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गौरव गोगोई का हमला: महिला आरक्षण को परिसीमन से क्यों जोड़ रही सरकार? | Gaurav Gogoi News






महिला आरक्षण पर आर-पार: गौरव गोगोई का सरकार पर तीखा हमला | प्रदेश खबर


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महिला आरक्षण पर गौरव गोगोई का सरकार से सवाल: “तीन साल बाद भी वही पुरानी बातें, परिसीमन की शर्त क्यों?”

ब्यूरो रिपोर्ट: प्रदेश खबर न्यूज़ | दिनांक: 16 अप्रैल 2026 | स्थान: नई दिल्ली
नई दिल्ली: महिला आरक्षण को लेकर संसद में एक बार फिर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा है कि आखिर तीन साल बाद भी सरकार परिसीमन और जनगणना की आड़ में आरक्षण को क्यों अटका रही है।

नई दिल्ली: संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र (16-18 अप्रैल 2026) के पहले दिन महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन को लेकर लोकसभा में गरमागरम बहस हुई। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने चर्चा की शुरुआत करते हुए सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून मंत्री ने आज सदन में वही बातें दोहराई हैं, जो तीन साल पहले गृह मंत्री अमित शाह ने कही थीं।

“कांग्रेस पक्ष में है, पर सरकार पेच न फंसाए”

गौरव गोगोई ने सदन में कांग्रेस का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पूर्ण समर्थन में है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि देश की नारी शक्ति को उनका हक मिले, लेकिन मोदी सरकार इस प्रक्रिया को जटिल बना रही है। कांग्रेस की मांग है कि इस कानून को सरल किया जाए ताकि यह तुरंत लागू हो सके।”

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“हमारी CPP चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी जी ने पहले ही कहा था कि महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ मत जोड़िए। इसे 2024 के चुनाव में ही लागू किया जा सकता था। लेकिन गृह मंत्री ने तब कहा था कि पहले जनगणना होगी, फिर परिसीमन होगा और फिर आरक्षण मिलेगा। अब तीन साल बीत गए, आखिर क्या बदलाव आया है?”
— गौरव गोगोई, उपनेता, कांग्रेस (लोकसभा)

विपक्ष का मुख्य विरोध: परिसीमन और जनगणना का पेच

सरकार द्वारा पेश किए गए नए प्रस्ताव में महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू करने की बात कही गई है। विपक्ष का आरोप है कि इस शर्त की वजह से आरक्षण का लाभ 2029 से पहले मिलना मुश्किल है।

मुद्दा सरकार का पक्ष (NDA) विपक्ष का पक्ष (INDIA Bloc)
लागू करने की तिथि जनगणना और परिसीमन के बाद (संभावित 2029) बिना देरी के तुरंत लागू हो
सीटों की संख्या लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव मौजूदा सीटों पर ही आरक्षण लागू हो
परिसीमन संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अनिवार्य राज्यों की नुमाइंदगी कम करने की साजिश

अमित शाह के 3 साल पुराने बयान पर घेरा

गोगोई ने सरकार को याद दिलाया कि 2023 में जब इस विधेयक पर चर्चा हुई थी, तब गृह मंत्री ने आश्वासन दिया था कि चुनाव के बाद जनगणना की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। गोगोई ने सवाल किया, “अब 2026 आ चुका है, लेकिन जनगणना और परिसीमन के नाम पर केवल समय काटा जा रहा है। सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के बजाय उन्हें चुनावी वादों के जाल में उलझा रही है।”

दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंता

बहस के दौरान केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि डीएमके (DMK) और अन्य विपक्षी दलों ने भी परिसीमन के साथ महिला आरक्षण को जोड़ने का विरोध किया। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने भी इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। विपक्ष का तर्क है कि यदि सीटों की संख्या आबादी के आधार पर बढ़ाई गई, तो दक्षिण भारतीय राज्यों की संसद में हिस्सेदारी कम हो जाएगी।

बड़ी बात: गौरव गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन को थोपना चाहती है ताकि राजनीतिक लाभ के लिए लोकसभा का स्वरूप बदला जा सके। उन्होंने मांग की कि सरकार आरक्षण को सरल करे और महिलाओं को तुरंत उनका प्रतिनिधित्व दे।

सरकार ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक के माध्यम से 2029 के चुनावों में 33% आरक्षण लागू करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, संख्या बल के आधार पर सरकार इस विधेयक को पारित कराने की स्थिति में है, लेकिन कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के आक्रामक रुख ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है। आगामी दो दिनों में संसद में इस पर और भी तीखी बहस होने की उम्मीद है।


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