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मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम योजना: 7.13 लाख जनजातीय परिवारों को गांव में मिल रहा राशन | Pradesh Khabar






मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम योजना: 89 जनजातीय विकासखंडों के 7.13 लाख परिवारों को गांव में ही मिलेगा राशन | प्रदेश खबर


‘मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम’ योजना: 89 जनजातीय विकासखंडों के 7.13 लाख परिवारों को गांव में ही मिल रहा राशन, युवाओं को मिल रहा रोजगार

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों के नागरिकों की सुविधा और उन्हें सशक्त बनाने के लिए “मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम” योजना सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के पात्र परिवारों को उनके अपने गांव में ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

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मंत्री राजपूत के अनुसार, प्रदेश के 20 जिलों के अंतर्गत आने वाले 89 अनुसूचित जनजाति विकासखंडों की उचित मूल्य दुकानों के आश्रित गांवों में राशन सामग्री का परिवहन कर गांव में ही वितरण की सुदृढ़ व्यवस्था की गई है। योजना के अंतर्गत 6,575 आश्रित गांवों के लगभग 7 लाख 13 हजार जनजातीय परिवारों को सीधे उनके गांव में राशन सामग्री का वितरण कराया जा रहा है।

योजना की प्रमुख विशेषताएं और आंकड़े

  • प्रभावित क्षेत्र: 20 जिलों के 89 अनुसूचित जनजाति विकासखंड
  • लाभान्वित गांव: 6,575 आश्रित गांव
  • लाभान्वित परिवार: लगभग 7 लाख 13 हजार परिवार
  • निर्मित सेक्टर: राशन परिवहन के लिए 472 सेक्टर गठित
  • मार्जिन मनी सहायता: राज्य सरकार द्वारा ₹2 लाख से ₹3 लाख प्रति हितग्राही
  • मासिक वाहन किराया: 1 टन वाहन क्षमता पर ₹24,000 तथा 2 टन क्षमता पर ₹31,000

जनजातीय युवाओं को मिल रहा स्वरोजगार का अवसर

मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि राशन सामग्री के सुगम परिवहन के लिए पूरे क्षेत्र को 472 सेक्टर्स में विभाजित किया गया है। इन सेक्टर्स के गांवों में चयनित अनुसूचित जनजाति के पात्र युवाओं को बैंक के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराकर वाहन मुहैया कराए गए हैं। युवाओं को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा प्रति हितग्राही 2 लाख से 3 लाख रुपये तक की मार्जिन मनी प्रदान की गई है।

इसके अलावा, वाहन मालिकों को 1 टन क्षमता वाले वाहनों के लिए 24 हजार रुपये तथा 2 टन क्षमता वाले वाहनों के लिए 31 हजार रुपये प्रतिमाह किराए के रूप में भुगतान किया जा रहा है। इस व्यवस्था से अनुसूचित जनजाति के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में सम्मानजनक रोजगार का अवसर प्राप्त हुआ है।

समय और मजदूरी की हो रही बचत

इस योजना के लागू होने से जनजातीय क्षेत्र के पात्र परिवारों को राशन लेने के लिए दूर-दराज की दुकानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। गांव में ही राशन सामग्री प्राप्त होने से ग्रामीणों की दिहाड़ी मजदूरी, समय और श्रम तीनों की भारी बचत हो रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।


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