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कांग्रेस के एक बदलाव ने राजनीति में हलचल मचा दी ! स्वामीनाथ जायसवाल

कांग्रेस के एक बदलाव ने राजनीति में हलचल मचा दी ! स्वामीनाथ जयसवाल
नई दिल्ली भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामीनाथ जायसवाल ने बताया कि राजनैतिक गलियारों में कांग्रेस को लेकर इसलिए नकारात्मकता थी क्योंकि कांग्रेस हाईकमान समय रहते राजनीतिक फैसले नहीं करती थी ! कांग्रेस हाईकमान ने नकारात्मक छवि को पंजाब मैं अपना मुख्यमंत्री बदल कर सकारात्मक माहौल बना दिया ! बल्कि बिहार से कन्हैया कुमार और गुजरात से. जिग्नेश मेवाती को कांग्रेस ज्वाइन करवा कर श्रीमान राहुल गांधी जी ने अपना दम दिखा दिया है
कांग्रेस के इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में माहौल बदल दिया और राजनीतिक विश्लेषकों को विश्लेषण करने के लिए मजबूर कर दिया ! कांग्रेस कार्यकर्ताओं को इस बात की खुशी शायद नहीं होगी की कांग्रेस ने दलित को मुख्यमंत्री बनाया है, बल्कि कांग्रेस कार्यकर्ता को खुशी इस बात की है की कांग्रेस हाईकमान ने एक बड़ा फैसला लिया है जिसका कार्यकर्ता लंबे समय से इंतजार कर रहा था !
जहां तक दलित को मुख्यमंत्री बनाने की बात है तो कांग्रेस ने चरणजीत सिंह चन्नी से पहले जगन्नाथ पहाड़िया सुशील कुमार शिंदे दामोदरम सहित चार राज्यों में दलित नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया था ! सवाल यह नहीं है कि दलित नेता चन्नी के मुख्यमंत्री बनाए जाने से कांग्रेस का पारंपरिक वोट वापस कांग्रेस की तरफ आ जाएगा इसके लिए कांग्रेस को राज्य और केंद्र में प्रभावशाली दलित नेताओं को स्थापित करना होगा ! खासकर हिंदी भाषी प्रदेशों में लंबे समय से कांग्रेस के भीतर प्रभावशाली दलित नेताओं का अभाव दिखाई दे रहा है ! मौजूदा समय में खरगे के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर और कोई नेता कांग्रेस के भीतर चर्चित नहीं है जबकि मीरा कुमार सुशील कुमार शिंदे मुकुल वासनिक जैसे नेता आज भी कांग्रेस में मौजूद हैं लेकिन चर्चा में नहीं है, यह तीनों ही नेता बड़े दलित कद्दावर नेता है और इन तीनो ही नेताओं की साख ना केवल दलितों के बीच में है बल्कि गैर दलित समाज भी इन नेताओं मानते हैं ! यदि कांग्रेस को कांग्रेस का पारंपरिक वोट वापस कांग्रेस में लाना है तो कांग्रेस को राज्य और केंद्र में कांग्रेस के पारंपरिक वोटरों के अपने नेता भी स्थापित करने होंगे, केवल एक राज्य में मुख्यमंत्री बदल कर किसी एक जाति के नेता को मुख्यमंत्री बना देने से कांग्रेस का खोया हुआ जनादेश वापस नहीं आएगा इसके लिए कांग्रेस को राज्य और केंद्र में जातिगत प्रभावशाली नेताओं को स्थापित करना होगा ? पंजाब से शुरुआत हो गई है तो इसे अन्य राज्यों में भी निरंतर करना होगा ?
पिछले 7 सालों से कांग्रेस के राष्ट्रीय महामंत्री राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार की नीतियों को लेकर आवाज बुलंद करने में लगे हुए हैं, लेकिन उनकी आवाज की गूंज राजनीतिक गलियारों में प्रभावी ढंग से सुनाई नहीं देती है मगर पंजाब में एक बदलाव ने राहुल गांधी के द्वारा लिए गए निर्णय की गूंज से ना केवल राजनैतिक गलियारे गूंज उठे बल्कि जनता के बीच भी इसका गहरा प्रभाव पड़ा और चर्चा होने लगी कि राहुल गांधी में दम है !
यदि गुजरात सरकार के बदलाव की बात करें तो पंजाब में कांग्रेस ने सौ सुनार की और एक लोहार की कहावत को चरितार्थ किया है क्योंकि गुजरात के फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों और देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव की चर्चा होने लगी थी लेकिन पंजाब में बदलाव के बाद अब चर्चा राहुल गांधी की हो रही है !

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