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मध्य प्रदेश कॉलेज में चपरासी से कराई गई परीक्षा कॉपियों की जांच, सामने आया बड़ा घोटाला

मध्य प्रदेश के एक कॉलेज में चौंकाने वाला मामला, जहां चपरासी से 5000 रुपये में परीक्षा कॉपियों की जांच करवाई गई। जांच शुरू, छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश।

मध्य प्रदेश: कॉलेज में चपरासी से कराई गई परीक्षा कॉपियों की जांच, 5000 रुपये में सौंपा गया भविष्य का फैसला

भोपाल/जबलपुर।मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठ खड़े हुए हैं। राज्य के एक कॉलेज में चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां छात्रों की उत्तरपुस्तिकाओं (Answer Sheets) की जांच किसी प्रोफेसर या विषय विशेषज्ञ से नहीं, बल्कि एक चपरासी (Peon) से करवाई गई। इसके एवज में उसे 5000 रुपये का भुगतान भी किया गया। मामला सामने आते ही शिक्षा विभाग और उच्च शिक्षा आयोग में हड़कंप मच गया है।

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कहां और कैसे हुआ यह चौंकाने वाला खुलासा?

यह मामला जबलपुर संभाग के एक सरकारी कॉलेज से जुड़ा है, जहां एक चपरासी को नियमित कर्मचारियों और प्राचार्य की जानकारी में, महाविद्यालयीन परीक्षाओं की कॉपियों की जांच करने की जिम्मेदारी सौंप दी गई। यह काम उसे कॉलेज के ही कुछ शिक्षकों ने सौंपा, और कथित तौर पर उसके बदले में उसे 5000 रुपये की नकद राशि दी गई।

मामले का खुलासा तब हुआ जब छात्रों को असामान्य अंक मिले और कई उत्तरपुस्तिकाओं में उत्तर और मूल्यांकन का मेल नहीं बैठा। शिकायतें बढ़ने पर विभागीय जांच शुरू हुई, जिसमें यह घोटाला उजागर हुआ।


क्या कहते हैं जांच अधिकारी?

जबलपुर के उच्च शिक्षा अधिकारी ने कहा:

“यह अत्यंत गंभीर मामला है। एक चपरासी को कॉपी जांचने देना न केवल शैक्षणिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है। जांच के बाद दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित कॉलेज के प्राचार्य, परीक्षा प्रभारी और जिन शिक्षकों ने यह काम सौंपा, उन सभी को शोकाज़ नोटिस जारी किया गया है।


छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश

इस घटना के बाद छात्र संगठनों और अभिभावकों में भारी नाराज़गी देखने को मिली। छात्रों ने आरोप लगाया कि जब एक असंबंधित व्यक्ति कॉपी जांचेगा, तो उनके भविष्य का क्या होगा? एक छात्रा ने कहा:

“हम मेहनत से पढ़ते हैं और परीक्षा देते हैं, लेकिन अगर हमारी कॉपियां चपरासी जांचेगा तो हमें न्याय कैसे मिलेगा?”

NSUI और ABVP जैसे छात्र संगठनों ने कॉलेज परिसर में प्रदर्शन कर उच्च शिक्षा मंत्री से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

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शिक्षा विशेषज्ञों की तीखी प्रतिक्रिया

शिक्षा विशेषज्ञों ने इस मामले को “शैक्षणिक भ्रष्टाचार का निचला स्तर” बताया है। भोपाल स्थित शिक्षा शास्त्री डॉ. अशोक तिवारी ने कहा:

“परीक्षा प्रणाली पर यह सीधा हमला है। मूल्यांकन एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसे विषय विशेषज्ञ ही कर सकता है। इसे किसी असंबंधित व्यक्ति को सौंपना शिक्षा के प्रति अपराध है।”


क्या है नियम और प्रक्रिया?

मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग की स्पष्ट गाइडलाइन है कि परीक्षा मूल्यांकन कार्य केवल मान्यता प्राप्त शिक्षक या विषय विशेषज्ञ ही कर सकते हैं। इसके लिए हर कॉलेज को परीक्षक की सूची भेजनी होती है, और मूल्यांकन केंद्रों पर सख्त निगरानी रखी जाती है। इस मामले में न सिर्फ नियमों की अवहेलना हुई, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की भी बू आ रही है।


राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज़

मामला सामने आने के बाद विपक्ष ने भी सरकार पर हमला बोल दिया। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा:

“भाजपा सरकार में शिक्षा का स्तर इतना गिर चुका है कि अब चपरासी से कॉपी जांची जा रही है। यह छात्रों के भविष्य के साथ क्रूर मज़ाक है।”

हालांकि सरकारी प्रवक्ताओं का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।


कॉलेज प्रशासन की सफाई

जब मीडिया ने संबंधित कॉलेज प्राचार्य से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें मामले की पूरी जानकारी नहीं थी और यदि कोई कर्मचारी ऐसा करता पाया गया है तो यह व्यक्तिगत स्तर पर की गई लापरवाही हो सकती है। कॉलेज स्तर पर भी एक आंतरिक जांच समिति गठित की गई है।


एक चपरासी, एक कॉपी और पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में

यह घटना सिर्फ एक कॉलेज या एक व्यक्ति की लापरवाही नहीं है। यह उस शैक्षणिक व्यवस्था की गिरती साख का संकेत है जिसमें नियमों की अनदेखी, जवाबदेही की कमी और निगरानी तंत्र की विफलता उजागर हो रही है।

सरकार और शिक्षा विभाग को अब इस मामले को एक चेतावनी की तरह लेना चाहिए और प्रदेश भर के कॉलेजों में मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए। जब तक शिक्षा को सेवा नहीं, बल्कि सुविधा मानकर चलाया जाएगा, तब तक ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।

Ashish Sinha

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