सरगुजा राजपरिवार ने निभाई दशहरे की तीन सौ साल पुरानी परंपरा, रघुनाथ पैलेस में शस्त्र पूजन और जनता से भेंट

सरगुजा राजपरिवार ने निभाई दशहरे की तीन सौ साल पुरानी परंपरा, रघुनाथ पैलेस में हुआ शस्त्र पूजन

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सरगुजा। विजयादशमी के पावन अवसर पर सरगुजा राजपरिवार ने रघुनाथ पैलेस में दशहरे की सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन किया। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव अपने भतीजे और परिवारजनों के साथ इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल हुए।

शस्त्र पूजन और वाद्य यंत्रों की पूजा

परंपरा के अनुसार दशहरे के दिन रघुनाथ पैलेस में अश्व, गज, नवग्रह, शस्त्र, नगाड़ा और शीश की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष भी राजपरिवार ने विधिविधान से पूजा कर क्षेत्र की सुरक्षा, संरक्षण, ऐश्वर्य एवं उन्नति की कामना की।

जनता से भेंट और दरबार

दशहरे के दिन सरगुजा पैलेस आम जनता के लिए खोला जाता है। जिलेभर से लोग यहां पहुंचकर राजपरिवार और स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव से भेंट करते हैं। परंपरा के अनुसार राजपरिवार जनता का स्वागत करता है और लोगों द्वारा भेंट किए गए नजराने स्वीकार करता है।

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रियासत काल की शाही परंपरा

यह परंपरा रियासत काल से चली आ रही है। आज़ादी से पहले सरगुजा रियासत में दशहरे का पर्व शाही अंदाज़ में मनाया जाता था। उस समय महाराजा हाथी, घोड़े और सेना के साथ भव्य जुलूस निकालते थे। इसके बाद पैलेस में फाटक पूजा होती थी और फिर दरबार लगता था, जिसमें इलाकों के जमींदार महाराजा को नजराने भेंट करते थे।

बंजारों और नीलकंठ की पूजा

शाही दशहरे की शुरुआत बंजारों की पूजा से होती थी। सबसे पहले नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए जाते थे, जिसके बाद जून गद्दी और ब्रह्म मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती थी।

अंतिम शाही दशहरा और वर्तमान परंपरा

ऐतिहासिक अभिलेख बताते हैं कि वर्ष 1966 में अंतिम बार शाही दशहरा जुलूस निकाला गया था। उसके बाद जुलूस की परंपरा बंद हो गई, लेकिन शस्त्र पूजन, वाद्य यंत्रों की पूजा और जनता से भेंट की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और गरिमा के साथ निभाई जा रही है।

शुभकामनाएँ

राजपरिवार ने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बुराई पर अच्छाई की विजय का यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और नई ऊर्जा लेकर आए।