अब MP में 24 घंटे खुल सकेंगी दुकानें, होटल और मॉल: राज्यपाल ने ‘श्रम शक्ति संहिता 2026’ को दी मंजूरी; हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम नहीं, सुरक्षा की जिम्मेदारी मालिकों की
इस कानून के लागू होने के साथ ही मध्य प्रदेश देश के उन अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने रात्रि अर्थव्यवस्था (Night Economy) को बढ़ावा देने के लिए श्रम कानूनों में व्यापक और क्रांतिकारी सुधार किए हैं। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि दुकानों के 24 घंटे खुलने का अर्थ यह कदापि नहीं है कि कर्मचारियों का शोषण होगा। कर्मचारियों की कार्य-अवधि, सुरक्षा, ओवरटाइम भुगतान और महिला श्रमिकों के अधिकारों के संरक्षण के लिए कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं।
1. 24×7 कारोबार की आजादी: क्या बदला और क्या मिलेगा?
नई संहिता के प्रभाव में आते ही प्रदेश में पुरानी कार्य-समय व्यवस्था समाप्त हो गई है। अब व्यापारियों और उद्योगपतियों को अपनी दुकानें या व्यावसायिक संस्थान समय पूर्व बंद करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
- नाइट लाइफ और आर्थिक विकास: शॉपिंग मॉल, फूड कोर्ट, मल्टीप्लेक्स, बेकरी, ग्रोसरी स्टोर और रेस्टोरेंट देर रात तक या पूरी रात खुले रह सकेंगे। इससे देर रात यात्रा करने वाले यात्रियों, नाइट शिफ्ट में काम करने वाले आईटी/बीपीओ कर्मचारियों और आम नागरिकों को सुविधाएं मिलेंगी।
- नए रोजगार के अवसर: 24 घंटे संचालन के कारण संस्थानों को अतिरिक्त पारियों (Shifts) में जनशक्ति की आवश्यकता होगी, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों नए रोजगार सृजित होंगे।
- स्थानीय शराब दुकानों पर नियम लागू नहीं: शासन ने स्पष्ट किया है कि मदिरा और आबकारी दुकानों के खुलने एवं बंद होने का समय आबकारी नीति और स्थानीय प्रशासन द्वारा तय नियमों के अनुसार ही निर्धारित होगा।
कर्मचारियों के लिए समय-सीमा: काम के घंटे और शिफ्ट का गणित
प्रतिष्ठान भले ही 24 घंटे खुले रहें, लेकिन किसी भी कर्मचारी से मनमाने ढंग से काम नहीं कराया जा सकेगा। नए नियमों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- साप्ताहिक सीमा: एक कर्मचारी से एक सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे ही काम लिया जा सकता है।
- दैनिक सीमा: किसी भी परिस्थिति में एक दिन में कर्मचारी की ड्यूटी 12 घंटे से अधिक नहीं होगी (विश्राम समय सहित)।
- शिफ्ट प्रणाली (Staggered Shifts): संस्थानों को अपने कर्मचारियों का रोस्टर तैयार कर अलग-अलग पारियों में ड्यूटी लगानी होगी।
- ओवरटाइम का नियम: तय घंटों से अतिरिक्त काम कराने के लिए कर्मचारी की लिखित या स्पष्ट सहमति आवश्यक होगी। इसके साथ ही तय नियमों के अनुसार ओवरटाइम का दोगुना या निर्धारित अतिरिक्त भुगतान करना अनिवार्य होगा।
2. कारोबारियों के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’: एक बार ही होगा ऑनलाइन पंजीयन
पुराने श्रम कानूनों में कारोबारियों को हर वर्ष या नियत अवधि में अपनी दुकान और प्रतिष्ठान का नवीनीकरण (Renewal) कराना पड़ता था, जिससे लालफीताशाही और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता था। नई संहिता 2026 ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुगम बना दिया है।
- एकल ऑनलाइन पंजीकरण: अब व्यवसायी को केवल एक बार पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
- यूनिक पहचान संख्या (Unique ID): पंजीकरण प्रक्रिया पूर्ण होते ही व्यवसायी को एक यूनिक पहचान नंबर और डिजिटल प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा।
- स्वतः अपडेट सुविधा: यदि भविष्य में पार्टनरशिप, पते या कारोबार के स्वरूप में कोई परिवर्तन होता है, तो व्यवसायी ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर स्वयं विवरण अपडेट कर सकेगा।
- बिजनेस बंद करने पर आसान व्यवस्था: यदि कोई कारोबारी अपना संस्थान बंद करता है, तो उसे ऑनलाइन लिखित सूचना देनी होगी, जिसके बाद पंजीयन स्वतः रद्द माना जाएगा।
3. कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य: मालिकों पर तय हुई सीधी जवाबदेही
‘मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता 2026’ में कर्मचारियों के कार्यस्थल की परिस्थितियों पर विशेष ध्यान दिया गया है। अब नियोक्ता (मालिक) केवल काम लेने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा प्रदान करना होगा।
| सुरक्षा मानक | मालिकों/प्रतिष्ठानों के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश |
|---|---|
| कार्यस्थल स्वच्छता | पीने योग्य शुद्ध जल, स्वच्छ शौचालय, पर्याप्त रोशनी और हवादार वातावरण की व्यवस्था। |
| अग्नि एवं आपात सुरक्षा | अग्नि शामक यंत्र (Fire Extinguishers), आपातकालीन निकास (Emergency Exits) और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य। |
| दस्तावेज रखने पर प्रतिबंध | कोई भी नियोक्ता कर्मचारी के मूल शैक्षणिक या पहचान दस्तावेज जमा/जब्त (Retain) नहीं कर सकेगा। |
| हादसे की स्थिति में जांच | किसी दुर्घटना या खतरे की स्थिति में श्रम विभाग के अधिकारी तुरंत जांच कर मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकेंगे। |
महिला कर्मचारियों के लिए रात्रि शिफ्ट के कड़े नियम
नई संहिता महिलाओं को रात की पारियों में काम करने की अनुमति देती है, लेकिन नियोक्ता पर निम्नलिखित शर्तें आयद की गई हैं:
- सुरक्षित परिवहन (Cab/Transport Facility): रात्रि में काम करने वाली महिला कर्मचारियों को उनके घर तक सुरक्षित छोड़ने और लाने की व्यवस्था नियोक्ता को करनी होगी।
- सीसीटीवी व सुरक्षा गार्ड: संस्थान परिसर में सीसीटीवी निगरानी और प्रशिक्षित महिला/पुरुष सुरक्षाकर्मियों की तैनाती अनिवार्य है।
- उत्पीड़न मुक्त माहौल: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम (POSH Act) के तहत शिकायत निवारण समिति का गठन अनिवार्य होगा।
4. असंगठित कामगारों और गिग वर्क्स के लिए सामाजिक सुरक्षा का ढांचा
इस संहिता की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मुख्यधारा से जोड़ना है। मध्य प्रदेश सरकार ने इस नई नीति में रिक्शा चालकों, घरेलू कामगारों, निर्माण श्रमिकों और डिलीवरी बॉय जैसे असंगठित कामगारों के लिए स्पष्ट प्रावधान किए हैं:
- कल्याणकारी योजनाओं का लाभ: असंगठित श्रमिकों को स्वास्थ्य बीमा, बच्चों की शिक्षा, मुफ्त दुर्घटना बीमा और आवास योजनाओं से सीधे जोड़ा जाएगा।
- सामाजिक सुरक्षा पोर्टल: इन श्रमिकों का डेटाबेस तैयार कर उन्हें विशेष सामाजिक सुरक्षा पहचान पत्र प्रदान किए जाएंगे।
- परिवहन व स्वास्थ्य सुविधाएं: राज्य सरकार श्रम कल्याण बोर्ड के माध्यम से असंगठित कामगारों के लिए रियायती स्वास्थ्य और परिवहन कार्ड योजनाएं चलाएगी।
5. शिकायत निवारण और पारदर्शी जांच प्रणाली
अक्सर देखा जाता है कि श्रम कानूनों का अनुपालन न होने पर कर्मचारियों को शिकायत करने का सही मंच नहीं मिलता। इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक स्तर पर त्रि-स्तरीय शिकायत निवारण ढांचा तैयार किया गया है:
1. आंतरिक शिकायत समितियां: प्रत्येक बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान में कर्मचारियों और प्रबंधन की संयुक्त समिति बनेगी जो आंतरिक विवादों को सुलझाएगी।
2. श्रम विभाग का निरीक्षण अधिकार: श्रम विभाग के अधिकारियों को आवश्यकता पड़ने पर बिना पूर्व सूचना के (या शिकायत मिलने पर) प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण करने और रिकॉर्ड की जांच करने का अधिकार होगा।
3. डिजिटल शिकायत निवारण: कर्मचारी अपनी बकाया मजदूरी, ओवरटाइम का भुगतान न मिलने या उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतें ऑनलाइन श्रम पोर्टल पर भी दर्ज करा सकेंगे।
निष्कर्ष: मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान
‘मध्य प्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता 2026’ न केवल राज्य में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को गति देगी, बल्कि इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे तेजी से बढ़ते शहरों को 24-घंटे जीवंत महानगरों की कतार में खड़ा करेगी। राज्य सरकार ने इसमें उद्योगपतियों की व्यापारिक सुगमता और कर्मचारियों के अधिकारों व सुरक्षा के बीच एक संतुलित मॉडल प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। नियमों के पारदर्शी अनुपालन से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगा।












