूषा भगत का बड़ा एक्शन: वायरल ऑडियो को बताया राजनीतिक षड्यंत्र, अजाक थाने में FIR की मांग






अंबिकापुर महापौर मंजूषा भगत का बड़ा एक्शन: वायरल ऑडियो को बताया राजनीतिक षड्यंत्र, अजाक थाने में शिकायत दर्ज


अंबिकापुर महापौर मंजूषा भगत के खिलाफ कथित ऑडियो वायरल: बताया राजनीतिक षड्यंत्र, अजाक थाने में शिकायत दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग

ब्यूरो रिपोर्ट, अंबिकापुर | अपडेटेड: 22 जून 2026

अंबिकापुर: नगर पालिक निगम अंबिकापुर की महापौर एवं अनुसूचित जनजाति समाज की वरिष्ठ महिला जनप्रतिनिधि मंजूषा भगत ने उनके विरुद्ध सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में प्रसारित किए गए कथित ऑडियो प्रकरण को एक सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने अजाक थाना अंबिकापुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक व कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

“महापौर मंजूषा भगत का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम एक आदिवासी महिला जनप्रतिनिधि की सामाजिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को धूमिल करने के उद्देश्य से रचा गया है।”

अनुराग मिश्रा पर भ्रामक और मनगढ़ंत आरोप लगाने का दावा

महापौर मंजूषा भगत ने पुलिस को सौंपे अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि दिनांक 21 जून 2026 को अनुराग मिश्रा नामक व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया एवं अन्य संवाद माध्यमों में एक कथित ऑडियो क्लिप सुनियोजित तरीके से प्रसारित की गई। इस ऑडियो क्लिप में कला केंद्र मैदान (मीना बाजार) के आवंटन और संचालन से संबंधित कथित अवैध लेन-देन और भ्रष्टाचार के पूरी तरह से निराधार, भ्रामक एवं मनगढ़ंत आरोप लगाए गए हैं।

उन्होंने आवेदन में कहा कि यह ऑडियो न केवल पूरी तरह से तथ्यहीन है, बल्कि एक निर्वाचित आदिवासी महिला प्रतिनिधि की जनता के बीच बढ़ती स्वीकार्यता और जनसमर्थन से घबराकर तैयार किया गया है। कुछ राजनीतिक तत्व इस प्रकार के हथकंडों के माध्यम से उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।

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संवैधानिक अधिकारों और गरिमा पर सीधा हमला

शिकायत दर्ज कराने के दौरान महापौर ने कड़े शब्दों में कहा कि यह कृत्य केवल व्यक्तिगत मानहानि का साधारण मामला नहीं है। यह सीधे तौर पर अनुसूचित जनजाति वर्ग की एक महिला प्रतिनिधि के सम्मान, आत्मसम्मान और संवैधानिक अधिकारों पर हमला है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में वैचारिक विरोध और असहमति का स्वागत है, लेकिन किसी महिला जनप्रतिनिधि को बदनाम करने के लिए फर्जी हथकंडे अपनाना, सोशल मीडिया का दुरुपयोग करना और झूठे प्रचार के माध्यम से आम जनता को भ्रमित करना एक गंभीर और अक्षम्य अपराध है।

कथित ऑडियो क्लिप की फोरेंसिक और तकनीकी जांच की मांग

अजाक थाने में सौंपी गई शिकायत में मांग की गई है कि इस कथित ऑडियो क्लिप की उच्च स्तरीय तकनीकी एवं फोरेंसिक जांच (FSL) कराई जाए। जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाए कि इस फर्जी ऑडियो को किसने तैयार किया, किसके इशारे या निर्देश पर इसे रिकॉर्ड या एडिट किया गया, और सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर इसे वायरल करने में किन-किन लोगों ने भूमिका निभाई।

महापौर ने मांग की है कि पुलिस की जांच का दायरा केवल अनुराग मिश्रा की भूमिका तक ही सीमित न रहे, बल्कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सक्रिय अन्य चेहरों, संगठनों अथवा पर्दे के पीछे काम कर रहे राजनीतिक तत्वों को भी बेनकाब किया जाए। जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और महापौर की सार्वजनिक छवि को आघात पहुंचाने के उद्देश्य से इस कथित फर्जी ऑडियो को तैयार करवाने और प्रसारित करने में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग किया है, उन सभी पर कार्रवाई होनी चाहिए।

कठोर धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई की अपील

महापौर मंजूषा भगत ने जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष, व्यापक और समयबद्ध जांच पूरी करने का आग्रह किया है। उन्होंने दोषियों के विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (Atrocities Act), भारतीय न्याय संहिता (BNS), साइबर अपराध संबंधी कड़े प्रावधानों तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई भी तत्व किसी आदिवासी महिला जनप्रतिनिधि की गरिमा और प्रतिष्ठा से खिलवाड़ करने का दुस्साहस न कर सके।

शिकायत के दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और पार्षद रहे उपस्थित

थाने में शिकायत दर्ज कराने के दौरान महापौर के साथ नगर निगम और संगठन के प्रमुख पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एकजुटता दिखाने पहुंचे। इस दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित लोग उपस्थित रहे:

निगम सभापति हरमिन्दर सिंह टिन्नी, जिला महामंत्री विनोद हर्ष, मधुसूदन शुक्ला, पार्षद मनीष सिंह, रुपेश दुबे, एमआईसी सदस्य जितेंद्र सोनी, पार्षद शैलू सिंह, सुशांत घोष, निरंजन रॉय, शिवमंगल सिंह, पार्षद किरण साहू, प्रियंका चौबे, मधु चौदहा, संजीव वर्मा, सरस्वती यादव, प्रिया सिंह, नीलम राजवाड़े, बबली नेताम, भूपेन्द्र सिंह, अविनाश मण्डल, शानू कश्यप, रवि विश्वकर्मा, सीमा कश्यप, नन्दिनी सिंह, शिरीष भगत, हिमांशु चौबे, प्रशांत पांडेय, रोहित सोनी, अंश प्रताप, मयंक यादव, योगेन्द्र प्रताप सिंह, नवीन कुजूर, अमरजीत पैकरा, गौरव दास, कुणाल द्विवेदी, आयुष सोनी, प्रयाग कंसारी, रोहित विश्वकर्मा, अभिजीत सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक और कार्यकर्ता।


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