सरगुजा पुलिस का ‘साइबर जागृति अभियान’: सियान गुड़ी में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित; डिजिटल अरेस्ट, पेंशन फ्रॉड और केवाईसी ठगी से बचाव के दिए गए टिप्स
अंबिकापुर (सरगुजा)
प्रमुख बिंदु (Key Highlights)
- डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल के दिशा-निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रितेश चौधरी के नेतृत्व में लगातार जारी है ‘साइबर जागृति अभियान’।
- स्थानीय ‘सियान गुड़ी’ में आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम में लगभग 50 वरिष्ठ नागरिक हुए शामिल।
- वरिष्ठ नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट, पेंशन व जीवन प्रमाण पत्र फ्रॉड, फर्जी केवाईसी और केबीसी लॉटरी फ्रॉड की बारीकियों से कराया गया अवगत।
- साइबर सेल की महत्वपूर्ण सलाह: कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का कोई प्रावधान नहीं; सरकारी एजेंसियां कभी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगतीं।
- सुरक्षा के ‘पंच सूत्र’ साझा किए गए: बैंक डिटेल्स, ओटीपी, सीवीवी और यूपीआई पिन कभी किसी से साझा न करें।
- ठगी होने पर तत्काल 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की अपील।
डिजिटल युग में तकनीक के विस्तार के साथ-साथ साइबर अपराधियों के पैंतरे भी लगातार बदलते जा रहे हैं। खासकर समाज के बुजुर्ग एवं वरिष्ठ नागरिक, जिन्हें डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन बैंकिंग के नए माध्यमों की पूरी जानकारी नहीं होती, वे अकसर इन साइबर ठगों के आसान निशाने पर आ जाते हैं। इसी गंभीर विषय को ध्यान में रखते हुए सरगुजा पुलिस द्वारा जिलेभर में व्यापक स्तर पर ‘साइबर जागृति अभियान’ चलाया जा रहा है।
डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) के कुशल दिशा-निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रितेश चौधरी के प्रत्यक्ष नेतृत्व में इस अभियान के तहत लगातार विभिन्न सामाजिक वर्गों, विद्यार्थियों और नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज अंबिकापुर स्थित स्थानीय ‘सियान गुड़ी’ में वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक विशेष साइबर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 50 की संख्या में वरिष्ठ नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
गणमान्य अतिथियों एवं पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति
सियान गुड़ी में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों का मार्गदर्शन करने के लिए पुलिस विभाग, साइबर सेल और समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सियान गुड़ी की संचालिका रीता अग्रवाल विशेष रूप से मौजूद रहीं और उन्होंने सरगुजा पुलिस की इस पहल की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान ‘नवा बिहान’ संस्था की ओर से अजय तिवारी एवं मंगल पांडे, पुलिस विभाग की ओर से उप निरीक्षक अभय तिवारी तथा साइबर सेल से अनुज जायसवाल एवं अमन पुरी ने उपस्थित रहकर बुजुर्गों को साइबर अपराधों की आधुनिक प्रणालियों और उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।
वरिष्ठ नागरिकों को दी गई मुख्य साइबर अपराधों एवं ठगी के तरीकों की विस्तृत जानकारी
कार्यशाला में साइबर विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों ने वरिष्ठ नागरिकों को उन प्रमुख तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया, जिनका इस्तेमाल करके ठग बुजुर्गों की जीवनभर की गाढ़ी कमाई उड़ा लेते हैं:
1. “डिजिटल अरेस्ट” (Digital Arrest) का फर्जीवाड़ा
कैसा होता है अपराध: साइबर ठग खुद को सीबीआई (CBI), ईडी (ED), राज्य पुलिस या ट्राई (TRAI) का बड़ा अधिकारी बताकर कॉल करते हैं। वे बुजुर्गों को डराते हैं कि उनके नाम से कोई अवैध पार्सल (जिसमें नशीले पदार्थ या अवैध दस्तावेज हों) आया है या उनका सिम कार्ड किसी राष्ट्रविरोधी/गैर-कानूनी गतिविधि में लिप्त पाया गया है। इसके बाद वे स्काइप या व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर पीड़ित को कमरे में बंद रहने की हिदायत देते हैं और “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर बैंक खातों की जांच के नाम पर लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लेते हैं।
बचाव एवं सावधानियां: वरिष्ठ नागरिक यह बात अच्छी तरह समझ लें कि भारत के कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है। कोई भी वैध सरकारी या जांच एजेंसी कभी भी किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर अरेस्ट नहीं करती और न ही किसी बैंक खाते में पैसे जमा करने को कहती है। ऐसा कोई भी डरावना कॉल आने पर घबराएं नहीं, तुरंत फोन काटें और नजदीकी थाने या पुलिस अधिकारियों को सूचित करें।
2. पेंशन और डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (Life Certificate) के नाम पर धोखाधड़ी
कैसा होता है अपराध: सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को निशाना बनाने के लिए ठग पेंशन ट्रेजरी या बैंक का प्रतिनिधि बनकर कॉल करते हैं। वे कहते हैं कि आपकी पेंशन रुकने वाली है या आपका डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (Jevan Praman Patra) अपडेट नहीं हुआ है। इसके बाद वे एक फर्जी लिंक भेजते हैं या बातों-बातों में बैंक खाते से संबंधित व्यक्तिगत जानकारी ले लेते हैं।
बचाव एवं सावधानियां: अपनी पेंशन या बैंक खाते से संबंधित किसी भी समस्या के समाधान के लिए किसी अनजान कॉल पर भरोसा न करें। हमेशा सीधे अपनी संबंधित बैंक शाखा या ट्रेजरी कार्यालय में जाकर भौतिक रूप से जानकारी प्राप्त करें। फोन या अनजान मैसेज पर अपनी कोई भी वित्तीय या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
3. फर्जी कस्टमर केयर और केवाईसी (KYC) अपडेट का झांसा
कैसा होता है अपराध: बिजली बिल का भुगतान न होने पर रात में ही कनेक्शन काटने, सिम कार्ड ब्लॉक होने, या बैंक अकाउंट फ्रीज होने का फर्जी मैसेज भेजकर या कॉल करके ठग डर पैदा करते हैं। इसके बाद वे समस्या हल करने का दावा करते हुए बुजुर्गों से उनका बैंक खाता नंबर, आधार डिटेल्स या मोबाइल पर आया ओटीपी (OTP) मांग लेते हैं। कई बार वे ‘QuickViewer’ या ‘AnyDesk’ जैसे स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने को कहते हैं।
बचाव एवं सावधानियां: कभी भी किसी अज्ञात नंबर से आए लिंक पर क्लिक करके कोई मोबाइल ऐप डाउनलोड न करें। स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करते ही साइबर अपराधियों के पास आपके मोबाइल का पूरा एक्सेस चला जाता है, जिससे वे आपके बैंक खाते से पैसे उड़ा सकते हैं।
4. लॉटरी और फर्जी निवेश (Investment Scams) के लुभावने ऑफर
कैसा होता है अपराध: ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) में लाखों रुपये की लॉटरी लगने, शेयर बाजार में गारंटेड रिटर्न देने, या कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच देकर ठग बुजुर्गों से प्रोसेसिंग फीस या टैक्स के नाम पर पैसे जमा करवाते रहते हैं।
बचाव एवं सावधानियां: बिना मेहनत या बिना किसी प्रतियोगिता में भाग लिए मिलने वाले किसी भी भारी-भरकम पैसे या लॉटरी के झांसे में बिल्कुल न आएं। यह पूरी तरह से ठगी का जाल होता है।
साइबर सेल की वरिष्ठ नागरिकों को महत्वपूर्ण सलाह: “पंच सूत्र” याद रखें
कार्यक्रम के दौरान साइबर सेल की टीम ने बुजुर्गों को सुरक्षित रहने के लिए साइबर सुरक्षा के “पंच सूत्र” का पालन करने की हिदायत दी:
- 1. गोपनीयता बनाए रखें: अपना बैंक खाता नंबर, एटीएम पिन (PIN), कार्ड का सीवीवी (CVV), यूपीआई पिन और ओटीपी (OTP) कभी भी, किसी भी परिस्थिति में किसी के साथ साझा न करें।
- 2. डरें नहीं, संवाद करें: यदि कोई आपको फोन पर डराने की कोशिश करे या कानूनी कार्रवाई की धमकी दे, तो घबराने के बजाय तुरंत अपने परिवार के सदस्यों, बच्चों या पास के पुलिस स्टेशन से बात करें।
- 3. संदिग्ध लिंक से दूर रहें: व्हाट्सएप या एसएमएस पर आए किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें।
- 4. अनजान ऐप डाउनलोड न करें: किसी के कहने पर मोबाइल में कोई भी अज्ञात या स्क्रीन शेयरिंग एप्लीकेशन इंस्टॉल न करें।
- 5. सत्यापन करें: किसी भी संस्था या बैंक के नाम से आए कॉल की प्रामाणिकता खुद जाकर जांचें।
राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 का उपयोग करें
साइबर विशेषज्ञों ने बताया कि यदि दुर्भाग्यवश कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है, तो समय गंवाए बिना तत्काल कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। अपराध घटित होने के शुरुआती समय (Golden Hour) में जितनी जल्दी सूचना दी जाएगी, पैसे वापस ब्लॉक होने या खाते में रुकने की संभावना उतनी ही अधिक होती है।
साइबर फ्रॉड होते ही बिना किसी देरी के राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं या भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करें। इसके अलावा तत्काल अपने नजदीकी पुलिस थाने या जिला साइबर सेल में संपर्क करें।
आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर: सरगुजा पुलिस
सरगुजा पुलिस प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि जिला पुलिस आम नागरिकों और विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा व सहायता के लिए सदैव तत्पर है। पुलिस अधिकारियों ने जिले के सभी बुजुर्गों से अपील की है कि वे आधुनिक तकनीक का उपयोग पूरी सावधानी और सतर्कता के साथ करें। किसी भी प्रकार के संदिग्ध कॉल, मैसेज या वित्तीय प्रस्ताव आने पर तुरंत सतर्क रहें और जागरूक नागरिक की भूमिका निभाएं।

















