NH-343 की बदहाली: रामानुजगंज-अंबिकापुर रोड बना जानलेवा, सरकार की अनदेखी जारी

राष्ट्रीय राजमार्ग 343: सरगुजा की जीवनरेखा अब बनी जानलेवा चुनौती

रामानुजगंज/अंबिकापुर, छत्तीसगढ़ — छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग की कभी “जीवनरेखा” कहे जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 343 की हालत इतनी बदतर हो गई है कि रामानुजगंज से अंबिकापुर तक का लगभग 120 किलोमीटर का सफर अब किसी जानलेवा परीक्षा से कम नहीं है। यह मार्ग, जो व्यापार, चिकित्सा और प्रशासनिक आवाजाही के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था, अब सरकारी उदासीनता और अनदेखी का जीता-जागता उदाहरण बन गया है।

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गड्ढों से भरा मार्ग, वाहनों का टूटना आम

इस राजमार्ग पर हर 500 मीटर पर गहरे गड्ढे, कीचड़ और मिट्टी का साम्राज्य है, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर गड्ढों की गहराई 1 से 1.5 फीट तक पहुंच गई है, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन लगातार क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। यात्रियों को हर दिन हजारों रुपये वाहन मरम्मत पर खर्च करने पड़ रहे हैं, और कई लोग गंभीर चोटों का शिकार हो चुके हैं। बारिश के दिनों में फिसलन और कीचड़ के कारण दुर्घटनाओं की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर

इस मार्ग की बदहाली का सबसे बुरा असर एंबुलेंस सेवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों को लेकर आ रही एंबुलेंस समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे कई गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोगियों को समय पर इलाज न मिलने के कारण नुकसान उठाना पड़ा है। यह स्थिति मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है।

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विकास के दावों पर सवाल और राजनीतिक चुप्पी

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के विकास के दावे, इस सड़क की दुर्दशा देखकर खोखले लगते हैं। बार-बार शिकायतें करने के बावजूद, केवल आश्वासनों के सिवा कुछ नहीं मिला है। हैरानी की बात यह है कि इस मार्ग के दोनों सिरों पर प्रभावशाली राजनीतिक प्रतिनिधि होने के बावजूद, उनकी चुप्पी चौंकाने वाली है। चुनावों के दौरान किए गए सड़क मरम्मत और चौड़ीकरण के वादे केवल वादे ही बनकर रह गए हैं। जनता अब सवाल कर रही है कि वोट लेने वाले नेता उनकी तकलीफें देखने क्यों नहीं आते।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की उदासीनता

इस समस्या के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और संबंधित विभाग सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। मरम्मत के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है, और डाला गया गिट्टी पहली बारिश में ही बह जाता है। कोई स्थायी समाधान या सड़कों के कायाकल्प की योजना अभी तक सामने नहीं आई है।

 

समाधान की आवश्यकता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही इस मार्ग की पूर्ण मरम्मत और पुनर्निर्माण नहीं किया गया, तो यह और अधिक गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। सरकार को प्राथमिकता के आधार पर बजट आवंटित कर, पारदर्शी तरीके से टेंडर प्रक्रिया पूरी कर, और समयबद्ध तरीके से निर्माण कार्य संपन्न कराना चाहिए। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहती है, ताकि यह “जीवनरेखा” फिर से अपने पुराने गौरव को प्राप्त कर सके।