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नेशनल लोक अदालत का चमत्कार: टूटते रिश्ते जुड़े, बिखरते परिवार संवर गए!

नेशनल लोक अदालत में आपसी सुलह से सुलझे दाम्पत्य जीवन के मामले

महासमुंद, 8 मार्च 2025: नेशनल लोक अदालत का आयोजन महासमुंद जिला मुख्यालय में किया गया, जहां विभिन्न पारिवारिक और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों का समाधान आपसी सुलह और समझौते के माध्यम से किया गया। विशेष रूप से, कई दंपत्तियों ने आपसी सहमति से अपने रिश्तों को पुनर्स्थापित करने का निर्णय लिया।

खंडपीठ क्रमांक-02 में हुआ सुलह, दंपत्ति फिर से एक साथ रहने को राजी

लोक अदालत के खंडपीठ क्रमांक-02 के समक्ष एक महत्वपूर्ण मामला प्रस्तुत किया गया, जो महासमुंद कुटुंब न्यायालय में लंबित था। यह मामला खल्लारी थाना अंतर्गत ग्राम खल्लारी (भीमखोंज) निवासी प्रमिला बाई निषाद (परिवर्तित नाम) और ग्राम बाना, थाना खरोरा निवासी सत्यनारायण निषाद (परिवर्तित नाम) के दांपत्य जीवन से संबंधित था। इन दोनों का विवाह 17 मार्च 2023 को हुआ था। प्रारंभ में उनका जीवन सुखमय था, लेकिन बाद में पति द्वारा गाली-गलौज और मानसिक प्रताड़ना के चलते जून 2024 से वे अलग-अलग रहने लगे थे।

जब मामला लोक अदालत के समक्ष आया तो पीठासीन अधिकारी श्री प्रफुल्ल कुमार सोनवानी ने दोनों पक्षों को समझाइश दी, जिसके बाद वे फिर से एक साथ रहने के लिए सहमत हो गए। इस प्रकार, अदालत की मध्यस्थता से उनका पारिवारिक जीवन पुनः स्थापित हो सका।

खंडपीठ क्रमांक-04 में घरेलू हिंसा मामले का निराकरण

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खंडपीठ क्रमांक-04 में पीठासीन अधिकारी अनिल कुमार पाडेण्य के समक्ष घरेलू हिंसा से संबंधित प्रकरण क्रमांक 49/2024 प्रस्तुत किया गया, जो बागबाहरा थाना क्षेत्र का था। यह मामला हाडाबंद निवासी हेमलता (परिवर्तित नाम) और ग्राम पोड़ गोबरा नयापारा निवासी मोहन (परिवर्तित नाम) से जुड़ा था। इन दोनों का विवाह 17 फरवरी 2016 को हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ था और उनके दो संतानें हैं।

विवाह के कुछ वर्षों बाद उनके संबंधों में खटास आने लगी। पति द्वारा पत्नी के चरित्र पर संदेह किया जाने लगा, जिसके चलते आए दिन गाली-गलौज और मारपीट की घटनाएं होती थीं। सामाजिक स्तर पर सुलह के प्रयास भी असफल रहे। मामला 25 सितंबर 2024 को न्यायालय में प्रस्तुत हुआ था। अपील प्रकरण के रूप में यह लोक अदालत में लाया गया, जहां पीठासीन अधिकारी ने दोनों पक्षों को समझाइश दी। पति-पत्नी दोनों ने सहमति जताते हुए एक साथ रहने का फैसला किया और अपने दांपत्य जीवन को पुनः शुरू करने पर सहमत हुए।

खंडपीठ क्रमांक-05 में घरेलू हिंसा का मामला हुआ समाप्त

खंडपीठ क्रमांक-05 में पीठासीन अधिकारी आनंद बोरकर के समक्ष घरेलू हिंसा के अंतर्गत प्रकरण 131/2022 प्रस्तुत किया गया। इस मामले में भी समझाइश और आपसी सुलह के माध्यम से विवाद का समाधान निकालते हुए पति-पत्नी को फिर से साथ रहने के लिए राजी किया गया।

लोक अदालत की सफलता और समाज में सकारात्मक संदेश

नेशनल लोक अदालत के माध्यम से कई परिवारों के टूटते रिश्तों को फिर से जोड़ा गया। मध्यस्थता और आपसी सहमति के जरिए कानूनी विवादों का हल निकलना न्याय प्रणाली की सफलता को दर्शाता है। लोक अदालत का यह प्रयास समाज में सकारात्मक संदेश देता है कि पारिवारिक मामलों में आपसी समझ और संवाद से समाधान संभव है।

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