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राज्यपाल आपत्तिजनक पोस्ट मामला: HC से मिली राहत, बिना शर्त मांगनी होगी माफी






राज्यपाल विवादित टिप्पणी मामला: हाईकोर्ट ने शर्तों के साथ याचिकाओं का किया निराकरण, बिना शर्त माफी मांगेंगे याचिकाकर्ता


छत्तीसगढ़ के राज्यपाल पर आपत्तिजनक पोस्ट का मामला: हाईकोर्ट ने शर्तों के साथ एफआईआर निरस्तीकरण याचिका पर दिया राहत का आदेश

  • राज्यपाल के विरुद्ध सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कार्टून पोस्ट करने के मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने समझौते के आधार पर दिया फैसला।
  • याचिकाकर्ता प्रणव कलिता एवं लक्ष्यधर राजबोंगसी को अदालत में बिना शर्त लिखित माफी मांगने और उसी फेसबुक अकाउंट पर माफीनामा प्रकाशित करने के निर्देश।
  • गुवाहाटी के प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में भी माफीनामा प्रकाशित करना अनिवार्य।
  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए संवैधानिक पद की गरिमा की रक्षा के लिए लिया गया निर्णय।

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के विरुद्ध सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक कार्टून और असमिया भाषा में अपमानजनक कैप्शन शेयर करने के मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं द्वारा बिना शर्त माफी मांगने और राज्य सरकार की कड़ी शर्तों का अनुपालन करने के आधार पर एफआईआर से संबंधित मामले का निराकरण कर दिया है।

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क्या था पूरा मामला?

याचिकाकर्ता प्रणव कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी ने छत्तीसगढ़ के प्रथम नागरिक एवं संवैधानिक पद पर आसीन राज्यपाल के विरुद्ध अपमानजनक और आपत्तिजनक सामग्री अपने-अपने फेसबुक अकाउंट पर साझा की थी। इससे राज्यपाल के पद की गरिमा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची थी तथा विभिन्न वर्गों के मध्य वैमनस्यता और लोक शांति प्रभावित हुई थी। इस संदर्भ में राजभवन की ओर से थाना सिविल लाइंस, रायपुर में एफआईआर क्रमांक 232/2026 दर्ज कराई गई थी, जिसकी चार्जशीट मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रायपुर के न्यायालय में दाखिल हो चुकी है।

सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता ने रखा राज्य का पक्ष

उक्त एफआईआर को निरस्त कराने हेतु याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया था। सुनवाई के दौरान 14 अगस्त 2026 को याचिकाकर्ताओं ने बिना शर्त माफी मांगने, सामग्री को फेसबुक से स्थायी रूप से हटाने और असम में दर्ज प्रतिशोधात्मक एफआईआर वापस लेने की इच्छा जताई। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज गोयल ने कहा कि याचिकाकर्ताओं का कृत्य अक्षम्य है और स्वीकार योग्य नहीं है।

इसके पश्चात 19 अगस्त 2026 को याचिकाकर्ताओं द्वारा पुनः शपथ पत्र पेश कर माफी मांगे जाने पर राज्य सरकार की कड़ी शर्तों के अधीन समझौते पर सहमति व्यक्त की गई।

समझौते की प्रमुख शर्तें:

  • माननीय न्यायालय के समक्ष बिना शर्त लिखित में माफी मांगना।
  • मूल पोस्ट के समान प्रमुखता के साथ उसी फेसबुक अकाउंट पर माफीनामा का प्रकाशन करना।
  • गुवाहाटी स्थित निर्दिष्ट दैनिक समाचार पत्रों में माफीनामा प्रकाशित करना।
  • याचिकाकर्ताओं के नियंत्रण वाले सभी डिजिटल व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से आपत्तिजनक सामग्री को स्थायी रूप से हटाना।
  • भविष्य में इस तरह के आचरण को न दोहराने का वचन देना और असम में दर्ज एफआईआर को वापस लेने हेतु उचित कदम उठाना।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत न्यायालय का निर्देश

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पाया कि प्रकरण सोशल मीडिया पोस्ट से संबंधित है और राज्य सरकार ने शर्तों के तहत समझौते पर सहमति दी थी। न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 (BNSS) के तहत अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए संवैधानिक पद की गरिमा की रक्षा के उद्देश्य से मामले का निपटारा किया। हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं को इन सभी शर्तों का तुरंत और पूर्ण अनुपालन करना होगा।

“माननीय उच्च न्यायालय द्वारा समझौते की शर्तों के अनुपालन पर ही याचिकाकर्ताओं को राहत दी गई है। संवैधानिक पद की गरिमा की रक्षा के लिए सभी निर्धारित शर्तों का तुरंत अनुपालन करना अनिवार्य होगा।”
— प्रेस अधिकारी, लोकभवन, रायपुर (छ.ग.)


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