खुला दुध बेचने वालों पर प्रशासन ने दी दबिश

कोण्डागांव: खुला दुध बेचने वालों पर प्रशासन ने दी दबिश

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गुणवत्ता जांच हेतु दुध के नमूने किये गये जप्त

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लागातार किराना व होटल मे दबिष के बाद शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार परिपालन हेतु कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देश पर खाद्य एवं औषधि प्रषासन विभाग एवं पशु चिकित्सा विभाग के संयुक्त टीम द्वारा नगर के घरों एवं होटलों में वितरित किये जाने वाले दुध की चौंक चौराहे पर औचक जांच की गई। नगर के बस स्टैण्ड में संयुक्त टीम द्वारा पाइन्ट लगाकर अलग-अलग क्षेत्रों से व्यापार हेतु लाये गये दुध को वितरण से पूर्व ही मौके पर रोक कर जांच पड़ताल एवं भौतिक परीक्षण किया गया। दुध अधिक सफेद या पीले दिखने पर टीम ने संदेह के आधार पर दुध के 8 से अधिक सर्विलांस नमूने जांच हेतु लिये। सुबह-सुबह तेज बारिष के दौरान अचानक हुई इस कार्यावाही से दुध विक्रेताओं में हड़कंप मच गया। वही आमजन ने प्रषासन की इस पहल की सराहना भी की। ज्ञात हो की त्यौहारी सीजन में दुध से बनी सामग्रियों जैसे मिठाई, पनीर, दही आदि की मांग बढ़ने के साथ-साथ अनेक प्रकार के मिलावट संबंधी आषंका भी बनी रहती है इसलिए दुध की गुणवत्ता जांचने हेतु टीम द्वारा औचक निरीक्षण किया गया साथ ही सभी दुध विक्रेताओं को गुणवत्तायुक्त दुध ही वितरण करने की हिदायत भी दी गई। जांच के दौरान पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ0 सुरेन्द्र नाग द्वारा दुध विक्रेताओं से उनके मवेषियों के दाना, पानी, चारा आदि के बारे में जानकारी ली गई। संयुक्त टीम में एफएसओ डोमेन्द्र ध्रुव, डीआई सुखचैन सिंह धुर्वे, षकील खान, रामसिंह आदि सम्मलित रहेे।
अधिकारियों द्वारा इस दौरान घर दुध की जांच हेतु बताये तरीके
इस संबंध में एफएसओ डोमेन्द्र धु्रव द्वारा लोगों को अपने तथा बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा हेतु घर पर दुध की जांच हेतु तीन तरीकों को भी बताया। जिसमें पहली विधि के तहत् 10 मिली दुध लेकर किसी जार या बाटल में तेजी से हिलाये अत्याधिक झाग या बबल आने पर डिटर्जंेट की मिलावट की पहचान की जा सकती है। द्वितीय विधि में 10 मिली दुध को टेस्ट ट्यूब मे लेकर समान मात्रा में पानी मिलाकर तेजी से हिलाकर थोड़ी देर रख दें। अगर फोम का पतला लेयर बनता है तो दुध सही है किन्तु मोटा लेयर बनने पर स्टार्च के मिलावट की संभावना हो सकती है। तीसरी विधि के अनुसार एक साफ स्लाईड को ढलान नुमा रख कर उस पर एक-दो मिली दुध सेम्पल डालिये अगर दुध धीरे-धीरे ट्रेल बनाते हुए आगे बढ़े तो दुध सही है। किन्तु अगर दुध बिना ट्रेल बनाये तेजी से आगे बढ़े तो अधिक मात्रा में पानी मिलाये जाने की संभावना हो सकती है।