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एनआरएलएम की सहायता से छापर भानपुरी की नीलावती मौर्य बनी लखपति दीदी

फर्नीचर एवं बर्तन दुकान के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर नीलावती मौर्य

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जगदलपुर/ स्वयं के परिवार में कम कृषि भूमि के चलते परिवार की माली हालत को देखकर छापर भानपुरी निवासी नीलावती मौर्य राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांव की स्व सहायता समूह से जुड़कर फर्नीचर एवं बर्तन दुकान के जरिए अब आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो चुकी हैं। करीब पांच साल पहले गांव की दीदियों के साथ दुर्गा महिला स्व सहायता समूह गठित कर थोड़ी-थोड़ी बचत एवं आपसी लेनदेन के द्वारा समूह के सदस्यों ने गांव के समीप लगने वाले हाट बाजार में साग-सब्जी विक्रय और चाय-नाश्ता की दुकान जैसी छोटी-छोटी आर्थिक गतिविधियों से समूह को सक्षम बनाया। वहीं समूह से आर्थिक मदद लेकर सदस्यों ने स्वयं का व्यवसाय करना भी शुरू किया। इन्हीं में से एक नीलावती मौर्य ने गांव के आसपास शादी-ब्याह तथा अन्य अवसरों पर फर्नीचर और बर्तन की मांग को देखते हुए छापर भानपुरी में फर्नीचर एवं बर्तन दुकान खोलने के लिए समूह से 50 हजार रुपए की सहायता ली और घर की बचत राशि मिलाकर गत 2022 में छोटी सी बर्तन दुकान शुरू किया। जिसे अपनी लगन और मेहनत के जरिए अब विस्तार कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि जगदलपुर-चित्रकोट मेनरोड में दुकान स्थित होने के कारण अच्छा विक्रय हो रहा है। इस कारोबार में नीलावती को पति नरपत मौर्य का पूरा सहयोग मिल रहा है। पति करीब डेढ़ एकड़ भूमि में खेती-किसानी करते हैं और अतिरिक्त समय में नीलावती को मदद करते हैं। इस व्यवसाय के जरिए नीलावती दीदी हर महीने 15 से 20 हजार रुपए का सामान बेच लेती हैं और सीजन में 70 हजार रुपए की घरेलू सामग्री विक्रय कर लेती हैं। जिसकी आय से अपने चार सदस्यीय परिवार का समुचित भरण-पोषण कर रहे हैं। नीलावती अपने दोनों बच्चों की शिक्षा के लिए भी सजग होकर बेटी लवली मौर्य को 6 वीं में पढ़ा रही हैं और बेटा भोलेन्द्र को नर्सरी में प्रवेश दिलाया है।
नीलावती मौर्य ने बताया कि घरेलू उपयोग की सोफा, पलंग, आलमारी आदि फर्नीचर सहित बर्तनों की डिमांड शादी के सीजन में बहुत ज्यादा रहती है। इसे ध्यान रखते हुए अब बैंक से दो लाख रुपए ऋण लेने के लिए आवेदन किया है, जिसे भारतीय स्टेट बैंक द्वारा स्वीकृति देने आश्वस्त किया गया है। इस ऋण राशि से आने वाले शादी-ब्याह के सीजन में फर्नीचर एवं बर्तन का अच्छा कारोबार कर सकेंगी। ज्ञात हो कि महिला उद्यमियों एवं कारोबारियों को उनकी जरूरत के अनुसार व्यवसाय विस्तार के लिए राज्य सरकार के सहयोग से भारतीय स्टेट बैंक द्वारा स्वयं सिद्धा योजना संचालित किया जा रहा है। जिसमें महिला उद्यमियों एवं व्यवसायियों को एक से 10 लाख रुपए तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इसी तरह छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक द्वारा स्वयं सिद्धा प्रबल योजना चलाया जा रहा है। इस योजना में भी महिला उद्यमियों को 10 लाख रुपए तक का ऋण सुलभ कराया जाता है। यह दोनों योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से मदद देकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में कारगर साबित हो रही है।

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