उच्च शिक्षा एवं संस्कृति
भारतीय ज्ञान परंपरा केवल पाठ्यक्रम नहीं, जीवन दर्शन: भोपाल में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला में राज्यपाल मंगुभाई पटेल व मंत्री इंदर सिंह परमार का संबोधन
मध्यप्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों से विशेष प्रकोष्ठ गठित कर भावी पीढ़ी को संस्करित और सक्षम बनाने का आह्वान
भोपाल: कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और निजी विश्वविद्यालय संघ के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में निजी विश्वविद्यालयों का योगदान” विषय पर राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मुख्य अतिथि और उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की।
कार्यशाला के प्रमुख निष्कर्ष एवं दिशा-निर्देश
- विशेष प्रकोष्ठ का गठन: उच्च शिक्षा मंत्री ने सभी निजी विश्वविद्यालयों को भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विशेष सेल गठित करने के निर्देश दिए।
- शोध एवं अनुसंधान पर बल: राज्यपाल ने भावी पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ निरंतर शोध और समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।
- सामाजिक संवेदनशीलता: विद्यार्थियों को गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाकर ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सक्षम बनाने का आह्वान।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: शिक्षा को भारतीय दृष्टि से जोड़ते हुए प्रामाणिक और उपयोगी पाठ्य सामग्री तैयार करने पर सहमति।
भारतीय संस्कृति प्रकृति पूजक और शाश्वत: राज्यपाल मंगुभाई पटेल
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति प्रकृति पूजक है। ब्रह्माण्ड के सूर्य, चंद्रमा, ग्रह और नक्षत्र हमारी जीवन संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। पंचतत्व—वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी और नभ—हमारी दैनिक दिनचर्या में समाहित हैं। यह महान ज्ञान परंपरा अनंत काल से शाश्वत है और इसमें जीवन का गहरा दर्शन छिपा है।
राज्यपाल ने कहा कि रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ ज्ञान, विज्ञान और संस्कारों के अद्भुत भंडार हैं। उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों से अपेक्षा जताई कि वे हमारी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की जिम्मेदारी स्वीकारें और विद्यार्थियों में चरित्र, अनुशासन तथा आत्मनिर्भरता का विकास करें।
| प्रमुख व्यक्तित्व | पद / दायित्व | मुख्य संदेश / निर्देश |
|---|---|---|
| मंगुभाई पटेल | राज्यपाल, मध्यप्रदेश | भारतीय ज्ञान परंपरा को शोध व चिंतन के माध्यम से भावी पीढ़ी तक पहुँचाएं और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील समाज बनाएं। |
| इंदर सिंह परमार | उच्च शिक्षा एवं आयुष मंत्री | निजी विश्वविद्यालय विशेष प्रकोष्ठ गठित करें, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ अनुसंधान और दस्तावेजीकरण पर काम करें। |
| डॉ. अतुल कोठारी | राष्ट्रीय सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास | राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश में मध्यप्रदेश के प्रयासों को देश में अग्रणी बताया। |
| अनुपम राजन | अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा | स्थानीयता और आधुनिकता के समन्वय के साथ शोध-आधारित प्रमाणित पाठ्यक्रम तैयार करने की आवश्यकता जताई। |
“वही विद्या सार्थक, जो अज्ञान, भय और बंधन से करे मुक्त” — मंगुभाई पटेल
राज्यपाल ने उपनिषद, वेद, चरक-सुश्रुत और कौटिल्य के अर्थशास्त्र का उल्लेख करते हुए कहा— “हमारी गुरु-शिष्य परंपरा में शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ याद करना नहीं, बल्कि चरित्र और कर्तव्यबोध का विकास था। शिक्षा की सार्थकता मनुष्य को अज्ञान और भय से मुक्त कर मानवता के कल्याण में निहित है।”
व्यावहारिक ज्ञान की समृद्ध परंपरा है हमारी धरोहर: मंत्री इंदर सिंह परमार
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल पाठ्यक्रम का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे पूर्वजों की वैज्ञानिक और समग्र जीवन-दृष्टि की परिचायक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा में इस समृद्ध विरासत को जोड़ने का ऐतिहासिक अवसर दिया है।
उन्होंने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों के बीच पारस्परिक सहभागिता को अनिवार्य बताते हुए कहा कि पूर्वजों के ज्ञान को सहेजकर तथ्यों के आधार पर युगानुकूल पाठ्य सामग्री तैयार की जानी चाहिए।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ. खेमसिंह डेहरिया और निजी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापन निजी वि.वि. संघ के सचिव डॉ. अजीत सिंह पटेल द्वारा प्रस्तुत किया गया।












