विशेष लेख: इतिहास के झरोखे से (4 मई – 10 मई)
समय की धारा में दर्ज वे घटनाएँ जिन्होंने दुनिया बदल दी
इतिहास केवल तारीखों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह उन संघर्षों, विजयों और आविष्कारों की गाथा है जिन्होंने वर्तमान को आकार दिया है। मई के इस सप्ताह में भारत ने जहाँ आजादी की पहली चिंगारी (1857) को ज्वाला बनते देखा, वहीं विश्व ने रंगभेद के अंत और नई लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का उदय देखा। आइए, जानते हैं 4 मई से 10 मई तक का संपूर्ण इतिहास।
4 मई: टीपू सुल्तान की शहादत और आधुनिक विज्ञान
1. मैसूर के शेर का पतन (1799): 4 मई 1799 को श्रीरंगपट्टनम की रक्षा करते हुए ‘मैसूर के शेर’ टीपू सुल्तान वीरगति को प्राप्त हुए थे। चौथे एंग्लो-मैसूर युद्ध के दौरान अंग्रेजों ने गद्दारी और सैन्य बल के दम पर मैसूर पर कब्जा किया। टीपू सुल्तान को उनके रॉकेट तकनीक के शुरुआती प्रयोग के लिए ‘मिसाइल मैन’ का पूर्वज भी माना जाता है।
2. ऑस्कर अवार्ड्स की नींव (1927): इसी दिन एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज की स्थापना हुई थी, जिसने आगे चलकर दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित ‘ऑस्कर’ पुरस्कारों की शुरुआत की।
5 मई: कार्ल मार्क्स का जन्म और नेपोलियन का अंत
1. कार्ल मार्क्स जयंती (1818): ‘दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ’ का नारा देने वाले महान दार्शनिक और अर्थशास्त्री कार्ल मार्क्स का जन्म आज ही के दिन जर्मनी में हुआ था। उनके विचारों ने रूस, चीन और भारत सहित दुनिया के कई देशों की राजनीति को प्रभावित किया।
2. नेपोलियन बोनापार्ट का निधन (1821): फ्रांस के महान सम्राट नेपोलियन की मृत्यु सेंट हेलेना द्वीप पर निर्वासन के दौरान हुई थी। वह इतिहास के सबसे कुशल सेनापतियों में गिने जाते हैं।
6 मई: मोतीलाल नेहरू और हिंडनबर्ग त्रासदी
1. मोतीलाल नेहरू जयंती (1861): भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पंडित जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू का जन्म आज ही के दिन हुआ था। उन्होंने स्वराज पार्टी की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाई थी।
2. हिंडनबर्ग आपदा (1937): दुनिया का सबसे बड़ा जर्मन हवाई जहाज ‘हिंडनबर्ग’ अमेरिका के न्यू जर्सी में आग की लपटों में घिर गया था। इस घटना ने हवाई परिवहन के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया।
7 मई: गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की विरासत
1. रवींद्रनाथ टैगोर जयंती (1861): एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव का जन्म आज ही के दिन कोलकाता में हुआ था। उन्होंने न केवल भारत का ‘जन गण मन’ बल्कि बांग्लादेश का ‘आमार सोनार बांग्ला’ भी लिखा। उनकी साहित्य साधना आज भी वैश्विक प्रेरणा है।
2. वियतनाम की ऐतिहासिक जीत (1954): ‘दिएन बिएन फु’ की लड़ाई में वियतनाम ने फ्रांसीसी सेना को हराकर उपनिवेशवाद के अंत की शुरुआत की थी।
8 मई: विश्व रेडक्रॉस दिवस और द्वितीय विश्व युद्ध का अंत
1. विक्ट्री इन यूरोप डे (1945): द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने बिना शर्त आत्मसमर्पण किया था। इसे यूरोप में विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।
2. रेडक्रॉस की स्थापना: हेनरी डुनेंट के प्रयासों से मानवता की सेवा के लिए रेडक्रॉस की स्थापना का विचार मजबूत हुआ। आज ही के दिन विश्व रेडक्रॉस दिवस मनाया जाता है।
9 मई: महाराणा प्रताप – शौर्य की मिसाल
1. महाराणा प्रताप जयंती (1540): मेवाड़ के वीर योद्धा महाराणा प्रताप का जन्म कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ था। घास की रोटी खाना स्वीकार किया लेकिन मुगलों की गुलामी कभी नहीं। हल्दीघाटी का युद्ध उनके अदम्य साहस का प्रतीक है।
2. गोपाल कृष्ण गोखले (1866): गांधीजी के राजनीतिक गुरु माने जाने वाले समाज सुधारक गोखले जी का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
10 मई: 1857 की क्रांति और मंडेला युग
1. प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत (1857): मेरठ की छावनी से भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूँका था। यहीं से ‘दिल्ली चलो’ का नारा गूंजा और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित किया गया।
2. नेल्सन मंडेला का शपथ ग्रहण (1994): दक्षिण अफ्रीका में सदियों पुराने रंगभेद शासन के बाद नेल्सन मंडेला पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने। यह दिन वैश्विक लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक है।









