आसमान में भारत की ‘तीसरी आँख’: स्वदेशी ‘नेत्र’ सिस्टम को मिला FOC, अब चीन-पाक की हर हरकत पर रहेगी नज़र






आत्मनिर्भर भारत: स्वदेशी ‘नेत्र’ AEW&C सिस्टम को मिला Final Operational Clearance (FOC) – प्रदेश खबर

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स्थान: बेंगलुरु | दिनांक: 26 जून, 2026 | श्रेणी: रक्षा / राष्ट्रीय सुरक्षा

अब दुश्मन की हर हरकत पर रहेगी भारत की आसमानी नज़र! स्वदेशी ‘नेत्र’ सिस्टम को मिला Final Operational Clearance

बेंगलुरु: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को आज एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। भारत के अपने स्वदेशी ‘नेत्र’ (Netra) Airborne Early Warning and Control (AEW&C) सिस्टम को आधिकारिक तौर पर Final Operational Clearance (FOC) प्रमाण पत्र सौंप दिया गया है। इस क्लीयरेंस के बाद अब भारतीय वायुसेना (IAF) युद्धक्षेत्र में और अधिक सटीक निगरानी, समय रहते खतरों की अचूक पहचान और रणनीतिक मोर्चे पर निर्णायक बढ़त हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

बेंगलुरु के ‘सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स’ (CABS) में आयोजित एक भव्य सैन्य और वैज्ञानिक समारोह में भारतीय वायुसेना के उप-प्रमुख (Deputy Chief of the Air Staff) एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती की गरिमामयी उपस्थिति में यह FOC प्रमाण पत्र सौंपा गया। यह मील का पत्थर रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO), भारतीय वायुसेना और भारतीय रक्षा उत्पादन इकाइयों के बीच दो दशकों से अधिक समय के अथक परिश्रम, शोध और अटूट तालमेल की सफलता की कहानी कहता है।

रडार और कमांड सेंटर के क्षेत्र में फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस (FOC) मिलने का सीधा मतलब यह है कि इस स्वदेशी प्रणाली ने डिज़ाइन, तकनीकी विकास, सुरक्षा मानकों और बेहद कड़े युद्ध-स्तरीय ट्रायल्स की सभी अग्निपरीक्षाओं को 100% सफलता के साथ पार कर लिया है। अब यह सिस्टम बिना किसी तकनीकी सीमा के युद्ध के मैदान में पूर्ण तैनाती के लिए तैयार है।

आसमान में भारत की ‘तीसरी आँख’: क्या है नेत्र AEW&C की ताकत?

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ‘नेत्र’ केवल आसमान में उड़ने वाला एक रडार नहीं है, बल्कि यह हवा में घूमता हुआ भारतीय वायुसेना का एक ऐसा “ऑपरेशनल ब्रेन” है जो युद्ध की पूरी दिशा और दशा बदलने की क्षमता रखता है। ब्राजील के एम्ब्रेयर (Embraer ERJ 145) एयरफ्रेम प्लेटफॉर्म पर आधारित इस सिस्टम के ऊपरी हिस्से (डॉर्सल फिन) में भारत का स्वदेशी ‘एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे’ (AESA) रडार फिट किया गया है।

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‘नेत्र’ सिस्टम की 10 सबसे बड़ी खूबियाँ:

  • विस्तृत रडार कवरेज: यह हवाई प्लेटफॉर्म आसमान में 300 से 360 डिग्री तक का कवरेज देने में सक्षम है, जिससे कोई भी कोना निगरानी से नहीं छूटता।
  • अत्याधुनिक AESA रडार तकनीक: इसका एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे रडार दुश्मन के किसी भी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग या सिग्नल ब्लॉक करने के प्रयासों को नाकाम कर देता है।
  • लंबी दूरी का डिटेक्शन: यह 250 से लेकर 500 किलोमीटर की विशाल रेंज में दुश्मन के लड़ाकू विमानों, ड्रोन्स, हेलीकॉप्टरों और क्रूज मिसाइलों को बहुत पहले ही डिटेक्ट (पहचान) कर लेता है।
  • रीयल-टाइम बैटलफील्ड मैनेजमेंट: युद्ध के मैदान की पल-पल की लाइव स्थिति और तस्वीरें यह सीधे वायुसेना के ग्राउंड कमांड सेंटर और हवा में उड़ रहे लड़ाकू विमानों को भेजता है।
  • दोस्त और दुश्मन की त्वरित पहचान (IFF): आसमान में उड़ रहे सैकड़ों विमानों के बीच यह मिलीसेकंड के भीतर पहचान कर लेता है कि कौन सा विमान भारत का है और कौन सा घुसपैठिया।
  • हवा में ईंधन भरने की क्षमता (Airborne Refueling): इस विमान में हवा में ही ईंधन भरने की सुविधा है, जिससे यह लगातार कई घंटों तक आसमान में रहकर टोही मिशन को अंजाम दे सकता है।
  • स्वदेशी सुरक्षित डेटा लिंक: इसका डेटा लिंक पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड और स्वदेशी है, जिसे क्रैक या हैक करना दुश्मन के हैकर्स के लिए नामुमकिन है।
  • लड़ाकू विमानों का लाइव मार्गदर्शन: ‘नेत्र’ सीधे तौर पर सुखोई-30 MKI, राफेल या मिराज-2000 जैसे लड़ाकू विमानों को मिसाइल दागने, टारगेट लॉक करने या पैंतरा बदलने के लिए रीयल-टाइम निर्देश दे सकता है।
  • मल्टी-सेंसर इंटीग्रेशन: प्राथमिक रडार के साथ-साथ इसमें अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट मेजर्स (ESM) और कम्युनिकेशन सपोर्ट मेजर्स (CSM) प्रणालियाँ भी जोड़ी गई हैं।
  • प्रोजेक्टाइल ट्रैकिंग क्षमता: बहुत तेज गति से और बेहद नीची उड़ान भरकर आने वाले प्रोजेक्टाइल और क्रूज मिसाइलों को ट्रैक करने में इसे महारत हासिल है।

सामरिक महत्व: युद्धक्षेत्र में भारत को कैसे मिलेगी निर्णायक बढ़त?

आधुनिक दौर के नेटवर्क-सेंट्रिक युद्धों में जीत उसी की होती है जिसके पास सूचना सबसे पहले और सबसे सटीक पहुँचती है। नेत्र AEW&C भारतीय वायुसेना को “फर्स्ट लुक, फर्स्ट किल” (पहले देखना और पहले मारना) की अचूक क्षमता प्रदान करता है। सामान्य ग्राउंड-बेस्ड रडार पहाड़ों या धरती की गोलाई के कारण नीची उड़ान भरने वाले विमानों को नहीं देख पाते, लेकिन ‘नेत्र’ आसमान की ऊंचाइयों से नीचे छिपे खतरों को भी बेअसर कर देता है।

भारतीय वायुसेना ने ‘नेत्र’ सिस्टम की विश्वसनीयता और इसकी मारक क्षमता को साल 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान और उसके अगले दिन हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बखूबी परखा था। जब पाकिस्तानी वायुसेना के एफ-16 विमानों ने भारतीय सीमा का रुख किया था, तब ‘नेत्र’ ने ही उनके मंसूबों को समय रहते भांपकर भारतीय लड़ाकू विमानों को गाइड किया था और जवाबी कार्रवाई को नियंत्रित किया था।

वायुसेना उप-प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा:
“यह केवल एक स्वदेशी तकनीकी कार्यक्रम का समापन नहीं है, बल्कि ‘आत्मनिर्भरता’ की खोज में भारतीय वायुसेना और वैज्ञानिक समुदाय के बीच एक अनूठी और ऐतिहासिक साझेदारी का उत्सव है। वायुसेना का FOC से पहले ही इस प्लेटफॉर्म को शामिल करने का फैसला हमारे वैज्ञानिकों की क्षमता और हमारे स्वदेशी रक्षा उद्योग की अपार संभावनाओं पर अटूट विश्वास का सबसे बड़ा प्रमाण था।”

भारत की हवाई निगरानी क्षमता का तुलनात्मक विश्लेषण

भारतीय वायुसेना वर्तमान में अपनी हवाई सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए दो मुख्य एयरबोर्न सर्विलांस प्रणालियों का उपयोग कर रही है, जिनका विवरण इस प्रकार है:

विशेषता / मापदंड नेत्र (Netra) AEW&C फाल्कन (Phalcon) AWACS
उत्पत्ति / मूल पूर्णतः स्वदेशी (DRDO और CABS द्वारा विकसित) इजरायली रडार तकनीक + रूसी विमान प्लेटफॉर्म
एयरक्राफ्ट प्लेटफ़ॉर्म एम्ब्रेयर ERJ 145 (Embraer) इल्युशिन IL-76 (Ilyushin)
रडार का प्रकार एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) फेज़्ड ऐरे स्टेटिक रडार
मुख्य युद्धक भूमिका त्वरित प्रतिक्रिया, लचीली और अत्यधिक तेज हवाई निगरानी भारी, दीर्घकालिक और रणनीतिक हवाई नियंत्रण
भविष्य की योजना आगामी ‘नेत्र Mk-2’ (Airbus A321 आधारित) पर कार्य जारी वर्तमान में 3 विमान वायुसेना की सेवा में सक्रिय

आत्मनिर्भर रक्षा, अटूट सुरक्षा: क्या है भविष्य का रोडमैप?

समारोह के दौरान वीडियो संदेश के जरिए जुड़े चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि वर्तमान के संवेदनशील वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) माहौल को देखते हुए भारत का यह कदम बेहद रणनीतिक है। डीआरडीओ के एयरोनॉटिक्स क्लस्टर की महानिदेशक डॉ. के राजलक्ष्मी मेनन और इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर के महानिदेशक डॉ. बीके दास ने भी इस प्रोजेक्ट के दौरान आई चुनौतियों और सिस्टम इंजीनियरिंग की सफलता को रेखांकित किया।

इस शानदार सफलता को देखते हुए भारत सरकार ने पहले ही ‘नेत्र Mk-2’ (Netra Mk-2) प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत वायुसेना के बेड़े में 6 और नए विमान शामिल किए जा रहे हैं। इन नए सिस्टम्स को एअर इंडिया के बड़े ‘एयरबस A321’ विमानों पर विकसित किया जा रहा है, जिससे भारत की टोही क्षमता और रडार रेंज में कई गुना इजाफा हो जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा सचिव व डीआरडीओ चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने इस ऐतिहासिक मील के पत्थर के लिए पूरी टीम को बधाई दी है और इसे ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ता कदम बताया है।