मार्गशीर्ष (अगहन) माह 2025: 15 नवंबर से शुरू, ‘आंगन गुरुवार’ पर करें अन्नलक्ष्मी और श्रीकृष्ण की विशेष उपासना

मार्गशीर्ष (अगहन) माह 2025: अन्नलक्ष्मी और श्रीकृष्ण की उपासना का शुभ काल, जानें महत्व और परंपरा

हिंदू पंचांग के अनुसार, अगहन माह जिसे मार्गशीर्ष भी कहा जाता है, इस बार 15 नवंबर, शनिवार से आरंभ होकर 14 दिसंबर तक चलेगा। यह महीना न केवल अन्न और समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि आस्था, परंपरा और देवी लक्ष्मी तथा भगवान श्रीकृष्ण के पूजन का अत्यंत शुभ काल भी माना गया है।

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अगहन माह का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

मार्गशीर्ष माह को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है:

  • भगवान श्रीकृष्ण की उपासना: गीता में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है: “मासानां मार्गशीर्षोऽहम्” (अर्थात महीनों में मैं मार्गशीर्ष (अगहन) हूँ)।
    • इसलिए, यह महीना भगवान श्रीकृष्ण की उपासना के लिए विशेष शुभ माना गया है।
    • यह महीना लक्ष्मी और श्रीकृष्ण दोनों की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर प्रदान करता है।

अगहन: अन्नलक्ष्मी और किसान जीवन का प्रतीक

लोकमान्यता और परंपराओं के अनुसार, अगहन माह का महत्व अन्न और समृद्धि से जुड़ा है:

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  • अन्नलक्ष्मी का महीना: जब धरती पर नई फसलें तैयार होती हैं, तब मनुष्य देवी लक्ष्मी का आभार व्यक्त करता है। यही कारण है कि अगहन को अन्नलक्ष्मी का महीना कहा गया है।
  • पुरानी कहावत: “अगहन में जो अन्न सहेजे, वही वर्षभर सुख सहेजे।” यह कहावत इस बात पर जोर देती है कि इस माह में अन्न का उचित संग्रह और सदुपयोग करने से वर्षभर सुख-समृद्धि बनी रहती है।
  • यह महीना किसान जीवन की मेहनत, आभार और श्रद्धा का प्रतीक बन जाता है।

अंगना गुरुवार की विशेष परंपरा

अगहन माह के गुरुवारों को विशेष रूप से ‘आंगन गुरुवार’ कहा जाता है, जिसका अत्यंत महत्व है:

  • स्वागत और सजावट: इस दिन महिलाएं सुबह-सुबह घर के आंगन को गोबर से लीपकर सजाती हैं और सुंदर अल्पनाएं (रंगोली) बनाती हैं।
  • लक्ष्मी पूजन: महिलाएं धान, हल्दी, कुंकुम तथा दीप से लक्ष्मीजी का स्वागत करती हैं और उनका पूजन करती हैं।
  • फल: माना जाता है कि ऐसा करने से घर में अन्न-धान्य की कभी कमी नहीं होती और वर्षभर सुख-समृद्धि बनी रहती है।