सुप्रीम कोर्ट में संविधान पीठ के समक्ष सुनवाई के इंतजार में 25 केस लंबित हैं। पंजाब में सिखों के अल्पसंख्यक दर्जे और राइस मिलर्स एवं एफसीआई के विवाद से जुड़े दो केस 16 साल पहले संविधान पीठ को रेफर हुए थे।
लेकिन, इन पर सुनवाई के लिए आज तक संविधान पीठ गठित नहीं हुई। इनके अलावा 4 और केस भी 10 साल या इससे ज्यादा समय से लटके हैं। संविधान पीठ को रेफर किए जाने से पहले ये केस वर्षों छोटी पीठों के पास भी लंबित रह चुके हैं।
संविधान पीठ के समक्ष लंबित सभी मामले व्यापक संवैधानिक महत्व से जुड़े हैं। 4 केस आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से संबंधित हैं। नौकरी, चुनाव, केंद्र-राज्य अधिकार और आर्थिक विवादों से जुड़े 3-3 केस हैं। 2 मामले धर्म-संस्कृति के हैं। मुस्लिम आरक्षण, मुस्लिम विवाह, महिला के संपत्ति अधिकार, डिजिटल निजता के मुद्दे भी सुनवाई के इंतजार में हैं।
संविधान पीठ को इन मामलों में आरक्षण, राज्यपाल-स्पीकर के अधिकार, निजता जैसे मुद्दों से जुड़े संवैधानिक सवालों का जवाब तय करना है। सुप्रीम कोर्ट में नियमित संविधान पीठ की मांग उठती रही है। जजों ने भी समय-समय पर इस पर जोर दिया है।

















