महंगे पेट्रोल से मिलेगी राहत! भारत में बनेंगी FLEX FUEL इंजन वाली गाड़ियां, सरकार करने जा रही है बड़ा ऐलान

नई दिल्ली: Petrol Alternative Fuel: पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर सरकार का काबू नहीं है, क्योंकि पेट्रोल और डीजल दोनों ही ग्लोबल मार्केट से रेगुलेट होते हैं. इसलिए सरकार इनके दाम कम नहीं कर सकती है. लेकिन सरकार एक काम जरूर कर सकती है, पेट्रोल की जगह कोई ऐसा ईंधन का इस्तेमाल शुरू कर दे जो काफी सस्ता हो.

पेट्रोल की जगह अब Ethanol लेगा!

ये ईंधन है एथनॉल (ethanol), सरकार अगले 8-10 दिनों में फ्लेक्स फ्यूल इंजन (flex-fuel engines) पर बड़ा फैसला लेने जा रही है. ऐसे इंजन को ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए अनिवार्य बनाया जाएगा. फ्लेक्स फ्यूल का मतलब हुआ Flexible Fuel, यानी ऐसा ईंधन जो पेट्रोल की जगह ले और वो है एथनॉल. सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि इस वैकल्पिक ईंधन की कीमत 60-62 रुपये प्रति लीटर होगी, जबकि पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर से भी ज्यादा है. इसलिए एथनॉल के इस्तेमाल से देश के लोग प्रति लीटर 30-35 रुपये की बचत कर पाएंगे.

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फ्लेक्स फ्यूल इंजन बनेगा अनिवार्य
एक इवेंट में नितिन गडकरी ने कहा कि “मैं परिवहन मंत्री हूं, मैं इंडस्ट्री को एक आदेश जारी करने जा रहा हूं कि केवल पेट्रोल इंजन नहीं होंगे, फ्लेक्स-फ्यूल इंजन भी होंगे, जहां लोगों के लिए विकल्प होगा कि वे 100 परसेंट कच्चे तेल का उपयोग करें या फिर 100 परसेंट एथनॉल का इस्तेमाल कर सकें. उन्होंने कहा कि मैं अगले 8-10 दिन में फैसला लेने जा रहे हैं, हम फ्लेक्स फ्यूल इंजन को ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए अनिवार्य बनाने जा रहे हैं.

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कई देशों में बनते हैं फ्लेक्स फ्यूज इंजन
नितिन गडकरी ने बताया कि ब्राजील, कनाडा और अमेरिका में ऑटोमोबाइल कंपनियां फ्लेक्स फ्यूल ईंधन का उत्पादन कर रहे हैं. इन देशों में ग्राहकों को 100 परसेंट पेट्रोल या 10 परसेंट बायो एथनॉल की विकल्प मुहैया करवाया जा रहा है. नितिन गडकरी ने कहा कि मौजूदा वक्त में प्रति लीटर पेट्रोल में 8.5 परसेंट एथनॉल मिलाया जाता है, जो कि 2014 में 1 से 1.5 परसेंट हुआ करता था. एथनॉल की खरीदारी भी 38 करोडड़ लीटर से बढ़कर 320 करोड़ लीटर पहुंच गई है.

पेट्रोल से कहीं बेहतर है Ethanol फ्यूल
ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर गडकरी का कहना है कि एथनॉल, पेट्रोल से कहीं बेहतर बेहतर ईंधन है और यह कम लागत वाला, प्रदूषण मुक्त और स्वेदशी है. यह भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाला कदम है क्योंकि हमारे देश में मकई, चीनी और गेहूं सरप्लस है, इनको खाद्यान्नों में रखने के लिए हमारे पास जगह नहीं है. यह देखते हुए कि खाद्यान्न का सरप्लस समस्या पैदा कर रहा है, हमारी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू बाजार की कीमतों से अधिक है, इसलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि खाद्यान्न और गन्ने का उपयोग करके एथनॉल का जूस बना सकते हैं.

हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि प्रदूषण में कटौती और इंपोर्ट पर निर्भरता को कम करने के लिए पेट्रोल के साथ 20 परसेंट एथनॉल ब्लेंडिंग को हासिल करने का लक्ष्य 2025 कर दिया गया है. सरकार ने पिछले साल 2022 तक पेट्रोल में 10 परसेंट एथनॉल ब्लेंडिंग और 2030 तक 20 फीसदी डोपिंग करने का लक्ष्य रखा था.