रायगढ़ में चिटफंड कंपनी के डायरेक्टरों ने लोगों को कम समय में रकम दोगुनी करने का झांसा देकर निवेश कराया। बाद में कंपनी बंद कर आरोपी फरार हो गए। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को पहले गिरफ्तार किया था। वहीं, फरार चल रहे एक अन्य डायरेक्टर को जशपुर से गिरफ्तार किया गया है।
मामला घरघोड़ा थाना क्षेत्र का है। ग्राम नवापारा निवासी लालबाबू गुप्ता ने 27 मार्च 2017 को घरघोड़ा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि गांव में राजकुमार कोसे ‘शुष्क इंडिया लिमिटेड’ नामक कंपनी का संचालन करता था। कंपनी के जरिए लोगों को कम समय में अधिक रकम देने का झांसा देकर पैसे जमा कराए जाते थे।
2012 से पत्नी के साथ कंपनी में जमा कर रहे थे रकम
लालबाबू ने साल 2012 से अपने और अपनी पत्नी के नाम पर 601 रुपए प्रतिमाह के हिसाब से कंपनी में रकम जमा करना शुरू किया था। इसी तरह वार्ड के कई अन्य लोगों ने भी मासिक और फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में कंपनी में पैसे जमा किए थे।
2016 में रकम लौटाए बिना कंपनी छोड़कर हुआ फरार
साल 2016 में राजकुमार कोसे निवेशकों की रकम लौटाए बिना नवापारा, घरघोड़ा से फरार हो गया। बाद में उसके वापस आने पर निवेशकों ने रकम वापस मांगी, तो उसने कंपनी बंद होने और उसके खिलाफ केस चलने की बात कहते हुए पैसे लौटाने से इनकार कर दिया।
शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
जांच में सामने आए कंपनी के मुख्य डायरेक्टर
मामले की आगे की जांच में पुलिस को कंपनी के मुख्य डायरेक्टर दिनेश सैनी निवासी मक्सी, जिला शाजापुर (मध्य प्रदेश), नरेंद्र लोधी निवासी मक्सी, जिला शाजापुर और सुनील तिवारी (41) निवासी इंदौर (मध्य प्रदेश) के नाम सामने आए।
पुलिस को पता चला कि आरोपी दिनेश सैनी केंद्रीय जेल उज्जैन में बंद है। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर उसे प्रोडक्शन वारंट के जरिए केंद्रीय जेल उज्जैन से हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
पूछताछ में अपराध स्वीकार करने पर दिनेश सैनी को 28 जून 2022 को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर न्यायिक रिमांड में केंद्रीय जेल उज्जैन भेज दिया गया।
जशपुर से फरार डायरेक्टर गिरफ्तार
मामले में फरार आरोपी सुनील तिवारी की पुलिस लगातार तलाश कर रही थी। इसी दौरान उसके जशपुर आने की सूचना मिली। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे जशपुर से हिरासत में लिया और घरघोड़ा थाना लाया।
पूछताछ में आरोपी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर अपराध करना स्वीकार किया। इसके बाद पुलिस ने उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे रिमांड पर भेज दिया गया।

















