पिछले सत्र में स्कूली विद्यार्थियों के 60 हजार से ज्यादा जाति प्रमाण पत्र बने

पिछले सत्र में स्कूली विद्यार्थियों के 60 हजार से ज्यादा जाति प्रमाण पत्र बने

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कलेक्टर श्री मलिक की पहल पर जाति प्रमाण पत्र बनाने विशेष अभियान चलाया गया

अध्ययन के दौरान ही विद्यार्थियों के हाथों में जाति प्रमाण पत्र

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महासमुंद/ छत्तीसगढ़ २ासन के मंशानुरूप लोक सेवा प्रदाय प्रणाली को प्रभावी एवं सरल बनाने के लिए सुशासन की दिशा में अभिनव प्रयास किए जा रहे है। जाति प्रमाण पत्र प्रदाय अभियान के तहत स्कूल के छात्र छात्राओं को जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने जिले में सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है। पिछले शिक्षा सत्र 2023-24 में कक्षा पहली से लेकर कक्षा 12वीं तक पढ़ने वाले बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाने के मामले में जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। कलेक्टर श्री प्रभात मलिक ने स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाने हेतु विशेष रूचि लेते हुए सभी स्कूलों में विशेष अभियान चलाया गया। फलस्वरूप पिछले एक सत्र में ही 60 हजार 148 बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाया गया जो सम्भवतः प्रदेश में सर्वाधिक है। कलेक्टर श्री मलिक ने कहा कि हम सभी को शासकीय कामकाज और अन्य कारणों से जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता हमेशा होती है, जिसके लिए लोग भटकते रहते हैं। इसलिए स्कूलों को इकाई मानकर जाति प्रमाण पत्र बनाने की पहल किया गया। जिसके कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की जाति प्रमाण पत्र बने। अध्ययन के दौरान ही बच्चों की जाति प्रमाण पत्र बनने से उन्हें और पालकों को जाति प्रमाण पत्र बनाने भटकना नहीं पड़ेगा।
स्कूलों में जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए बच्चों से जाति प्रमाण पत्र से संबंधित २ासकीय अभिलेख जैसे अन्य पिछड़ा वर्ग के मामले में 1984 के पूर्व का दस्तावेज तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के मामले में 1950 के पूर्व का दस्तावेज जैसे दाखिल खारिज या मिशल, आय प्रमाण पत्र, स्थानीय संरपच या पार्षद से प्रमाण पत्र लेकर प्राचार्य द्वारा फॉर्म भरा जाता है। प्राचार्य द्वारा विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी को भेजा जाता है। बीईओ द्वारा दस्तावेज स्कैन कर ऑनलाईन तहसीलदार को प्रेषित किया जाता है। समस्त दस्तावेज पूर्ण होने पर अस्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। 6 माह पश्चात अनुविभागीय अधिकारी द्वारा स्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। यदि किसी विद्यार्थी के पास शासकीय अभिलेख उपलब्ध नहीं हो तो ग्राम सभा का प्रस्ताव पारित कर व निर्धारित प्रारूप में फॉर्म भरकर सचिव द्वारा दिया जाता है। जिसे पुनः विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी तहसीलदार को प्रेषित करते है।
जिला मिशन समन्वयक कमल नारायण चंद्राकर ने बताया कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए कलेक्टर के निर्देश पर जाति प्रमाण पत्र बनाने जिले में सघन अभियान चलाया गया। इस तरह वर्तमान स्थिति में महासमुंद विकासखण्ड में 18,831 जाति प्रमाण पत्र बनाए गए। वहीं बागबाहरा में 15846, पिथौरा में 5853, बसना में 6271 एवं सरायपाली में 13,347 जाति प्रमाण पत्र बनाए गए। जो एक सत्र में बनाए गए सर्वाधिक जाति प्रमाण पत्र है। कई विद्यार्थियों को उनके घर में जाकर जाति प्रमाण पत्र प्रदान किया जा रहा है। संकुल समन्वयक जागेश्वर सिन्हा ने बताया कि महासमुंद ब्लॉक में तीन स्कूलों में सभी विद्यार्थियों को जाति प्रमाण पत्र जारी किया जा चुका है। जिसमें मिडिल स्कूल बृजराज पाठशाला, मिडिल स्कूल मालीडीह, नयापारा (बेमचा) और बकमा शामिल है। इस विशेष उपलब्धि के लिए प्रधान पाठकों को सम्मानित भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अन्य स्कूलों में भी २ात प्रतिशत विद्यार्थियों का जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया जारी है।