बस्तर में बदल रहा परिदृश्य – भय से भरोसे की ओर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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बीजापुर में 50 नक्सलियों के आत्मसमर्पण पर मुख्यमंत्री ने दी सुरक्षाबलों को बधाई

रायपुर, 30 मार्च 2025: छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव की बयार चल रही है। बीजापुर जिले में एक साथ 50 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। इस महत्वपूर्ण घटना पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुरक्षाबलों और प्रशासन की सराहना करते हुए इसे नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया।

प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति – 2025 के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर स्पष्ट दिखने लगे हैं। नक्सलवाद के कुचक्र में फंसे लोग अब हथियार छोड़कर शांति और विकास के मार्ग पर लौट रहे हैं, जो एक स्वागतयोग्य परिवर्तन है। सरकार उन सभी लोगों के पुनर्वास के लिए तत्पर है जो हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं।

नक्सलवाद उन्मूलन की दिशा में मजबूत कदम

राज्य सरकार की नीतियों और सुरक्षा बलों की रणनीतियों का असर अब बस्तर क्षेत्र में साफ दिख रहा है। नक्सली संगठन लगातार कमजोर हो रहे हैं, और उनके प्रभाव में भारी गिरावट आई है। बीजापुर में हुए इस आत्मसमर्पण को इस बदलाव का महत्वपूर्ण संकेतक माना जा रहा है। प्रदेश के अन्य नक्सल प्रभावित जिलों में भी आत्मसमर्पण की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे संकेत मिलता है कि सरकार की नीतियां सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

राज्य सरकार की नीतियों और योजनाओं का असर केवल सुरक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास के रूप में भी सामने आ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में बस्तर संभाग में कई नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।

सरकारी योजनाओं का असर

छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। इनमें सड़क निर्माण, स्कूलों और अस्पतालों की स्थापना, रोजगार योजनाएं और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार प्रमुख हैं। इन योजनाओं ने स्थानीय लोगों का भरोसा जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया है, जिससे लोगों को अब सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है।

विशेष रूप से ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के तहत सुदूर अंचलों में बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत सड़कों, स्वास्थ्य केंद्रों, शिक्षा संस्थानों और अन्य आवश्यक सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। यह पहल उन क्षेत्रों में खासतौर पर महत्वपूर्ण है, जहां पहले नक्सलियों का प्रभाव अधिक था और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाता था।

बस्तर में बदलती मानसिकता

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मानसिकता में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले ग्रामीण नक्सलियों का समर्थन करने को मजबूर थे, अब वे खुद सरकार की योजनाओं से जुड़कर विकास का हिस्सा बन रहे हैं। कई गांवों में लोगों ने नक्सलियों को समर्थन देना बंद कर दिया है और आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित कर रहे हैं। सरकार भी इन गांवों को विशेष सुविधाएं देकर प्रोत्साहित कर रही है।

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सुरक्षा बलों की लगातार बढ़ती सक्रियता और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास कार्यों ने नक्सलियों की शक्ति को कमजोर कर दिया है। कई बड़े नक्सली लीडर या तो मारे जा चुके हैं या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है। राज्य में अब तक 2200 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया या गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि 350 से अधिक नक्सली मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं।

नए सुरक्षा कैंप और प्रशासनिक पकड़

बस्तर संभाग के सुदूर अंचलों में लगातार नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों को सुरक्षा का अहसास हो रहा है। इन सुरक्षा कैंपों के कारण न केवल पुलिस की पकड़ मजबूत हुई है, बल्कि आम जनता को भी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगा है। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से सरकार के प्रति जनता का भरोसा बढ़ रहा है। अब लोग नक्सलियों के प्रभाव में आने के बजाय सरकार के साथ जुड़ना चाहते हैं। पहले जहां भय का माहौल था, अब वहां उम्मीदों की नई किरण जागी है।

नक्सलियों के लिए खुला पुनर्वास का रास्ता

प्रदेश सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। जो नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति का मार्ग अपनाएंगे, उनके पुनर्वास में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को रोजगार, शिक्षा और वित्तीय सहायता देने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

सरकार का उद्देश्य केवल नक्सलियों का सफाया करना नहीं है, बल्कि उन लोगों को भी जीवन की नई राह देना है जो बरगलाकर इस हिंसक आंदोलन का हिस्सा बना दिए गए थे। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज में पुनः स्थापित करने के लिए सरकार विशेष पुनर्वास योजनाएं लागू कर रही है, जिनमें उन्हें आजीविका के साधन प्रदान करने, शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने और मानसिक व सामाजिक पुनर्वास के अवसर दिए जा रहे हैं।

बस्तर का नया भविष्य

बस्तर जैसे क्षेत्र, जो दशकों तक नक्सलवाद की चपेट में रहे, अब वहां नई संभावनाएं जन्म ले रही हैं। सरकार का लक्ष्य केवल नक्सलवाद का खात्मा नहीं, बल्कि इन क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में लाना है।

छत्तीसगढ़ अब शांति, विकास और समृद्धि की ओर बढ़ रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं के प्रभाव से अब युवा शिक्षा और रोजगार के अवसरों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कई क्षेत्रों में औद्योगिक और कृषि आधारित परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है और वे अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

बीजापुर में 50 नक्सलियों का आत्मसमर्पण यह दर्शाता है कि राज्य में नक्सलवाद के खात्मे की प्रक्रिया तेज हो चुकी है। सरकार की नई नीतियां, सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और जनता का बदलता नजरिया, यह सब मिलकर छत्तीसगढ़ को भय से भरोसे की ओर ले जा रहे हैं। सरकार का संकल्प स्पष्ट है – जो हथियार डालेगा, उसे गले लगाया जाएगा, और जो हिंसा करेगा, उसे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। यह बदलाव राज्य को नक्सलवाद मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।