
रामगढ़ पर्वत संरक्षण: टी.एस. सिंहदेव की पहल पर केंद्र ने दी निष्पक्ष जांच के निर्देश
राम और सीता के वनवास से जुड़ा ऐतिहासिक रामगढ़ पर्वत खदानों से खतरे में है। टी.एस. सिंहदेव की पहल पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ वन विभाग को निष्पक्ष जांच और न्यायोचित कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
रामगढ़ पर्वत संरक्षण पर बड़ी पहल — केंद्रीय मंत्रालय ने निष्पक्ष जांच का दिया निर्देश
सरगुजा, 26 सितम्बर 2025।प्रभु राम और माता सीता के वनवास काल से जुड़े पौराणिक व ऐतिहासिक रामगढ़ पर्वत के संरक्षण को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव द्वारा प्रारंभ की गई मुहिम पर नवरात्रि के अवसर पर सुखद परिणाम सामने आया है।
टी.एस. सिंहदेव द्वारा 30 अगस्त 2025 को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, मुख्यमंत्री और फॉरेस्ट एडवाइजरी कमेटी को भेजे गए पत्र पर कार्रवाई करते हुए मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ वन विभाग के सचिव को निष्पक्ष जांच और न्यायोचित कार्यवाही के निर्देश जारी किए हैं।
वर्ष 2014 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस क्षेत्र की जैव विविधता को देखते हुए खदान संचालन पर रोक लगाई थी और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया एवं ICRFI देहरादून से जांच कराई थी।
वर्ष 2021 की रिपोर्ट में परसा ईस्ट केंते बसेन खदान (नंबर 14) के अतिरिक्त क्षेत्र को “नो-गो एरिया” घोषित किया गया था।
इसके बावजूद, वर्ष 2023 में नई सरकार के गठन के बाद रामगढ़ पर्वत के समीप केंते एक्सटेंशन खदान नंबर 12 खोलने के लिए जनसुनवाई कराई गई, जिस पर 1500 से अधिक आपत्तियां आईं।
स्थानीय भूविज्ञानी विमान मुखर्जी सहित विशेषज्ञों ने बार-बार चेताया है कि खदान की ब्लास्टिंग से पर्वत पर दरारें पड़ रही हैं, जिससे इसकी संरचना और धार्मिक धरोहर पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
पर्यावरणीय और सामाजिक महत्व
यह क्षेत्र लेमरू हाथी रिजर्व का हिस्सा है, जो मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।
2000 से 2023 के बीच केवल उत्तर छत्तीसगढ़ क्षेत्र में ही 737 लोगों की जान मानव-हाथी संघर्ष में गई है।
वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर इस क्षेत्र में नई खदानों पर रोक लगाने की सिफारिश केंद्र को भेजी थी, जिसमें भाजपा विधायक भी शामिल थे।
पूर्व उपमुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्रालय के पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए टी.एस. सिंहदेव ने केंद्रीय वन महानिदेशक का आभार जताया और ट्वीट कर कहा:
“अब यह विश्वास है कि माता सीता और प्रभु राम से जुड़े सरगुजा के इस पुरातात्विक और पर्यावरणीय धरोहर की रक्षा हेतु छत्तीसगढ़ सरकार भी निष्पक्ष जांच कराकर न्यायोचित कदम उठाएगी।”













