दैनिक वैदिक पंचांग एवं ज्योतिषीय समाचार बुलेटिन
राष्ट्रीय संस्करण | तिथि: भाद्रपद शुक्ल पक्ष एकादशी / द्वादशी | विक्रम संवत २०८३
सूर्य एवं चंद्र गणना
सूर्योदय: प्रातः 06:08 AM
सूर्यास्त: सायं 06:19 PM
चंद्रोदय: अपराह्न 03:15 PM
चंद्रास्त: रात्रि 03:10 AM (अगले दिन)
सूर्य राशि: कन्या
चंद्र राशि: मकर
मुख्य पंचांग अंग
तिथि: शुक्ल पक्ष एकादशी (रात्रि 09:42 PM तक), तत्पश्चात द्वादशी
नक्षत्र: उत्तराषाढा (प्रातः 07:06 AM तक), तत्पश्चात श्रवण
योग: अतिगंड (अपराह्न 04:25 PM तक), तत्पश्चात सुकर्मा
करण: वणिज (प्रातः 10:21 AM तक), विष्टि/भद्रा (रात्रि 09:42 PM तक)
वार: मंगलवार
संवत एवं अयन
विक्रम संवत: 2083 (रौद्र)
शक संवत: 1947 (क्रोधी)
ऋतु: शरद
अयन: दक्षिणायन
मास: भाद्रपद (पूर्णिमांत/अमांत)
शुभ एवं अशुभ मुहूर्त समय सारणी
| समय प्रकार | मुहूर्त / काल का नाम | प्रारंभ समय | समाप्ति समय | फल एवं प्रभाव |
|---|---|---|---|---|
| शुभ मुहूर्त | ब्रह्म मुहूर्त | 04:32 AM | 05:20 AM | अध्यात्म, साधना एवं अध्ययन हेतु सर्वश्रेष्ठ समय। |
| शुभ मुहूर्त | अभिजित मुहूर्त | 11:48 AM | 12:37 PM | सर्वकार्य सिद्धि हेतु अत्यंत शुभ माना जाने वाला समय। |
| शुभ मुहूर्त | विजय मुहूर्त | 02:15 PM | 03:04 PM | व्यापारिक वार्ता, यात्रा एवं मुकदमों में विजय हेतु। |
| शुभ मुहूर्त | अमृत काल | 11:34 PM | 01:21 AM | मांगलिक चिंतन एवं विशेष पूजा अनुष्ठान हेतु उपयुक्त। |
| अशुभ समय | राहुकाल | 03:16 PM | 04:47 PM | नवे कार्य, निवेश या यात्रा की शुरुआत से पूरी तरह बचें। |
| अशुभ समय | यमगण्ड | 09:10 AM | 10:42 AM | महत्वपूर्ण कार्यों में बाधा एवं विलंब का कारण बनता है। |
| अशुभ समय | गुलिक काल | 12:13 PM | 01:44 PM | अशुभ प्रभाव, इस समय में नया सौदा करने से बचें। |
| अशुभ समय | भद्रा (विष्टि करण) | 10:21 AM | 09:42 PM | मांगलिक एवं शुभ कार्य वर्जित रहते हैं। |
दैनिक वैदिक पंचांग विश्लेषण: पार्श्व एकादशी एवं वामन जयंती विशेष
1. भाद्रपद शुक्ल एकादशी (पार्श्व एकादशी / परिवर्तनी एकादशी) का विशेष महत्व
वैदिक काल गणना के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का सनातन धर्म में अत्यंत उच्च स्थान है। इस एकादशी को पार्श्व एकादशी, परिवर्तनी एकादशी अथवा वामन एकादशी के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में रहते हैं। इस तिथि पर भगवान विष्णु योगनिद्रा के दौरान अपनी करवट बदलते हैं, इसीलिए इसे ‘परिवर्तनी’ या ‘पार्श्व’ (करवट लेना) एकादशी कहा जाता है।
आज के दिन भगवान विष्णु के वामन रूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जो भक्त आज श्रद्धा एवं नियमपूर्वक व्रत रखते हैं तथा श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं, उनके जाने-अनजाने में हुए सभी पापों का क्षय होता है और उन्हें वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
2. पंचांग के पाँच अंगों का सूक्ष्म ज्योतिषीय विश्लेषण
वैदिक पंचांग पाँच प्रमुख घटकों से निर्मित होता है, जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा और मानव जीवन पर उनके प्रभाव का आकलन करते हैं:
- तिथि (Lunar Day): आज एकादशी तिथि रात्रि 09:42 PM तक है, जिसके पश्चात द्वादशी तिथि का आगमन होगा। एकादशी तिथि धार्मिक साधना, उपवास एवं मानसिक शुद्धि के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है।
- नक्षत्र (Constellation): प्रातः 07:06 AM तक उत्तराषाढा नक्षत्र विद्यमान है, जिसके उपरांत श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा। श्रवण नक्षत्र के स्वामी भगवान विष्णु हैं और इसका प्रतीक कान (सुनने की क्षमता) है। यह नक्षत्र ज्ञान अर्जन, अध्ययन और आध्यात्मिक श्रवण हेतु अति उत्तम है।
- योग (Astronomical Combination): आज अपराह्न 04:25 PM तक अतिगंड योग रहेगा। अतिगंड योग को अशुभ योगों की श्रेणी में रखा जाता है, अतः इस दौरान किसी भी प्रकार के तनाव, विवाद या जोखिम भरे कार्यों से बचना चाहिए। इसके पश्चात सुकर्मा योग प्रारंभ होगा जो कार्यों में सफलता दिलाता है।
- करण (Half Tithi): प्रातः 10:21 AM तक वणिज करण रहेगा, जो व्यापारिक गतिविधियों के लिए अनुकूल है। तत्पश्चात विष्टि करण (भद्रा) का प्रारंभ होगा जो रात्रि 09:42 PM तक रहेगा। भद्रा काल में शुभ कार्य, गृह प्रवेश, या नए अनुबंधों पर हस्ताक्षर करना शास्त्रों में वर्जित बताया गया है।
- वार (Day): आज मंगलवार है। मंगलवार के स्वामी मंगल ग्रह हैं और इसके इष्टदेव श्री हनुमान जी हैं। आज के दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ करना एवं तांबे या लाल वस्तुओं का दान करना मंगल दोषों का निवारण करता है।
3. ग्रहों का गोचर एवं राशि प्रभाव
आज ग्रहों के गोचर की स्थिति विशेष संकेत दे रही है। सूर्य देव कन्या राशि में गोचर कर रहे हैं, जबकि चंद्रमा मकर राशि (शनि की राशि) में संचरण कर रहे हैं। सूर्य और चंद्रमा की यह स्थिति व्यावहारिक सोच, अनुशासन और कर्म प्रधानता को बढ़ावा देती है। मकर राशि में चंद्रमा का होना व्यक्ति को अपने लक्ष्यों के प्रति गंभीर और परिश्रमी बनाता है।
4. चौघड़िया मुहूर्त विवरण (दिन एवं रात्रि)
दिनभर की दैनिक गतिविधियों और यात्रा आदि के लिए चौघड़िया का विशेष विचार किया जाता है:
| दिन का चौघड़िया | समय सीमा | प्रकृति एवं उपयुक्तता |
|---|---|---|
| चर (सामान्य) | 06:08 AM – 07:39 AM | यात्रा और गतिशीलता हेतु उपयुक्त। |
| लाभ (उन्नति) | 07:39 AM – 09:10 AM | व्यापारिक लाभ एवं नए सौदों हेतु उत्तम। |
| अमृत (सर्वोत्तम) | 09:10 AM – 10:41 AM | सभी प्रकार के शुभ एवं मांगलिक कार्यों हेतु। |
| काल (हानि) | 10:41 AM – 12:13 PM | सावधानी बरतें, विवाद से बचें। |
| शुभ (उत्तम) | 12:13 PM – 01:44 PM | पूजा-पाठ एवं आधिकारिक कार्यों हेतु। |
| रोग (अशुभ) | 01:44 PM – 03:15 PM | स्वास्थ्य का ध्यान रखें। |
| उद्वेग (अशुभ) | 03:15 PM – 04:47 PM | मानसिक तनाव संभव, शांत रहें। |
| चर (सामान्य) | 04:47 PM – 06:19 PM | सामान्य कार्य निपटाएं। |
5. आज के विशेष उपाय एवं दिशाशूल
दिशाशूल: आज मंगलवार को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहता है। अतः उत्तर दिशा की ओर यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि अनिवार्य रूप से यात्रा करनी पड़े तो गुड़ या तिल खाकर, अथवा श्री हनुमान जी के दर्शन करके ही घर से बाहर प्रस्थान करें।
दैनिक सरल उपाय:
- आज हनुमान मंदिर में जाकर लाल सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।
- पीपल के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाएं और भगवान विष्णु का ध्यान करें।
- भद्रा काल समाप्त होने के पश्चात ही किसी नए व्यावसायिक या मांगलिक कार्य की शुरुआत करें।
- चींटियों को आटा और गुड़ डालने से शनि और मंगल ग्रह जनित पीड़ा शांत होती है।














