दिल्ली रवाना होने से पहले कांग्रेस नेता दीपक पाराशर को किया गया हाउस अरेस्ट, लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन पर गरमाई सियासत
उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद के अंतर्गत आने वाले धार्मिक नगरी वृन्दावन से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है। कांग्रेस पार्टी के सोशल आउटरीच विभाग, मथुरा के जिलाध्यक्ष दीपक पाराशर को दिल्ली में चल रहे या प्रस्तावित छात्र आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना होने से ठीक पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस द्वारा उनके आवास पर ही नजरबंद यानी हाउस अरेस्ट कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दलों द्वारा प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
छात्र आंदोलन में शामिल होने पर रोक लगाने की कोशिश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, देश की राजधानी नई दिल्ली में छात्रों से जुड़े किसी महत्वपूर्ण ज्वलंत मुद्दे पर आंदोलन और प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। इस आंदोलन में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने तथा छात्र शक्ति के समर्थन में आवाज बुलंद करने के लिए वृन्दावन निवासी युवा कांग्रेस नेता दीपक पाराशर दिल्ली के लिए प्रस्थान करने वाले थे। लेकिन इससे पहले कि वे अपने आवास से बाहर निकल पाते, स्थानीय पुलिस बल उनके घर पर पहुंच गया और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य संभावित विरोध प्रदर्शनों या दिल्ली कूच को रोकना माना जा रहा है। हालांकि, इस तरह से विपक्षी दलों के पदाधिकारियों को उनके ही घरों में कैद कर देना लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत मिलने वाले व्यक्तिगत स्वतंत्रता और आंदोलन के अधिकारों पर सीधा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार
इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेता दीपक पाराशर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन के इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि एक नागरिक और राजनीतिक कार्यकर्ता के तौर पर अपनी बात रखना तथा जनता के हितों के लिए संघर्ष करना पूरी तरह से लोकतांत्रिक अधिकार है।
उन्होंने आगे विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि देश का संविधान प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचारों की अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार देता है। यदि सत्ता में बैठे लोग या प्रशासनिक अमला इस प्रकार की दमनकारी नीतियों का सहारा लेगा, तो इससे देश के मूल लोकतांत्रिक ढांचे को गहरी क्षति पहुंचेगी। आंदोलन को बलपूर्वक दबाने की यह संस्कृति तानाशाही रवैये को दर्शाती है।
संवादहीनता और दमन की नीति पर सवाल
दीपक पाराशर ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन को जनता की समस्याओं का समाधान संवाद के जरिए करना चाहिए, न कि लाठी, पाबंदी और हाउस अरेस्ट जैसे हथकंडों के माध्यम से। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी चिंताओं पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह के दमनकारी उपाय उनके और उनके साथियों के हौसलों को नहीं तोड़ सकते। सरकार जितनी भी कोशिश कर ले, जनहित के मुद्दों को उठाने से उन्हें रोका नहीं जा सकता है।
संघर्ष जारी रखने का संकल्प
घटना के दौरान अपने आवास पर नजरबंद किए जाने के बावजूद कांग्रेस नेता ने अपने इरादे बुलंद रखे। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वे भारतीय संविधान और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों में अटूट विश्वास रखते हैं। उन्होंने संकल्प दोहराया कि वे जनहित, छात्र अधिकारों और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आगे भी पूरी ताकत से, लेकिन पूरी तरह से शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीकों से अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
इस घटना के बाद से मथुरा और आसपास के क्षेत्र के कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी रोष व्याप्त है। स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार विपक्ष की हर आवाज को कुचलने का प्रयास कर रही है, जिसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।














