वैदिक साप्ताहिक पंचांग एवं विस्तृत गणना
अवधि: 29 जून 2026 से 05 जुलाई 2026
“अयन: उत्तरायन | ऋतु: ग्रीष्म-वर्षा | संवत्सर: कीलक | महीना: आषाढ़”
- 29 जून: आषाढ़ मास, शुक्ल पक्ष पूर्णिमा / व्रत पूर्णिमा, आषाढ़ स्नान समाप्त।
- 30 जून: श्रावण मास प्रारंभ (प्रतिपदा), उत्तर भारत परंपरा अनुसार श्रावण कृष्ण पक्ष शुरू।
- 03 जुलाई: संकष्टी चतुर्थी व्रत (श्रावण कृष्ण चतुर्थी)।
- 05 जुलाई: भानु सप्तमी / विवस्वत सप्तमी।
मूल पंचांग विवरण
| तत्व | विवरण व समय |
|---|---|
| तिथि | पूर्णिमा रात्रि 10:42 बजे तक, तत्पश्चात प्रतिपदा। |
| नक्षत्र | मूल नक्षत्र दोपहर 12:15 बजे तक, उसके बाद पूर्वाषाढ़ा। |
| योग | शुक्ल योग शाम 04:32 बजे तक, उसके बाद ब्रह्म योग। |
| करण | विष्टि (भद्रा) सुबह 09:55 बजे तक, उसके बाद बव करण रात्रि 10:42 बजे तक। |
| पक्ष / मास | शुक्ल पक्ष, आषाढ़ मास (अमांत व पूर्णिमांत दोनों अनुसार)। |
| सूर्योदय: सुबह 05:27 | सूर्यास्त: शाम 07:23 |
| चन्द्रोदय: शाम 07:18 | चन्द्रास्त: अगले दिन सुबह 05:32 |
| सूर्य राशि: मिथुन | चन्द्र राशि: धनु (अहोरात्र) |
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:58 से दोपहर 12:54 तक।
- अमृत काल: सुबह 06:40 से सुबह 08:25 तक।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:44 से दोपहर 03:40 तक।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:21 से शाम 07:43 तक।
- राहुकाल: सुबह 07:12 से सुबह 08:56 तक (इस समय शुभ कार्य वर्जित हैं)।
- यमगण्ड: दोपहर 10:41 से दोपहर 12:25 तक।
- गुलिक काल: दोपहर 02:10 से शाम 03:54 तक।
- भद्रा: सुबह 05:27 से सुबह 09:55 तक (स्वर्ग लोक की भद्रा, शुभ कार्यों में त्याज्य)।
- दिशाशूल: पूर्व दिशा (यदि यात्रा अनिवार्य हो, तो दर्पण देखकर या घी खाकर निकलें)।
आज गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व है। इस दिन महर्षि वेदव्यास जी की पूजा की जाती है। शिष्य अपने गुरुओं का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आज मूल नक्षत्र होने के कारण केतु जनित दोषों की शांति के लिए दान करना शुभ रहेगा। धनु राशि का चंद्रमा मन में धार्मिक विचारों की वृद्धि करेगा।
मूल पंचांग विवरण
| तत्व | विवरण व समय |
|---|---|
| तिथि | प्रतिपदा तिथि रात्रि 11:55 बजे तक, तत्पश्चात द्वितीया तिथि। |
| नक्षत्र | पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र दोपहर 02:10 बजे तक, उसके बाद उत्तराषाढ़ा। |
| योग | ब्रह्म योग दोपहर 03:45 बजे तक, उसके बाद इंद्र योग। |
| करण | बालव करण दोपहर 11:18 बजे तक, कौलव करण रात्रि 11:55 बजे तक। |
| पक्ष / मास | कृष्ण पक्ष, श्रावण मास (उत्तर भारतीय पूर्णिमांत कैलेंडर अनुसार आज से सावन शुरू)। |
| सूर्योदय: सुबह 05:28 | सूर्यास्त: शाम 07:23 |
| चन्द्रोदय: रात्रि 08:15 | चन्द्रास्त: सुबह 06:35 |
| सूर्य राशि: मिथुन | चन्द्र राशि: धनु राशि दोपहर 08:12 तक, उसके बाद मकर राशि। |
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:59 से दोपहर 12:54 तक।
- अमृत काल: सुबह 08:50 से सुबह 10:32 तक।
- द्विपुष्कर योग: दोपहर 02:10 से रात्रि 11:55 तक (इस अवधि में किए गए निवेश का दोगुना लाभ मिलता है)।
- राहुकाल: दोपहर 03:54 से शाम 05:39 तक।
- यमगण्ड: सुबह 08:56 से सुबह 10:41 तक।
- गुलिक काल: दोपहर 12:25 से दोपहर 02:10 तक।
- दिशाशूल: उत्तर दिशा (यात्रा वर्जित, अति आवश्यक होने पर गुड़ खाकर यात्रा करें)।
आज से पवित्र श्रावण मास का प्रारंभ हो रहा है। भगवान शिव की आराधना के लिए यह महीना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। द्विपुष्कर योग की उपस्थिति के कारण आज भूमि, भवन या मांगलिक संकल्प लेना अत्यंत फलदायी रहेगा। दोपहर के बाद चंद्रमा मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे शनि-चंद्र का युति प्रभाव (विष योग का आंशिक असर) मानसिक रूप से थोड़ा संवेदनशील बना सकता है। शिव चालीसा का पाठ करें।
मूल पंचांग विवरण
| तत्व | विवरण व समय |
|---|---|
| तिथि | द्वितीया तिथि मध्यरात्रि 01:30 (02 जुलाई सुबह) बजे तक, तत्पश्चात तृतीया। |
| नक्षत्र | उत्तराषाढ़ा नक्षत्र शाम 04:30 बजे तक, उसके बाद श्रवण नक्षत्र। |
| योग | इंद्र योग दोपहर 03:10 बजे तक, उसके बाद वैधृति योग। |
| करण | तैतिल करण दोपहर 12:42 बजे तक, गर करण मध्यरात्रि 01:30 बजे तक। |
| पक्ष / मास | कृष्ण पक्ष, श्रावण मास। |
| सूर्योदय: सुबह 05:28 | सूर्यास्त: शाम 07:23 |
| चन्द्रोदय: रात्रि 09:07 | चन्द्रास्त: सुबह 07:42 |
| सूर्य राशि: मिथुन | चन्द्र राशि: मकर (अहोरात्र) |
- अभिजीत मुहूर्त: आज कोई अभिजीत मुहूर्त नहीं है (बुधवार को सामान्यतः वर्जित माना जाता है)।
- अमृत काल: दोपहर 11:10 से दोपहर 12:52 तक।
- सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 04:30 से अगले दिन सुबह 05:29 तक (सभी कार्यों की सफलता के लिए उत्तम)।
- राहुकाल: दोपहर 12:26 से दोपहर 02:10 तक।
- यमगण्ड: सुबह 07:13 से सुबह 08:57 तक।
- वैधृति योग: दोपहर 03:10 से पूर्ण रात्रि (वैधृति योग में मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं)।
- दिशाशूल: उत्तर दिशा।
शाम के समय सर्वार्थ सिद्धि योग की शुरुआत हो रही है, जो व्यापारिक लेन-देन, नए अनुबंध और रुकी हुई योजनाओं को गति देने के लिए सर्वोत्तम है। श्रवण नक्षत्र के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु हैं और यह महीना शिव जी का है, अतः आज हरि-हर (विष्णु और शिव) दोनों की संयुक्त उपासना से संकटों का नाश होगा।
मूल पंचांग विवरण
| तत्व | विवरण व समय |
|---|---|
| तिथि | तृतीया तिथि तड़के सुबह 03:20 (03 जुलाई) बजे तक, तत्पश्चात चतुर्थी। |
| नक्षत्र | श्रवण नक्षत्र शाम 07:05 बजे तक, उसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र। |
| योग | वैधृति योग दोपहर 02:45 बजे तक, उसके बाद विष्कुंभ योग। |
| करण | वणिज करण दोपहर 02:25 बजे तक, भद्रा (विष्टि) तड़के सुबह 03:20 बजे तक। |
| पक्ष / मास | कृष्ण पक्ष, श्रावण मास। |
| सूर्योदय: सुबह 05:29 | सूर्यास्त: शाम 07:23 |
| चन्द्रोदय: रात्रि 09:55 | चन्द्रास्त: सुबह 08:49 |
| सूर्य राशि: मिथुन | चन्द्र राशि: मकर राशि शाम 07:05 तक, उसके बाद कुंभ राशि। |
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:59 से दोपहर 12:54 तक।
- अमृत सिद्घि योग: सुबह 05:29 से शाम 07:05 तक।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:08 से सुबह 04:48 तक।
- राहुकाल: दोपहर 02:11 से शाम 03:55 तक।
- यमगण्ड: सुबह 05:29 से सुबह 07:13 तक।
- भद्रा: दोपहर 02:25 से देर रात 03:20 तक (पाताल लोक की भद्रा)।
- दिशाशूल: दक्षिण दिशा (यदि यात्रा करनी हो तो जीरा या दही खाकर प्रस्थान करें)।
आज अमृत सिद्धि योग और गुरुवार का सुंदर संयोग है, जो धार्मिक अनुष्ठान, दीक्षा ग्रहण करने और ज्ञानार्जन के लिए अति विशिष्ट है। दोपहर के बाद भद्रा का साया रहेगा, हालांकि पाताल की भद्रा होने के कारण इसका अनिष्ट प्रभाव पृथ्वी पर कम होता है, फिर भी कोई नया महत्वपूर्ण कार्य भद्रा काल में शुरू न करें। शाम को चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे।
मूल पंचांग विवरण
| तत्व | विवरण व समय |
|---|---|
| तिथि | चतुर्थी तिथि अगले दिन तड़के सुबह 05:15 बजे तक, तत्पश्चात पंचमी। |
| नक्षत्र | धनिष्ठा नक्षत्र रात 09:40 बजे तक, उसके बाद शतभिषा नक्षत्र। |
| योग | विष्कुंभ योग दोपहर 02:20 बजे तक, उसके बाद प्रीति योग। |
| करण | बव करण शाम 04:20 बजे तक, बालव करण अगले दिन सुबह 05:15 बजे तक। |
| पक्ष / मास | कृष्ण पक्ष, श्रावण मास। |
| सूर्योदय: सुबह 05:29 | सूर्यास्त: शाम 07:23 |
| चन्द्रोदय: रात्रि 10:38 | चन्द्रास्त: सुबह 09:55 |
| सूर्य राशि: मिथुन | चन्द्र राशि: कुंभ राशि (अहोरात्र) – पंचक प्रभावी |
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:59 से दोपहर 12:55 तक।
- अमृत काल: दोपहर 01:15 से दोपहर 02:55 तक।
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:22 से शाम 07:44 तक।
- राहुकाल: सुबह 10:42 से दोपहर 12:26 तक।
- यमगण्ड: दोपहर 03:55 से शाम 05:39 तक।
- पंचक काल: पूरे दिन पंचक प्रभावी रहेगा (लकड़ी इकट्ठा करना, घर की छत डालना वर्जित)।
- दिशाशूल: पश्चिम दिशा।
आज संकष्टी चतुर्थी व्रत है। भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने और विघ्नों को दूर करने के लिए आज का दिन विशेष है। आज रात को चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। ध्यान रखें कि चंद्रमा कुंभ राशि में होने से धनिष्ठा पंचक चल रहा है, इसलिए दक्षिण दिशा की यात्रा और तृण-काष्ठ संचय से बचें।
मूल पंचांग विवरण
| तत्व | विवरण व समय |
|---|---|
| तिथि | पंचमी तिथि पूर्ण दिन और पूर्ण रात्रि रहेगी (क्षय तिथि नहीं है, सूर्योदय व्यापिनी)। |
| नक्षत्र | शतभिषा नक्षत्र रात्रि 12:10 बजे तक, उसके बाद पूर्वाभाद्रपद। |
| योग | प्रीति योग दोपहर 01:50 बजे तक, उसके बाद आयुष्मान योग। |
| करण | कौलव करण शाम 06:10 बजे तक, तैतिल करण अगले दिन सुबह 05:20 बजे तक। |
| पक्ष / मास | कृष्ण पक्ष, श्रावण मास। |
| सूर्योदय: सुबह 05:30 | सूर्यास्त: शाम 07:23 |
| चन्द्रोदय: रात्रि 11:18 | चन्द्रास्त: सुबह 11:00 |
| सूर्य राशि: मिथुन | चन्द्र राशि: कुंभ राशि (अहोरात्र) – पंचक प्रभावी |
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से दोपहर 12:55 तक।
- निशीथ काल मुहूर्त: रात्रि 12:05 से मध्यरात्रि 12:46 तक।
- राहुकाल: सुबह 08:58 से सुबह 10:42 तक।
- यमगण्ड: दोपहर 02:11 से शाम 03:55 तक।
- पंचक काल: पूरे दिन पंचक रहेगा।
- दिशाशूल: पूर्व दिशा।
शनिवार के दिन कुंभ राशि का चंद्रमा और शतभिषा नक्षत्र का होना राहु और शनि के संयुक्त प्रभाव को दर्शाता है। शनि देव की साढ़ेसाती और ढैय्या से पीड़ित जातकों के लिए आज पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना और शनि चालीसा का पाठ करना अत्यंत कष्टनिवारक रहेगा। महामृत्युंजय मंत्र का जाप मानसिक शांति प्रदान करेगा।
मूल पंचांग विवरण
| तत्व | विवरण व समय |
|---|---|
| तिथि | पंचमी तिथि सुबह 07:10 बजे तक, उसके बाद षष्ठी तिथि। |
| नक्षत्र | पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र मध्यरात्रि 02:35 बजे तक, उसके बाद उत्तराभाद्रपद। |
| योग | आयुष्मान योग दोपहर 01:25 बजे तक, उसके बाद सौभाग्य योग। |
| करण | गर करण सुबह 07:10 बजे तक, वणिज करण शाम 07:55 बजे तक। |
| पक्ष / मास | कृष्ण पक्ष, श्रावण मास। |
| सूर्योदय: सुबह 05:30 | सूर्यास्त: शाम 07:23 |
| चन्द्रोदय: रात्रि 11:55 | चन्द्रास्त: दोपहर 12:05 |
| सूर्य राशि: मिथुन | चन्द्र राशि: कुंभ राशि शाम 08:15 तक, उसके बाद मीन राशि। – पंचक प्रभावी |
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से दोपहर 12:55 तक।
- सौभाग्य योग: दोपहर 01:25 से पूर्ण रात्रि (वैवाहिक चर्चा और कलात्मक कार्यों के लिए शुभ)।
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:10 से सुबह 04:50 तक।
- राहुकाल: शाम 05:39 से शाम 07:23 तक।
- यमगण्ड: दोपहर 12:26 से दोपहर 02:11 तक Bans।
- भद्रा: शाम 07:55 से अगले दिन सुबह 07:30 तक (स्वर्ग लोक की भद्रा)।
- पंचक काल: पूर्ण दिन पंचक संचरण रहेगा।
- दिशाशूल: पश्चिम दिशा।
रविवार के दिन सूर्य देव की उपासना का विशेष फल मिलता है। आज आयुष्मान और सौभाग्य योग का अद्भुत मेल है, जिससे सरकारी कार्यों में सफलता और आरोग्य की प्राप्ति होगी। सुबह तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और कुंकुम मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। शाम को चंद्रमा मीन राशि में चले जाएंगे, जिससे पंचक का स्वरूप बदलेगा लेकिन पंचक समाप्त नहीं होगा।
सप्ताह के मुख्य ग्रह गोचर एवं उनके उपाय
इस सप्ताह सूर्य देव मिथुन राशि में गोचर कर रहे हैं तथा चंद्रमा का गोचर धनु राशि से मीन राशि तक होगा। सप्ताह के उत्तरार्ध (3 जुलाई से 5 जुलाई) में पंचक का प्रभाव रहेगा, इसलिए इस अवधि में दक्षिण दिशा की लंबी यात्राएं करने से बचें तथा किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य की शुरुआत या ईंधन संचय जैसे कार्यों को टालें।
सप्ताह के अचूक उपाय:
- सोमवार (गुरु पूर्णिमा): अपने गुरुजनों को प्रणाम करें, पीली वस्तुओं का दान करें।
- मंगलवार व बुधवार: सावन के शुरुआती दिन होने के कारण ‘ॐ नमः शिवाय’ का 108 बार जाप करें।
- शुक्रवार (संकष्टी): गणेश जी को दूर्वा (दूब घास) और मोदक अर्पित करें, कर्ज से मुक्ति मिलेगी।
।। इति शुभम् ।।










