शिक्षक दिवस पर बोले पीएम मोदी: बच्चों में स्क्रीन टाइम घटाने और नशे की आदत से बचाने में शिक्षक निभाएं सक्रिय भूमिका
- शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि अर्पित की।
- 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के 82 विजेताओं से संवाद किया।
- शिक्षकों से बच्चों में बढ़ते अत्यधिक स्क्रीन टाइम (मोबाइल लत) और नशे की समस्या के प्रति सतर्क रहने की अपील की।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान से बाहर लाकर व्यावहारिक और नैतिक शिक्षा देने पर जोर दिया।
नई दिल्ली: शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाज के निर्माण में शिक्षकों के अमूल्य योगदान की सराहना की और भारत के पूर्व राष्ट्रपति व महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं के साथ संवाद की झलकियां साझा कीं।
82 चयनित शिक्षकों से पीएम का संवाद
इस वर्ष तीन प्रमुख विभागों से कुल 82 उत्कृष्ट शिक्षकों और शिक्षाविदों का चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए किया गया है। इनमें स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग से 48 शिक्षक, उच्च शिक्षण संस्थानों व पॉलिटेक्निक से 21 संकाय सदस्य और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के 13 कौशल प्रशिक्षक शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी के साथ इस बातचीत में शिक्षकों ने शिक्षण प्रक्रिया को रोचक और प्रभावी बनाने के लिए अपनाए गए नए अनुसंधानों और नवाचारों को साझा किया|
स्क्रीन टाइम और बाल सुलभ जिज्ञासा का संवर्धन
प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों में बढ़ती स्क्रीन टाइम (डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक उपयोग) की समस्या पर चिंता जताई। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे अभिभावकों से बातचीत करें कि बच्चे देर रात तक मोबाइल का उपयोग न करें। पीएम ने सुझाव दिया कि बच्चों का ध्यान खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों की ओर आकर्षित करके उन्हें स्क्रीन की लत से बाहर निकाला जा सकता है|
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और व्यावहारिक कौशल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना ही शिक्षक का कर्तव्य नहीं है। बच्चों को किताबी दुनिया से बाहर निकालकर वास्तविक जीवन के कौशलों से जोड़ना और उनमें श्रम के प्रति सम्मान (Dignity of Labour) जैसे नैतिक मूल्यों का बीजारोपण करना आवश्यक है, ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके।
— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री








