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Ayodhya Ramlala Darshan: 22 अक्टूबर को भव्य श्रृंगार, नोट करें बाल भोग, आरती और शयन का समय
अयोध्या रामलला का 22 अक्टूबर (कार्तिक अमावस्या) को अलौकिक श्रृंगार। जानें रामलला की पहली आरती (सुबह 6:30 बजे), भोग, संध्या आरती और शयन का पूरा दैनिक शेड्यूल। दर्शन का अंतिम समय 7:30 बजे।
अयोध्या में रामलला का भव्य श्रृंगार: कार्तिक अमावस्या पर हुआ अलौकिक दर्शन, जानिए भोग और आरती का पूरा शेड्यूल
अयोध्या धाम: कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि, विक्रम संवत 2082 यानी आज, बुधवार, 22 अक्टूबर 2025 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या धाम में ब्रह्मांड नायक प्रभु श्री रामलला सरकार का शुभ और अलौकिक श्रृंगार हुआ। रामलला प्रतिदिन भव्य रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, और आज उनके विशेष श्रृंगार में फूलों की माला दिल्ली से मंगाई गई थी।
अयोध्या में रामलला का दैनिक कार्यक्रम अत्यंत व्यवस्थित और पारंपरिक है।
रामलला का दैनिक कार्यक्रम (श्रृंगार और आरती)
रामलला के दिन की शुरुआत उन्हें जगाने से होती है और श्रृंगार के बाद पहली आरती होती है।
| समय | अनुष्ठान | विवरण |
| सुबह 6:30 बजे | मंगला आरती | रामलला को जगाने के बाद, लेप लगाने, स्नान करवाने और वस्त्र पहनाने के बाद पहली आरती होती है। |
| शाम 7:30 बजे | दर्शन समाप्ति | भक्तों के लिए रामलला के दर्शन का अंतिम समय। |
| शाम 7:30 बजे | संध्या आरती | शाम को रामलला की संध्या आरती की जाती है। |
| रात 8:30 बजे | शयन | संध्या आरती के बाद रामलला को शयन करवाया जाता है। |
दैनिक भोग और वस्त्र विधान
- भोग: रामलला को दिन में चार समय भोग लगता है। ये व्यंजन राम मंदिर की रसोई में तैयार किए जाते हैं, और हर समय के हिसाब से अलग-अलग व्यंजन परोसे जाते हैं। सुबह की शुरुआत बाल भोग से होती है।
- वस्त्र: रामलला को हर दिन और मौसम के हिसाब से अलग-अलग वस्त्र पहनाए जाते हैं। गर्मियों में सूती और हल्के वस्त्र, तो जाड़े (सर्दियों) में स्वेटर और ऊनी वस्त्र पहनाए जाते हैं।
अयोध्या में रामलला का यह नित्य और भव्य श्रृंगार भक्तों को प्रतिदिन अलग और अलौकिक रूप में दर्शन देता है, जिससे भक्तों में अपार आस्था और संतोष का भाव बना रहता है।











