टी.एस. सिंहदेव ने केंद्र को घेरा: “महिला आरक्षण को परिसीमन का हथियार बनाना लोकतंत्र से अन्याय है”
रायपुर: देश में महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने की प्रक्रिया पर जारी सियासी घमासान के बीच, छत्तीसगढ़ के कद्दावर नेता टी.एस. सिंहदेव ने एक कड़ा रुख अपनाया है। सिंहदेव ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने हमेशा से महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी राजनीतिक भागीदारी का समर्थन किया है, लेकिन जिस तरह से मोदी सरकार इसे परिसीमन (Delimitation) के साथ जोड़ रही है, वह संदिग्ध है।
— टी.एस. सिंहदेव, पूर्व उपमुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
लोकतंत्र और सामाजिक न्याय का संतुलन
सिंहदेव ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि महिला आरक्षण को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2023 में जब इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया था, तब देश को उम्मीद थी कि महिलाओं को तुरंत उनका प्रतिनिधित्व मिलेगा। लेकिन परिसीमन और जनगणना की शर्तों ने इसे अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया है। सिंहदेव के अनुसार, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र के संतुलन को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना देश के भविष्य के लिए घातक है।
सिंहदेव की मुख्य चिंताएं:
- राज्यों के साथ अन्याय: परिसीमन के माध्यम से उत्तर भारतीय राज्यों की सीटें बढ़ने और दक्षिण भारतीय राज्यों की हिस्सेदारी कम होने का डर, जो संघीय ढांचे के खिलाफ है।
- अनावश्यक देरी: आरक्षण को जनगणना की शर्त से बांधना इसे 2029 या उससे भी आगे धकेलने की रणनीति है।
- राजनैतिक लाभ: सिंहदेव का आरोप है कि सरकार महिला सशक्तिकरण के नाम पर अपनी सत्ता की पकड़ मजबूत करने के लिए सीटों के गणित में हेरफेर करना चाहती है।
“सत्ता पर कब्जे का फरेब”
अम्बिकापुर के महाराजा और वरिष्ठ राजनेता सिंहदेव ने सरकार की कार्यप्रणाली को ‘फरेब’ की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार नारी शक्ति की बात करती है, दूसरी तरफ कानूनी पेचों में आरक्षण को फंसाकर राज्यों की संप्रभुता और जनसांख्यिकीय संतुलन से खिलवाड़ कर रही है। उनका इशारा उस विवाद की ओर था जहाँ आबादी के आधार पर परिसीमन होने से उन राज्यों को नुकसान हो सकता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर कार्य किया है।
कांग्रेस की रणनीति और मांग
टी.एस. सिंहदेव ने पार्टी लाइन को दोहराते हुए मांग की कि महिला आरक्षण को वर्तमान लोकसभा सीटों के आधार पर ही तुरंत लागू किया जाना चाहिए। इसमें ओबीसी (OBC) महिलाओं के लिए उप-आरक्षण की भी चर्चा उन्होंने की ताकि वास्तविक सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपनी ‘हेरफेर’ की नीति नहीं बदली, तो यह लोकतंत्र के साथ बड़ा धोखा होगा।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में टी.एस. सिंहदेव के इस बयान को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है, क्योंकि वे एक ऐसे नेता माने जाते हैं जो हमेशा तथ्यों और संवैधानिक मूल्यों की बात करते हैं। उनका यह हमला ऐसे समय में आया है जब देश में परिसीमन को लेकर उत्तर और दक्षिण के बीच बहस छिड़ी हुई है।










