छत्तीसगढ़ताजा ख़बरेंब्रेकिंग न्यूज़राजनीतिराज्य
Trending

बलरामपुर जिले के ग्राम बदौली में पारंपरिक सुवा नृत्य का समापन, लोकसंस्कृति और आस्था का जीवंत उत्सव

बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायत बदौली में 30 नवंबर 2025 से चल रहे पारंपरिक सुवा नृत्य कार्यक्रम का समापन हुआ। महिलाओं ने सुवा नृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और परंपराओं को जीवंत किया।

बलरामपुर जिले के ग्राम बदौली में पारंपरिक सुवा नृत्य का समापन, लोकसंस्कृति और आस्था का जीवंत उत्सव

WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.27.06 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 8.56.40 PM (1)
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.09.46 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.06.54 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.17.22 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.12.09 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.19.42 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.04.25 PM
WhatsApp Image 2026-01-25 at 9.31.09 PM
WhatsApp-Image-2026-01-04-at-3.52.07-PM-1-207x300 (1)
53037c58-1c56-477e-9d46-e1b17e179e86

बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायत बदौली में 30 नवंबर 2025 से चल रहे पारंपरिक सुवा नृत्य कार्यक्रम का समापन हुआ। महिलाओं ने सुवा नृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और परंपराओं को जीवंत किया।

बलरामपुर।परंपराएँ केवल बीते समय की यादें नहीं होतीं, बल्कि वे हमारी पहचान, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का आईना होती हैं। आधुनिकता की तेज़ रफ्तार के बीच भी बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायत बदौली की गलियों में गूंजती सुवा नृत्य की थाप यह प्रमाण देती है कि गांव की जड़ें आज भी उतनी ही गहरी और मजबूत हैं।

ग्राम बदौली में 30 नवंबर 2025 से निरंतर चल रहे पारंपरिक सुवा नृत्य कार्यक्रम का आज विधिवत समापन हुआ। इस आयोजन में गांव की माताओं और बहनों ने पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर बाँस की टोकरी में रखे मिट्टी के सुआ (तोते) के साथ भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। ये मिट्टी के सुआ केवल खिलौने नहीं, बल्कि गौरा-गौरी (शिव-पार्वती) के सजीव प्रतीक माने जाते हैं।

mantr
66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b

सुवा नृत्य के दौरान गूंजते ‘तारी हरी नाना’ जैसे पारंपरिक लोकगीतों की मधुर धुनों पर थिरकते कदमों ने गांव के हर आंगन में सुख, समृद्धि और प्रेम का संदेश पहुंचाया। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोकआस्था, सामूहिकता और सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण बना।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर ग्राम पंचायत के सभी जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ नागरिक, बुजुर्ग और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे। सभी ने एकमत से कहा कि ऐसे आयोजन गांव की सांस्कृतिक पहचान को संजोने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि सुवा नृत्य जैसी परंपराएं छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की आत्मा हैं, जिन्हें संरक्षित और संवर्धित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

 

Ashish Sinha

e6e82d19-dc48-4c76-bed1-b869be56b2ea (2)
WhatsApp Image 2026-01-04 at 4.02.37 PM
WhatsApp Image 2026-01-04 at 3.36.04 PM
WhatsApp Image 2026-01-04 at 3.39.12 PM
WhatsApp Image 2026-01-04 at 3.44.45 PM (1)

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!