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बस्तामुक्त विद्यालय मे टीबी मुक्त समाज निर्माण हेतु जागरूकता कार्यक्रम

बस्तामुक्त विद्यालय मे टीबी मुक्त समाज निर्माण हेतु जागरूकता कार्यक्रम

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गोपाल सिंह विद्रोही बिश्रामपुर-जानकारी के अनुसार क्षेत्र के प्रथम बस्तामुक्त विद्यालय शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला रुनियाडीह में पिरामल फाउंडेशन छत्तीसगढ़ के जिला कार्यक्रम अधिकारी आशीष गुप्ता, जिला कार्यक्रम समन्वयक राज नारायण द्विवेदी व हमर रेडियो विश्रामपुर से विरेश सिंह की विशेष उपस्थिति में टीबी रोग के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित की गई। संस्था प्रमुख सीमांचल त्रिपाठी के नेतृत्व मे संस्था के प्रधानमंत्री गोपाल राजवाड़े एवं उप प्रधानमंत्री रीता सिंह द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी एवं मां सरस्वती के छायाचित्र पर धूपबत्ती प्रज्वलित कर किया गया। स्वागत उद्बोधन में संस्था प्रमुख द्वारा संस्थागत किए जा रहे विभिन्न कार्यों की जानकारी देते हुए बस्तामुक्त शाला की अवधारणा, अध्ययन-अध्यापन, किचन गार्डन में जैविक खेती सहित अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के कौशल विकास कार्यक्रम की जानकारी दी गई। जिला कार्यक्रम समन्वयक राज नारायण द्विवेदी द्वारा टीबी रोग के प्रकारों पर प्रकाश डालते हुए पलमोनेरी टीबी को फेफड़े में पाई जाने वाली टीबी तथा एक्स्ट्रा पलमोनेरी टीबी को फेफड़े को छोड़कर शेष अन्य अंग में होने वाली रोग के बारे में बताया। उन्होंने फेफड़े वाली टीबी के सामान्य लक्षणों के संबंध में बताया कि ऐसे रोगी को दो से तीन सप्ताह तक लगातार बुखार आती है, हल्का बुखार हमेशा रहता है, थकान, सीने में दर्द, भूख में कमी, वजन में कमी, शाम को पसीना आना तथा बलगम के साथ खून आने जैसी शिकायत रहती है। बलगम का जांच करा कर हम टीबी की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं व रोकथाम में बीसीजी का टीका लगाना है, इसे जिला चिकित्सालय में नि:शुल्क लगाए जाने की जानकारी व निःशुल्क उपचार की जानकारी दी गई। चिकित्सालय से प्राप्त नि:शुल्क दवा का सेवन 6 महीने तक लगातार करने से इस रोग से निजात पाया जा सकता है। आशीष गुप्ता कार्यक्रम अधिकारी द्वारा बताया गया कि हमारे नाखूनों तथा बालो में टीबी कभी नहीं पाया जाता। हमें धूम्रपान व नशीली पदार्थों का सेवन करने से सदैव बचने तथा घर-परिवार एवं समाज के लोगों को भी इस दिशा में जागरूक करने की जरूरत है। हमर रेडियो कार्यक्रम से पहुंचे विरेश सिंह द्वारा बताया गया कि प्रतिमाह प्रति व्यक्ति ₹500 पूरक पोषण आहार के लिए टीबी रोगी को दी जाती है ताकि वे पर्याप्त मात्रा में पोषण आहार ले सके। भारत देश से 2025 तक टीबी को दूर करना है तो वहीं यूनेस्को द्वारा पूरे विश्व से 2030 तक दूर करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान संस्था के शिक्षक श्रीमती एम0 टोप्पो, रिजवान अंसारी, उमाशंकर पटेल सहित सहायिका सुमित्रा राजवाड़े व नान दईया उपस्थित रहे। टीबी मुक्त समाज बनाने हेतु शपथ ग्रहण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।

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