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MP Nasha Mukt Bharat Abhiyan: नशामुक्त मध्यप्रदेश के लिए जनआंदोलन, 12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स तैनात | Pradesh Khabar






मध्यप्रदेश में नशामुक्त भारत अभियान बना जनआंदोलन: पुनर्वास, 12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स और पुलिस की अहम भूमिका | प्रदेश खबर


मध्यप्रदेश में जनआंदोलन बना नशामुक्त भारत अभियान: 12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स और पुनर्वास केंद्रों से बदल रही युवाओं की तस्वीर

भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है, जिनकी ऊर्जा और प्रतिभा को सही दिशा देना राष्ट्र निर्माण की प्राथमिक आवश्यकता है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति केवल व्यक्ति या परिवार तक सीमित न रहकर समाज और राष्ट्र के भविष्य के लिए एक बड़ी सामाजिक चुनौती है। इसी सोच के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर देशभर में ‘नशामुक्त भारत अभियान’ संचालित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि नशे की गिरफ्त में आए लोगों का उपचार, परामर्श और पुनर्वास कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है।

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस अभियान को व्यापक जनआंदोलन का रूप दिया जा रहा है। राज्य सरकार ने सामाजिक सहभागिता, जनजागरूकता, उपचार और संस्थागत समन्वय को अभियान का मुख्य आधार बनाया है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा जमीनी स्तर पर विविध गतिविधियां चलाई जा रही हैं।

जनजागरण से जनआंदोलन की ओर बढ़ते कदम

नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उसके पारिवारिक, आर्थिक और सामाजिक जीवन को भी नुकसान पहुंचाता है। राज्य सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए प्रशासनिक कदमों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं, युवाओं और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी तय की है। वर्तमान में राज्य में नशामुक्ति और जनजागरूकता के लिए 213 पंजीकृत संस्थाएं निरंतर कार्य कर रही हैं।

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राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश को मिला सम्मान

नशामुक्त भारत अभियान में मध्यप्रदेश के प्रभावी प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। वर्ष 2023-24 के लिए संस्थागत पुरस्कार श्रेणी में शहीद भगत सेवा समिति, रीवा तथा व्यक्तिगत श्रेणी में राजीव तिवारी (मुक्ति नशामुक्ति केंद्र, भोपाल) को सम्मानित किया गया। 13 अगस्त 2025 को भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित राज्य स्तरीय शपथ ग्रहण समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों का सम्मान किया गया।

पुनर्वास एवं उपचार की सुदृढ़ व्यवस्थाएं

  • नशामुक्ति सह पुनर्वास केंद्र (IRCA): प्रदेश में 13 केंद्र संचालित।
  • आउटरीच एंड ड्रॉप इन सेंटर (ODIC): 7 केंद्र संचालित।
  • कम्युनिटी बेस्ड पीयर-लेड इंटरवेंशन सेंटर (CPLI): 3 केंद्र संचालित।
  • 11 केंद्रीय जिलों में वित्तीय स्वीकृति: भोपाल, सागर, इंदौर, जबलपुर, रीवा, ग्वालियर, नरसिंहपुर, सतना, बड़वानी और उज्जैन में नशामुक्ति केंद्रों की स्थापना और सुविधाओं के विस्तार हेतु सहायता।

12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स बने बदलाव के सहभागी

नशे के खिलाफ इस लड़ाई को हर घर तक पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश में 12,000 मास्टर वॉलंटियर्स तैयार किए गए हैं। ये स्वयंसेवक स्थानीय स्तर पर युवाओं से संवाद स्थापित कर रहे हैं और नशामुक्त भारत अभियान की गतिविधियों को गति दे रहे हैं।

युवाओं पर विशेष फोकस और डिजिटल पहल

अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 18 नवंबर 2025 को अभियान की पांचवीं वर्षगांठ के अवसर पर युवाओं को जोड़ने के लिए विशेष आयोजन किए गए। डिजिटल तकनीक का उपयोग करते हुए QR Code के माध्यम से लगभग 2.46 लाख ऑनलाइन ई-प्लेज (e-Pledge) भी कराए गए।

इसके अलावा, 31 मई 2025 को विश्व तंबाकू निषेध दिवस, 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निवारण दिवस, 2 से 8 अक्टूबर तक मद्य निषेध सप्ताह तथा 30 जनवरी 2026 को मद्य निषेध संकल्प दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में जागरूकता अभियान चलाए गए।

मध्यप्रदेश पुलिस का संदेश: “नशे से दूरी है बहुत जरूरी”

कानून व्यवस्था के साथ-साथ नशामुक्त समाज के निर्माण में मध्यप्रदेश पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। पुलिस द्वारा “नशे से दूरी है बहुत जरूरी” नामक विशेष अभियान चलाकर अवैध कारोबार पर नियंत्रण और जन-जागरूकता दोनों मोर्चों पर काम किया जा रहा है।

“नशे के विरुद्ध संघर्ष में केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। जब परिवार, शिक्षक, युवा, सामाजिक संस्थाएं और जनप्रतिनिधि एक साथ खड़े होते हैं, तभी स्थायी सामाजिक परिवर्तन संभव होता है।” — नारायण सिंह कुशवाहा, मंत्री, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण

सामूहिक संकल्प से नशामुक्त मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश सरकार का स्पष्ट संदेश है कि नशे की चपेट में आए व्यक्ति को अपराधी के रूप में देखने के बजाय उसे सहानुभूति, उपचार और पुनर्वास की आवश्यकता वाले व्यक्ति के रूप में सहयोग दिया जाए। जनभागीदारी, जागरूकता और सुदृढ़ पुनर्वास व्यवस्था के समन्वित प्रयासों से ही एक स्वस्थ और सशक्त मध्यप्रदेश का निर्माण संभव होगा।


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