रामगढ़ संरक्षण पर जांच समिति की राजनीति तेज, पूर्व विधायक बोले – मुद्दा पूरी तरह गैर-राजनीतिक

रामगढ़ संरक्षण पर राजनीति तेज – पूर्व विधायक का भाजपा पर आरोप, कहा: गैर-राजनीतिक मुद्दे को दिया जा रहा राजनीतिक रंग

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रायपुर/सरगुजा। रामगढ़ पर्वत और केंते एक्सटेंशन खदान को लेकर प्रदेश में राजनीति तेज हो गई है। पूर्व विधायक ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह गैर-राजनीतिक मुद्दे को जानबूझकर राजनीतिक रंग दे रही है।

पूर्व विधायक ने कहा कि जांच कमेटी जिम्मेदार और अनुभवी लोगों की है, जिनमें 2 सदस्य सरगुजा जिले से हैं। उन्होंने कल सभी सदस्यों से मोबाइल पर चर्चा कर सरगुजा की जनभावनाओं का सम्मान करने का निवेदन किया था। लेकिन भाजपा नेताओं ने जांच को राजनीति से जोड़ने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता यह कह रहे हैं कि खदान की अनुमति 2020 में कांग्रेस सरकार के समय मिली थी और उस दौरान टी. एस. सिंहदेव कैबिनेट मंत्री थे। “सच्चाई यह है कि मेरे विधायक रहते और मेरे विरोध के कारण इस क्षेत्र में एक पेड़ तक नहीं कटा। मेरे चुनाव हारते ही और भाजपा की सरकार आते ही 5 दिनों के भीतर जंगल काटने लगे,” उन्होंने आरोप लगाया।

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पूर्व विधायक ने कहा कि उनके कार्यकाल में ही इस क्षेत्र में नए खदान का प्रस्ताव निरस्त हुआ था और रामगढ़ पर्वत के संरक्षण व पर्यावरण बचाने के प्रयास में विधानसभा ने केंते एक्सटेंशन खदान को रद्द करने का संकल्प पारित किया था।

उन्होंने वर्ष 2009 का हवाला देते हुए कहा कि उस समय केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र को उसके विशेष पर्यावरणीय महत्व के चलते नो गो एरिया घोषित किया था। लेकिन 2010 में छत्तीसगढ़ में तत्कालीन रमन सिंह सरकार के विशेष अनुरोध पर केवल एक खदान खोलने की अनुमति दी गई थी। “भाजपा के केंद्र की सत्ता में आने के बाद आज तीसरी खदान – केंते एक्सटेंशन – का रास्ता साफ किया जा रहा है,” उन्होंने कहा।

जांच दल के सदस्य अखिलेश सोनी द्वारा रामगढ़ को बचाने की पहल का स्वागत करते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि यह सरगुजा की जनभावनाओं से जुड़ा एक गैर-राजनीतिक मुद्दा है। अगर गलत सर्वे के आधार पर किसी अधिकारी ने खदान को अनुमति दी है, तो चाहे वह अतीत में हो या वर्तमान में, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।