अम्बिकापुर में शासकीय कर्मचारियों का ऐतहासिक महाप्रदर्शन: 8 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट के सामने धरना, मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन प्रेषित
आंदोलन की पृष्ठभूमि और कर्मचारियों में व्याप्त आक्रोश
प्रांतीय आह्वान के तहत आयोजित इस संभागीय प्रदर्शन में सरगुजा संभाग के पांचों जिलों—सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी), बलरामपुर एवं जशपुर—से हजारों की संख्या में कर्मचारी अम्बिकापुर पहुंचे। कलेक्ट्रेट परिसर के समीप एसबीआई बैंक के सामने विशाल सभा स्थल में कर्मचारियों का जमावड़ा सुबह से ही शुरू हो गया था। दोपहर होते-होते पूरा परिसर कर्मचारियों की उपस्थिति से खचाखच भर गया।
सभा को संबोधित करते हुए संघ के प्रांतीय एवं संभागीय पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि “मोदी की गारंटी” के तहत राज्य के शासकीय कर्मचारियों से जो भी वादे किए गए थे, उन्हें तत्काल लागू किया जाना चाहिए। पदाधिकारियों ने बताया कि पूर्व में भी शासन का ध्यान इन मांगों की ओर आकृष्ट कराने हेतु कई चरणबद्ध ध्यानाकर्षण ज्ञापन प्रेषित किए गए थे तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए गए थे। परंतु, अत्यंत खेद का विषय है कि संदर्भित ज्ञापनों और मांगों पर शासन स्तर से अब तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया है। इस उपेक्षात्मक रवैये के कारण संपूर्ण प्रदेश के तृतीय वर्ग एवं अन्य संवर्ग के कर्मचारियों में तीव्र असंतोष और निराशा व्याप्त है।
— आनंद सिंह यादव (प्रांतीय महामंत्री) एवं दिनेश कुमार कश्यप (संभागीय अध्यक्ष)
विशाल रैली और कलेक्ट्रेट घेराव
धरना सभा के पश्चात कलेक्ट्रेट एसबीआई बैंक के सामने से एक विशाल प्रदर्शन रैली निकाली गई। हाथों में अपनी मांगों की तख्तियां लिए और गगनभेदी नारे लगाते हुए हजारों कर्मचारियों का जुलूस कलेक्ट्रेट परिसर की ओर बढ़ा। ‘कर्मचारी एकता जिंदाबाद’, ‘हमारी मांगें पूरी करो’, ‘मोदी की गारंटी लागू करो’ जैसे नारों से पूरा अम्बिकापुर शहर गूंज उठा। रैली का नेतृत्व प्रांतीय एवं संभागीय स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न संबद्ध संगठनों के जिलाध्यक्ष कर रहे थे। प्रदर्शन के उपरांत अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन के नाम 8 सूत्रीय प्रमुख मांगों का विस्तृत ध्यानाकर्षण ज्ञापन सौंपा गया।
प्रमुख 8 सूत्रीय मांगें एवं महत्वपूर्ण बिंदु
ज्ञापन में कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, वित्तीय लाभों, पदोन्नति और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े निम्नलिखित 8 प्रमुख बिंदुओं को प्राथमिकता के आधार पर रेखांकित किया गया है:
1. महंगाई भत्ता (DA) एवं एरियर्स का समायोजन
केंद्र सरकार के समान राज्य के कर्मचारियों को भी 01 जनवरी 2026 से स्वीकृत 2% महंगाई भत्ता देय तिथि से तत्काल लागू किया जावे। इसके साथ ही, पिछले समय के लंबित डी.ए. एरियर्स की संपूर्ण राशि को कर्मचारियों के जी.पी.एफ. (GPF) खाते में संयोजित/समायोजित किया जावे ताकि कर्मचारियों को उनका न्यायोचित वित्तीय अधिकार मिल सके।
2. कैशलेस चिकित्सा सुविधा की तत्काल बहाली
छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में राज्य शासन द्वारा शासकीय कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने की घोषणा की गई थी। इस घोषणा के परिपालन में कर्मचारी हित में कैशलेस चिकित्सा योजना के स्पष्ट एवं व्यावहारिक आदेश तत्काल प्रभाव से जारी किए जावें, जिससे इलाज के दौरान कर्मचारियों को आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े।
3. अर्जित अवकाश नकदीकरण सीमा में वृद्धि
शासकीय सेवा से सेवानिवृत्ति के अवसर पर कर्मचारियों को मिलने वाले अर्जित अवकाश नकदीकरण की सीमा को वर्तमान 240 दिनों से बढ़ाकर 300 दिनों का करने हेतु स्पष्ट आदेश जारी किया जावे। पड़ोसी राज्यों एवं केंद्र सरकार की तर्ज पर 300 दिनों का अवकाश नकदीकरण कर्मचारियों का मौलिक अधिकार है।
4. वेतनमान विसंगति एवं सेवा गणना
- ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों के वेतनमान में सुधार करते हुए उसे पुनरीक्षित किया जावे।
- शिक्षक एल.बी. संवर्ग: प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना करते हुए शिक्षक एल.बी. संवर्ग के शिक्षकों को उनकी समस्त पूर्व सेवा का पूर्ण लाभ (पेंशन, क्रमोन्नति एवं वरिष्ठता हेतु) प्रदान किया जावे।
5. विभागीय परीक्षा का प्रावधान (T.E.T. के स्थान पर)
शिक्षकों की पदोन्नति एवं नियमितीकरण प्रक्रियाओं में शिक्षक पात्रता परीक्षा (T.E.T.) की अनिवार्यता के स्थान पर सीमित विभागीय परीक्षा आयोजित करने का स्पष्ट प्रावधान किया जावे ताकि वर्षों से सेवारत अनुभवी शिक्षकों को पदोन्नति के अवसर प्राप्त हो सकें।
6. अनुकंपा नियुक्ति की सीलिंग समाप्ति
दिवंगत शासकीय सेवकों के आश्रितों को राहत देने के उद्देश्य से अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में लागू 10 प्रतिशत की सीमा (सीलिंग) को पूर्णतः समाप्त किया जावे। सीधी भर्ती के समस्त रिक्त पदों पर अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का त्वरित निराकरण करते हुए आश्रितों को नियुक्ति प्रदान की जावे।
7. संविदा, दैनिक वेतनभोगी एवं अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण
विभिन्न शासकीय विभागों में वर्षों से अल्प मानदेय पर सेवाएं दे रहे संविदा, दैनिक वेतनभोगी एवं अनियमित कर्मचारियों को रिक्त पदों पर प्राथमिकता के आधार पर नियमित किया जावे तथा नियमितीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक उनकी सेवा सुरक्षा की पूर्ण गारंटी दी जावे।
8. संबद्ध संगठनों एवं संवर्गों की विशिष्ट मांगें
विभिन्न संबद्ध संगठनों के संवर्गों की लंबे समय से लंबित मांगों का निराकरण किया जावे:
- पदनाम परिवर्तन: ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक का पदनाम परिवर्तित कर ‘ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारी’ तथा सेक्टर स्वास्थ्य पर्यवेक्षक का पदनाम ‘सेक्टर स्वास्थ्य अधिकारी’ किया जावे।
- आईटीआई (I.T.I.) संवर्ग: औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों एवं अधिकारियों को समयमान वेतनमान का लाभ प्रदान किया जावे तथा उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जावे।
- छात्रावास अधीक्षक: छात्रावास अधीक्षकों को उनकी शैक्षणिक योग्यता एवं वरिष्ठता के आधार पर मंडल संयोजक, क्षेत्र संयोजक, एवं सहायक सांख्यिकी अधिकारी जैसे पदों पर सीमित विभागीय परीक्षा के माध्यम से पदोन्नति का अवसर दिया जावे।
- लघु वनोपज संघ का संविलियन: छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के मूल कर्मचारियों का वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में पूर्ण संविलियन किया जावे।
- दिव्यांग/निःशक्तजन कर्मचारी: समस्त शासकीय विभागों में नियमानुसार कार्यरत दिव्यांग अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया जावे एवं आरक्षित रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की जावे।
- तकनीकी संवर्ग (Work Department): निर्माण एवं तकनीकी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को निर्धारित समय-अवधि में पदोन्नति का लाभ प्रदान किया जावे।
- पेंशनरों हेतु चिकित्सा सुविधा: सेवानिवृत्त कर्मचारियों/पेंशनरों के लिए भी कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ समान रूप से लागू किया जावे।
कर्मचारी नेताओं के विचार एवं वक्तव्य
धरना स्थल पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने शासन की कर्मचारी विरोधी नीतियों पर जमकर प्रहार किया। वक्ताओं ने कहा कि राज्य के सर्वांगीण विकास और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन में शासकीय कर्मचारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसके बावजूद, कर्मचारियों को अपने ही जायज अधिकारों और वित्तीय लाभों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होना पड़ रहा है। यदि शासन ने “मोदी की गारंटी” के अनुरूप मांगों का जल्द समाधान नहीं किया, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक तीव्र एवं व्यापक रूप धारण करेगा।
कार्यक्रम में अभूतपूर्व जनभागीदारी एवं नेतृत्व
अम्बिकापुर के इस संभागीय महाप्रदर्शन में सरगुजा संभाग के सभी जिलों एवं घटक संगठनों के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने अभूतपूर्व एकजुटता का परिचय दिया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से निम्नलिखित पदाधिकारियों एवं कर्मचारी प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही:
प्रमुख नेतृत्वकर्त्ता एवं प्रांतीय/संभागीय पदाधिकारी:
- आनंद सिंह यादव — प्रांतीय महामंत्री
- दिनेश कुमार कश्यप — संभागीय अध्यक्ष, सरगुजा
- राजेश सोनी — संभागीय अध्यक्ष, आईटीआई कर्मचारी संघ
- रंजीत सारथी — संभागीय अध्यक्ष, पेंशनर्स एसोसिएशन
- बी. डी. सुर — संभागीय अध्यक्ष, वन कल्याण संघ
- राजेश्वर सिंह — कार्यकारी संभागीय अध्यक्ष
- चन्द्रदेव चक्रधारी — संभागीय सचिव
- रामजनम यादव — संभागीय कोषाध्यक्ष
- सुधीर राणा एवं राहुल यादव — संभागीय उपाध्यक्ष
- बृजेश बिसेन — विभागीय अध्यक्ष
- योगेश कुमार — संभागीय प्रवक्ता
जिलाध्यक्षों की सशक्त उपस्थिति:
- संजय यादव — जिला अध्यक्ष, सरगुजा
- मनीष दीपक साहू — जिला अध्यक्ष, सूरजपुर
- अमृतांशु मिश्रा — जिला अध्यक्ष, कोरिया
- पावन दुबे — जिला अध्यक्ष, एमसीबी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर)
- हेमंत कुमार महंत — जिला अध्यक्ष, बलरामपुर
- सुभाष शर्मा — जिला अध्यक्ष, जशपुर
- अमीत सिंह — जिला अध्यक्ष, छात्रवास अधीक्षक संघ
- विरेंद्र यादव — जिला अध्यक्ष, लघु वेतन कर्मचारी संघ
- नागेन्द्र सिंह — शिक्षा विभाग प्रतिनिधि
- संतोष दुबे — जिला सचिव
- बृजेश मिश्रा एवं मुकेश झलरीया — ब्लॉक अध्यक्ष
संबद्ध घटक संगठनों की भागीदारी:
प्रदर्शन में निम्नलिखित संघों व संवर्गों के सैकड़ों प्रतिनिधियों एवं कर्मचारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई:
स्वास्थ्य संयोजक संघ, निःशक्तजन संघ, आईटीआई कर्मचारी संघ, ग्रामीण कृषि विकास विस्तार अधिकारी संघ, छात्रावास अधीक्षक संघ, लघु वनोपज संघ, तकनीकी कर्मचारी संघ, एवं पेंशनर एसोसिएशन।
भविष्य की चेतावनी
सभा के अंत में संघ के नेताओं ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए शासन को सचेत किया कि यदि हस्ताक्षरित 8 सूत्रीय ध्यानाकर्षण ज्ञापन पर अविलंब संज्ञान लेते हुए मांगे पूरी नहीं की गईं, तो संघ प्रांतीय निकाय के निर्देशों के तहत पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन हड़ताल और मंत्रालयीन घेराव जैसे कठोर कदम उठाने के लिए बाध्य होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


Ashish Sinha
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