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मासूम बच्चियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है कांग्रेस सरकार : रंजना साहू

एर्राबोर में हुई घटना के बाद सहमे अभिभावक छात्रावास से बच्चों को निकाल रहे है

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रायपुर। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता व विधायक रंजना साहू ने सुकमा जिले के एर्राबोर में 5 वर्ष की मासूम छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म की वारदात में पारदर्शी जांच करके आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ित बच्ची व उसके परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। श्रीमती साहू ने कहा कि इस मामले में एक आरोपी की गिरफ्तारी के बावजूद परिस्थितियां और वास्तविकता इस बात का साफ संकेत कर रही है कि आरोपियों की संख्या ज्यादा थी। श्रीमती साहू गुरुवार को एकात्म परिसर में पत्रकारों से चर्चा कर रही थीं।

सुकमा जिले के एर्राबोर थाना क्षेत्र के पोटाकेबिन आदिवासी बालिका छात्रावास में पहली कक्षा की छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म मामले की जांच हेतु गठित भाजपा के 5 सदस्यीय जांच दल ने एर्राबोर पहुंचकर तथ्यों की जांच और विश्लेषण किया। जांच समिति की संयोजक विधायक श्रीमती साहू थीँ और दल में भाजपा राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य लता उसेंडी, प्रदेश मंत्री ओजस्वी मंडावी महिला, मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष शालिनी राजपूत व प्रदेश कार्यसमिति के विशेष आमंत्रित सदस्य सुधीर पांडे शामिल थे। एर्राबोर के घटनास्थल से लौटने के बाद राजधानी के पत्रकारों को श्रीमती साहू ने बताया कि पोटाकेबिन में घटित दुष्कर्म की यह घटना दिल दहलाने वाली है और छत्तीसगढ़ महतारी को शर्मसार करने वाली है। श्रीमती साहू ने कहा कि जांच दल को घटनास्थल तक पहुंचने और छात्रावास में जाने से रोकने के प्रशासन ने पूरे इंतजाम किए थे। जांच दल को न तो पीड़ित बच्ची व उसके माता-पिता से और न ही छात्रावास में रह रही अन्य छात्राओं से मिलने दिया जा रहा था। बावजूद इसके हमने छात्राओं से मुलाकात की। छात्राओं से चर्चा के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं उससे यह संकेत मिल रहा है कि घटना में एक से अधिक आरोपी हैं और यह सामूहिक दुष्कर्म का मामला है।

जांच दल की संयोजक व विधायक श्रीमती साहू ने कहा कि बालिका आदिवासी छात्रावास पर अन्य पुरुषों का प्रायः आना-जाना लगा रहता है। आखिर बालिका छात्रावास में पुरुषों को प्रवेश करने क्यों दिया जाता है? श्रीमती साहू ने कहा कि छात्रावास की स्थिति दयनीय है। यहाँ एक कमरे में 40-50 बच्चियों के रहने, सोने, खाने- पीने और पढ़ने की व्यवस्था रखी गई है। जिस शिक्षिका को इन बच्चियों की सुरक्षा के लिए ड्यूटी पर होना था, वह भी नहीं थी। श्रीमती साहू ने बताया कि 500 की क्षमता वाले इस छात्रावास में 440 बच्चियां रह रही है लेकिन दुष्कर्म की इस भयावह घटना के बाद काफी संख्या में अभिभावकों ने अपनी बच्चियों को वहां से निकाल लिया है। छात्रावास में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं दिखा, कोरोना काल से पत्र व्यवहार करने के बावजूद अब तक वहां किसी महिला होमगार्ड को पदस्थ नहीं किया गया है। कुल मिलाकर आदिवासी बच्चियां पूरी तरह असुरक्षित हाथों में है।

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उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक षड्यंत्र के तहत इस मामले को दबाने और आरोपियों को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। छात्रावास की अधीक्षिका व सहायक अधीक्षिका का केवल निलंबन ही पर्याप्त नहीं, उन पर भी एफआईआर हो और उन्हें भी गिरफ्तार किया जाए। पत्रकार वार्ता में घटना के संबंध में जानकारी देते समय श्रीमती साहू अत्यंत भावुक हो गईँ और रुंधे गले से उन्होंने बताया कि यह घटना दरिंदगी और हैवानियत की इंतिहा हैं। पीड़ित बच्ची घटना के बाद दर्द से परेशान हैं और लघु शंका निवारण तक करने में उसको बेहद परेशानी हो रही है। श्रीमती साहू ने कहा कि प्रदेश सरकार की आंखों की  शर्म मर चुकी है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा पर कटाक्ष करते हुए श्रीमती साहू ने कहा कि गैर कांग्रेस शासित राज्यों में इस तरह की घटनाओं पर तो वह पूरा प्रदेश सिर पर उठा लेती हैं, पर अब छत्तीसगढ़ के इस मामले पर वह अभी तक खामोश क्यों बैठी हैं? छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है तो क्या कांग्रेस महासचिव के नाते मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जवाब तलब करना उन्हें जरूरी नहीं लगता?

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। प्रदेश सरकार हाथ-पर-हाथ धरे बैठी है मुख्यमंत्री बघेल सार्वजनिक मंचों  और विधानसभा में तो बातें बड़ी-बड़ी करते हैं ‘हमर बेटी – हमर अभिमान’ के जुमले उछालते हैं, अब वह बताएं कि आज छत्तीसगढ़ की बेटियां कहीं भी सुरक्षित क्यों नहीं है? मंत्री संवेदनहीनता का प्रदर्शन करके घटना के बाद फीता काटने में मशगूल थे। नाचा-गम्मत में मशगूल रहने वाले मंत्री को पीड़ित बच्ची और उसके माता-पिता से मिलने प्रशासन को जांच के लिए निर्देश देने की फुर्सत नहीं मिली। यह इस सरकार की बेशर्मी का प्रमाण है। श्रीमती साहू ने कहा कि मंत्री खुद ही इस मामले को दबाने और आरोपी को बचाने के प्रयास में लगे रहे। छात्रावास अधीक्षिका और प्रशासन ने इस घटना को मीडिया से छिपाने का शर्मनाक प्रयास किया। ऐसी सरकार और उसकी ऐसी प्रशासनिक मशीनरी को तो चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए। श्रीमती साहू ने दोरनापाल में हाल ही 3 वर्ष की बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और एक आदिवासी बच्ची को मारकर उसकी लाश घर के दरवाजे पर फेंकने और नारायणपुर से मानव तस्करी के खुलासे का जिक्र करते हुए पुलिस प्रशासन पर भी सवाल दागे। श्रीमती साहू ने सवाल किया कि इस मामले में अब तक मुख्यमंत्री, गृह मंत्री व बस्तर के मंत्री का कोई बयान क्यों नहीं आया? इसका साफ इशारा यही है कि आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। श्रीमती साहू ने कहा अनुसूचित जनजाति महिलाओं व बच्चियों के साथ घटित आपराधिक वारदातों में प्रदेश तीसरे स्थान पर है, जबकि यौन उत्पीड़न व दुष्कर्म के मामले में छठे स्थान पर है। प्रदेश सरकार गाहे-बगाहे छत्तीसगढ़ महतारी की दुहाई देती है, आज वही छत्तीसगढ़ महतारी प्रदेश की माताओं और बेटियों की असुरक्षा व दुर्दशा पर शर्मसार है। श्रीमती साहू ने कहा कि जांच दल को रोकने की तमाम सरकारी कोशिशों के बावजूद जांच दल ने सत्य और तथ्य जुटाए हैं और प्रदेश सरकार के निकम्मेपन के सच से हम पूरे प्रदेश को वाकिफ कराएंगे।

इस दौरान पत्रकार वार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी अमित चिमनानी, नगर निगम रायपुर की नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे एवं महिला मोर्चा की प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ किरण बघेल मौजूद रही।

Pradesh Khabar

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