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जल जीवन मिशनः अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह ने अपनी वार्षिक कार्य योजना प्रस्तुत की; मिशन के सार तत्व ‘सर्विस डिलिवरी’ पर फोकस किया

केंद्र शासित क्षेत्र अंडमान और निकोबार द्वीप समूह ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से अपनी जल जीवन मिशन वार्षिक कार्य योजना (2021-22) प्रस्तुत की जिसमें वित्त वर्ष 2021-22 के लिए कार्रवाई योजना तय की गई है। विश्व जल दिवस 22 मार्च, 2021 को अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह को नल के पानी कनेक्शन के साथ 100 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों का कवरेज हासिल करने वाला केंद्र शासित क्षेत्र घोषित किया गया था। इसके साथ ही अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह गोवा और तेलंगाना के बाद 100 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल के पानी का कनेक्शन देने वाला देश का तीसरा राज्य/केंद्र शासित क्षेत्र हो गया। इस केंद्र शासित क्षेत्र के तीन जिलों के 9 ब्लॉकों के 266 गांवों में 62 हजार ग्रामीण परिवार हैं। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह द्वारा सभी 368 स्कूलों, 558 आंगनवाड़ी केंद्रों तथा 292 सार्वजनिक संस्थान केंद्रों को पाइप से पीने का पानी प्रदान किया गया है।

प्रधानमंत्री द्वारा अगस्त 2019 में घोषित प्रमुख कार्यक्रम जल जीवन मिशन राज्यों के सहयोग से लागू किया जा रहा है ताकि 2024 तक देश के सभी ग्रामीण परिवारों को नल के पानी का कनेक्शन दिया जा सके। इसकी घोषणा के बाद से केंद्र तथा राज्य सरकारें / केंद्र शासित प्रदेश ‘हर घर जल ‘ सुनिश्चित करने के लिए एक साथ मिल कर काम कर रहे हैं। जल जीवन मिशन प्रारंभ होने के समय लगभग 3.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल के पानी की सप्लाई हुई थी  उसके बाद से पिछले 19 महीनों में ,कोविड महामारी के बावजूद, 4.17 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल के पानी के नए कनेक्शन दिए गए हैं।  परिणामस्वरूप 7.40 करोड़ (38.6 प्रतिशत) से अधिक ग्रामीण परिवार अपने घरों में नल से पीने का पानी प्राप्त कर रहे हैं।

चूंकि अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में 100 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल के पानी का कनेक्शन दिया गया है इसलिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि प्रत्योक ग्रामीण घर को नियमित तथा दीर्घकालिक आधार पर बिना किसी बाधा के नल के पानी का कनेक्शन मिले। इसका अर्थ यह है कि केंद्र शासित प्रशासन का फोकस अब ‘ सर्विस डिलीवरी‘ पर है जोकि जल जीवन मिशन का सार तत्व है। वार्षिक कार्य योजना (2021-22) में केंद्र शासित क्षेत्र की योजना का फोकस 266 गावों में पूरी की गई योजनाओं की निरंतरता पर है। इसके अलावा जल गुणवत्ता निगरानी (डब्ल्यूक्यूएमएस), जल आपूर्ति योजनों के मापन और निगरानी के लिए आओटी आधारित सेंसर, धूसर जल प्रबंधन तथा जल संरक्षण, जल के उचित उपयोग, गंदे पानी के शोधन, पुनः उपयोग जैसे जल प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं के बारे में लोगों को जागरूक बनाने के लिए आईईसी (सूचना, शिक्षा ,संचार) गतिविधियों पर भी फोकस होगा। केंद्र शासित क्षेत्र से गड्ढे को सूखा कर तथा कृषि. वानिकी और बागवानी उद्देश्यों के लिए जल के पुनःउपयोग के माध्यम से धूसर जल प्रबंधन पर बल देने का आग्रह किया गया था।

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जेजेएम के अंर्तगत अग्रणी कर्मियों की भागीदारी के साथ-साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी के माध्यम से जल गुणवत्ता की निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रत्येक गांव में 5 व्यक्तियों , महिलाओं को वरीयता के साथ, प्रशिक्षित किया जाता है ताकि जल की गुणवत्ता की जांच के लिए फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) का उपयोग किया जा सके। प्राकृतिक और रासायनिक मापदण्डों के लिए वर्ष में एक बार प्रत्येक स्त्रोत की जांच की आवश्यकता होती है और बैक्टीरिया प्रदूषण की जांच की आवश्यकता दो बार होती है। राज्यों के लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग/ ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग ग्रामीण घरों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं और प्रयोगशालाओं में जांच करके नियमित रूप से जल की गुणवत्ता की निगरानी करते हैं। एफटीके जांच में  सभी मुख्य सेविका, आंगनवाड़ी कर्मियों, तथा प्रत्येक पंचायत में 5 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के अंर्तगत 75 पलंबरों को भी प्रशिक्षित किया जाता है।

जेजेएम के अंर्तगत एमजीएनआरईजीएस, एसबीएम, पीआरआई को 15वें वित्त आयोग के अनुदान, सीएएमपीए कोष, स्थानीय क्षेत्र विकास कोष जैसे विभिन्न कार्यक्रमों को मिलाकर सभी उपलब्ध स्त्रोतों को प्राप्त करने के प्रयास किए जाते हैं। समिति ने सुझाव दिया कि केंद्र शासित क्षेत्र को धूसर जल प्रबंधन और जल संचयन के लिए अपने अभिसरण कोष का उपयोग करना चाहिए।

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह प्रशासन जल जीवन मिशन को जनांदोलन में बदलने का प्रयास कर रहा है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए केंद्र शासित क्षेत्र ने 2020-21 में दक्षिण-अंडमान और उत्तर तथा मध्य अंडमान में 14 स्थानों पर नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया। केंद्र शासित प्रशासन ने पोस्टर तथा वीडियो बनाने की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया और लोगों को संवेदी बनाने तथा जन भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए होर्डिंग तथा बैनर लगाए। जल संरक्षण और जागरूकता पर हिन्दी और अंग्रेजी में बच्चों के लिए लगभग 1,000 पुस्तिकाएं छापी गईं और वितरित की गईं ताकि स्कूली बच्चों में जागरूकता का भाव विकसित किया जा सके। 2021-22 में प्रशासन की योजना बड़े पैमाने पर इसी तरह की आईईसी गतिविधियां चलाने की है ताकि लोगों को और अधिक जागरूक किया जा सके।

मिशन के अंर्तगत 2021-22 में जेजेएम के लिए 50,011 करोड़ रुपए के बजट आवंटन के अतिरिक्त जल तथा स्वच्छता, समतुल्य राज्य हिस्सा तथा वाह्य सहायता के साथ-साथ राज्य पोषित परियोजनाओं के लिए आरएलबी/ पीआरआई से जुड़े 15वें वित्त आयोग के अनुदान के अंर्तगत 26,940 करोड़ रुपए का निश्चित कोष भी उपलब्ध है। इस तरह 2020-21 में ग्रामीण घरों को नल से जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक निवेश करने की योजना है। इस आकार का निवेश ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने, युवाओं को रोजगार देने  तथा महिलाओं और लड़कियों की नीरसता समाप्त करने में लाभकारी होगा और ग्रामीण भारत के लिए वरदान होगा।

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