
पूर्वोत्तर को मिली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी: पीएम मोदी बोले – रणनीतिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए ऐतिहासिक कदम
पूर्वोत्तर भारत को मिली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्व का विषय बताया। यह सुविधा रणनीतिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, राहत कार्य और सैन्य जरूरतों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।
पूर्वोत्तर को मिली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी: रणनीतिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को मिलेगी नई मजबूती
नई दिल्ली, 14 फरवरी 2026/ प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पूर्वोत्तर भारत को मिली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (Emergency Landing Facility – ELF) को देश के लिए गर्व का विषय बताते हुए इसे रणनीतिक, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र को यह सुविधा मिलना न केवल सामरिक दृष्टि से अहम है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत एवं बचाव कार्यों के लिए भी यह एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी।
उन्होंने लिखा —
“यह अत्यंत गर्व का विषय है कि पूर्वोत्तर को इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी मिली है। रणनीतिक दृष्टिकोण से और प्राकृतिक आपदाओं के समय यह सुविधा अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद देशभर में इस फैसले को ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों, आपदा प्रबंधन अधिकारियों और रणनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि यह सुविधा पूर्वोत्तर भारत को सुरक्षा, संपर्क और आपात सेवाओं के क्षेत्र में एक नई मजबूती प्रदान करेगी।
क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी?
इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी एक विशेष प्रकार की हवाई पट्टी होती है, जिसका उपयोग आपातकालीन परिस्थितियों में विमानों की सुरक्षित लैंडिंग के लिए किया जाता है। आमतौर पर यह सुविधा ऐसे स्थानों पर विकसित की जाती है, जहां सामान्य हवाई अड्डों की उपलब्धता सीमित हो या आपदा के समय रनवे क्षतिग्रस्त होने की संभावना अधिक रहती हो।
इन सुविधाओं का उपयोग विशेष रूप से:
- प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत एवं बचाव कार्यों
- सैन्य विमानों की आपात लैंडिंग
- मेडिकल इमरजेंसी
- मानवीय सहायता मिशन
- सामरिक और सुरक्षा अभियानों
के लिए किया जाता है।
पूर्वोत्तर भारत जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील और दुर्गम क्षेत्र में इस सुविधा का निर्माण राष्ट्रीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
पूर्वोत्तर: भौगोलिक और सामरिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र
पूर्वोत्तर भारत आठ राज्यों — असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम — से मिलकर बना है। यह क्षेत्र न केवल प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
इस क्षेत्र की सीमाएं चीन, म्यांमार, भूटान और बांग्लादेश से लगती हैं। ऐसे में यहां मजबूत आधारभूत ढांचे, विशेषकर हवाई संपर्क और आपात सेवाओं का होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी से:
- सीमा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी
- सेना और वायुसेना की त्वरित तैनाती संभव होगी
- सामरिक निगरानी बेहतर होगी
- आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी
प्राकृतिक आपदाओं के समय बनेगी जीवन रक्षक सुविधा
पूर्वोत्तर क्षेत्र भूकंप, बाढ़, भूस्खलन और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से अति संवेदनशील है। हर वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ और भूस्खलन से लाखों लोग प्रभावित होते हैं। कई बार सड़क और रेल संपर्क पूरी तरह बाधित हो जाता है।
ऐसी स्थिति में हवाई मार्ग ही एकमात्र विकल्प बचता है। इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी के माध्यम से:
- राहत सामग्री की त्वरित आपूर्ति
- घायलों का हवाई मार्ग से सुरक्षित स्थानों तक परिवहन
- आपदा प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों की तैनाती
- फंसे लोगों का रेस्क्यू ऑपरेशन
तेजी से किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यह सुविधा आपदा प्रबंधन की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी और हजारों लोगों की जान बचाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
सैन्य और रणनीतिक दृष्टि से क्यों है यह अहम?
पूर्वोत्तर भारत की भौगोलिक स्थिति इसे सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। चीन के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और म्यांमार सीमा पर सक्रिय उग्रवादी गतिविधियों को देखते हुए यहां मजबूत सैन्य बुनियादी ढांचे की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी से:
- लड़ाकू विमानों और सैन्य परिवहन विमानों की आपात लैंडिंग संभव होगी
- सैन्य अभियानों में तेजी आएगी
- आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी
- सीमावर्ती क्षेत्रों में त्वरित सैन्य सहायता पहुंचाई जा सकेगी
यह सुविधा भारत की वायुसेना और अन्य सुरक्षा बलों की रणनीतिक क्षमताओं को एक नया आयाम प्रदान करेगी।
पूर्वोत्तर विकास की दिशा में बड़ा कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बीते कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी है। सड़क, रेल, हवाई संपर्क, डिजिटल कनेक्टिविटी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है।
इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी इस विकास श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। इससे न केवल सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि क्षेत्र में निवेश और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से:
- औद्योगिक निवेश बढ़ेगा
- पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा
- स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
- क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री के बयान के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों, रक्षा विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
रक्षा विशेषज्ञों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से ऐतिहासिक कदम बताया, वहीं आपदा प्रबंधन से जुड़े संगठनों ने इसे जीवन रक्षक सुविधा करार दिया।
सोशल मीडिया पर भी #EmergencyLandingFacility और #NorthEastDevelopment ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग इस फैसले की सराहना कर रहे हैं।
भविष्य की योजनाएं और संभावनाएं
सरकारी सूत्रों के अनुसार आने वाले समय में पूर्वोत्तर क्षेत्र में ऐसी और भी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी विकसित की जा सकती हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में आपात हवाई नेटवर्क तैयार हो सके।
इसके साथ ही:
- नए हवाई अड्डों का विकास
- छोटे एयरस्ट्रिप्स का निर्माण
- हेलीकॉप्टर सेवाओं का विस्तार
- मेडिकल एयर एम्बुलेंस नेटवर्क
जैसी योजनाओं पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।
पूर्वोत्तर भारत को मिली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी न केवल एक आधारभूत संरचना परियोजना है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, मानवीय सहायता और क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दूरदर्शी निर्णय आने वाले वर्षों में पूर्वोत्तर को सुरक्षा, विकास और समृद्धि के नए शिखर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।
यह सुविधा संकट की घड़ी में जीवन रक्षक सिद्ध होगी और भारत की सामरिक शक्ति को नई मजबूती प्रदान करेगी।









