
बीसी सखियों ने बदली बस्तर की तस्वीर, अब घर-घर पहुंच रही बैंकिंग सुविधा
जगदलपुर में बीसी सखियों ने ग्रामीण बैंकिंग को घर-घर पहुंचाकर बड़ा बदलाव किया है। 144 सखियों ने 4 करोड़ से अधिक लेन-देन कर महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश की।
जगदलपुर, 17 मार्च 2026।बस्तर के वनांचलों में कभी पेंशन के लिए मीलों पैदल चलने को मजबूर बुजुर्गों की पीड़ा अब इतिहास बनती जा रही है। Jagdalpur जिले में बीसी सखियों ने ग्रामीण बैंकिंग को घर-घर पहुंचाकर एक नई मिसाल कायम की है।
ग्रामीण बैंकिंग के इस मानवीय बदलाव का उदाहरण छिदगांव में देखने को मिला, जहां वृद्ध हितग्राही Ratan Ram Baghel को हर महीने उनकी पेंशन सीधे घर पर मिल रही है। बीसी सखी Dashomati Kashyap स्वयं उनके घर जाकर पेंशन राशि सौंपती हैं, जिससे अब उन्हें बैंक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
जिले की 144 बीसी सखियों ने फरवरी माह में 4 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इन सखियों ने न केवल बैंकिंग सेवाओं को सुलभ बनाया है, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाई है।
विशेष रूप से मातृत्व वंदना योजना के तहत 67 लाख रुपये से अधिक की राशि गर्भवती और धात्री माताओं तक पहुंचाई गई है। वहीं, बुजुर्गों की पेंशन और मनरेगा मजदूरों की मजदूरी का भुगतान भी अब गांवों में ही सुरक्षित तरीके से किया जा रहा है।
दरभा, बस्तर, लोहंडीगुड़ा और तोकापाल जैसे क्षेत्रों में बीसी सखियों ने हजारों ट्रांजैक्शन कर अपनी दक्षता का परिचय दिया है। यह पहल केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मजबूत कहानी बन चुकी है।
बस्तर की ये सशक्त महिलाएं आज “डिजिटल इंडिया” की असली पहचान बनकर उभर रही हैं और ग्रामीण विकास की नई दिशा तय कर रही हैं।
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