Advertisement

श्रम मंत्रालय के नियमों में बड़ा बदलाव: मुआवजे में देरी पर नियोक्ता को देना होगा 12 फीसदी जुर्माना

श्रम और रोजगार मंत्रालय - फोटो : labour.gov.in

श्रम मंत्रालय के नियमों में बड़ा बदलाव: मुआवजे में देरी पर नियोक्ता को देना होगा 12 फीसदी जुर्माना
श्रम और रोजगार मंत्रालय - फोटो : labour.gov.in
कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा मजबूत बनाने के लिए श्रम मंत्रालय नियमों में बड़ा बदलाव करने वाला है। नए प्रस्ताव के तहत तय अवधि के 30 दिन के भीतर कर्मचारी या उसके नॉमिनी को मुआवजे का भुगतान नहीं किया जाता, तो कर्मचारी को 12 फीसदी सालाना ब्याज की दर से जुर्माना देना होगा।

श्रम मंत्रालय के मुताबिक, किसी दुर्घटना में कर्मचारी की मृत्यु होने या पूर्ण विकलांगता की स्थिति में नियोक्ता को मुआवजे का भुगतान करना होता है। यह राशि मामले का सेटलमेंट होने के 30 दिन के भीतर खाते में आ जानी चाहिए। इसके बाद जितने भी दिन की देरी होगी, उस अवधि तक मुआवजे की कुल राशि पर 12 फीसदी सालाना ब्याज दर के हिसाब से जुर्माना देना पड़ेगा।

मंत्रालय ने मसौदे को सभी हितधारकों के सामने पेश किया है और 45 दिन के भीतर उनकी राय मांगी है। सामाजिक सुरक्षा कानून की धारा 76 के तहत कर्मचारी की मौत पर उसके मासिक वेतन के 50 फीसदी पर मुआवजे की गणना होती है, जबकि स्थायी विकलांगता के मामले में मासिक वेतन के 60 फीसदी पर गणना की जाती है।

file_0000000093d882119d122d54d9d757b5

श्रम मंत्रालय की सफाई, सरकार का मिनिमम वेज तय करने में देरी का कोई इरादा नहीं

एक अन्य मामले में श्रम मंत्रालय ने कहा है कि सरकार का न्यूनतम वेतन और राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी तय करने में विलंब का कोई इरादा नहीं है। दरअसल, इस तरह कि खबरें आई थीं कि इस मुद्दे पर तीन साल के कार्यकाल वाले एक्सपर्ट ग्रुप के गठन का मकसद न्यूनतम वेतन और राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन तय करने में विलंब करना है। इन खबरों के बाद मंत्रालय ने शनिवार को यह स्पष्टीकरण दिया है।
इससे पहले इसी महीने मंत्रालय ने घोषणा की थी कि केंद्र ने इस मुद्दे पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ के निदेशक प्रोफेसर अजीत मिश्रा की अगुवाई में एक एक्सपर्ट ग्रुप का गठन किया है। यह समूह न्यूनतम वेतन और मजदूरी तय करने के लिए तकनीकी जानकारी और सिफारिशें देगा। जिसका कार्यकाल तीन साल का है।

विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी अलग-अलग है। राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी का तात्पर्य ऐसे वेतन से है, जो पूरे देश में सभी श्रेणियों के श्रमिकों पर लागू होता है। एक्सपर्ट ग्रुप का गठन नोटिफिकेशन की तारीख से तीन साल की अवधि के लिए किया गया है।

ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.12.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.16.05