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साप्ताहिक पंचांग और व्रत-त्योहार (4-10 मई 2026): ज्येष्ठ मास की शुरुआत, नारद जयंती और वृष संक्रांति, जानें शुभ मुहूर्त

साप्ताहिक पंचांग एवं व्रत-त्योहार विशेष

4 मई से 10 मई 2026 | ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष

भारतीय काल गणना में पंचांग का विशेष महत्व है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह सप्ताह वैशाख पूर्णिमा के बाद ज्येष्ठ मास की शुरुआत का साक्षी बनेगा। इस सप्ताह में नारद जयंती, एकदंत संकष्टी चतुर्थी और कई महत्वपूर्ण खगोलीय परिवर्तन होने जा रहे हैं। आइए जानते हैं इस सप्ताह के प्रत्येक दिन का पंचांग और धार्मिक महत्व।

4 मई 2026, सोमवार: ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया

पंचांग: सूर्योदय- 05:40 AM, सूर्यास्त- 06:45 PM। नक्षत्र: अनुराधा। योग: परिघ।

धार्मिक महत्व: आज से ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। इस दिन से भीषण गर्मी की शुरुआत मानी जाती है, अतः जल दान का विशेष महत्व शुरू होता है।

शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 11:50 से 12:42 तक। राहुकाल: सुबह 07:30 से 09:00 तक।

5 मई 2026, मंगलवार: नारद जयंती / संकष्टी चतुर्थी

मुख्य त्योहार: नारद जयंती एवं एकदंत संकष्टी चतुर्थी।

विवरण: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन देवर्षि नारद का प्राकट्य हुआ था। साथ ही, मंगलवार होने के कारण ‘अंगारकी संकष्टी चतुर्थी’ का संयोग बन रहा है। भगवान गणेश की पूजा से सभी विघ्न दूर होते हैं।

चंद्रोदय समय: रात्रि 09:25 PM (सरगुजा समय अनुसार)।

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6 – 7 मई 2026: ज्येष्ठ कृष्ण पंचमी एवं षष्ठी

इन दिनों में उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा। यह समय कृषि कार्यों और मांगलिक कार्यों की रूपरेखा बनाने के लिए श्रेष्ठ है। सरगुजा अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों में इस समय ‘ठाकुर देव’ की विशेष पूजा की तैयारियां शुरू होती हैं।

8 मई 2026, शुक्रवार: कालाष्टमी

विशेष: मासिक कालाष्टमी। आज भगवान शिव के रौद्र रूप ‘काल भैरव’ की पूजा की जाती है। तंत्र साधना और शत्रुओं पर विजय के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।

9 – 10 मई 2026: वृष संक्रांति की पूर्व संध्या

सप्ताह के अंत में सूर्य देव मेष राशि से निकलकर वृष राशि में प्रवेश की तैयारी करेंगे। ज्येष्ठ मास की गर्मी अपने चरम पर होगी। शास्त्रों के अनुसार इस समय शीतल जल और पंखे का दान करना अनंत पुण्यदायी होता है।

ज्येष्ठ मास का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व

ज्येष्ठ का महीना हिंदू वर्ष का तीसरा महीना है। विज्ञान की दृष्टि से इस समय सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे जल स्तर नीचे चला जाता है। इसीलिए हमारे ऋषियों ने इस महीने में ‘गंगा दशहरा’ और ‘निर्जला एकादशी’ जैसे व्रत रखे ताकि मनुष्य जल की महत्ता को समझ सके।

धर्मग्रंथों के अनुसार, ज्येष्ठ मास में दोपहर के समय सोना वर्जित माना गया है। इस महीने में केवल एक समय भोजन करना और अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक बताया गया है।

आशीष सिन्हा, संपादक

© 2026 प्रदेश खबर न्यूज़ नेटवर्क | छत्तीसगढ़

डिस्क्लेमर: पंचांग गणना स्थानीय समय के अनुसार भिन्न हो सकती है।

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