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विशेष लेख: टीएस सिंह देव का जीवन—राजशाही विरासत, सेवा का संकल्प और स्वास्थ्य क्रांति की नींव

विशेष लेख: टीएस सिंह देव का जीवन—राजशाही विरासत, सेवा का संकल्प और स्वास्थ्य क्रांति की नींव

त्रिभुवनेश्वर शरण सिंह देव (टीएस बाबा) छत्तीसगढ़ की राजनीति में सादगी, विरासत और प्रशासनिक कुशलता का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका जीवन सरगुजा रियासत के महाराजा होने से लेकर एक सक्रिय जनसेवक और राज्य के प्रभावी मंत्री होने तक का एक प्रेरणादायक सफर है।

जन्मदिन का विशेष संकल्प: जश्न नहीं, निष्ठा और त्याग (31 अक्टूबर)

टीएस सिंह देव का जन्म 31 अक्टूबर 1952 को हुआ। उनका जन्मदिन इस कारण विशेष है कि वह इसे किसी उत्सव के रूप में नहीं मनाते, बल्कि श्रीमती इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि देने और सेवा का संकल्प लेने के रूप में मनाते हैं।

  • निष्ठा का प्रमाण: 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद, उन्होंने अपनी अटूट कांग्रेस निष्ठा और उनके प्रति गहरे सम्मान के चलते जन्मदिन पर जश्न मनाना बंद कर दिया।
  • सादगी की मिसाल: एक महाराजा और वरिष्ठ नेता होने के बावजूद उनका यह त्याग उन्हें जनता के बीच ‘टीएस बाबा’ की विनम्र छवि देता है।
  • सेवा संकल्प: उनके समर्थक इस दिन को रक्तदान, अन्नदान और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से ‘सेवा संकल्प दिवस’ के रूप में मनाते हैं।
  • स्वास्थ्य मंत्री के रूप में प्रमुख कार्य (2018-2023)

2018 में कांग्रेस की जीत के बाद, टीएस सिंह देव ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाला और राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक मजबूत नींव रखी।

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प्रमुख कार्य विवरण
यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (UHC) डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना को मजबूत किया। नागरिकों के लिए ₹5 लाख तक और गंभीर बीमारियों में ₹20 लाख तक का निःशुल्क उपचार सुनिश्चित किया, ताकि आर्थिक तंगी इलाज में बाधा न बने।
बुनियादी ढांचे का उन्नयन आदिवासी क्षेत्रों में चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थानों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्रामीण CHC और PHC में उपकरणों व मानव संसाधन को बढ़ाया।
महामारी प्रबंधन COVID-19 के दौरान सभी रोगियों के लिए निःशुल्क उपचार और जाँच सुनिश्चित की। ऑक्सीजन प्लांट और आवश्यक चिकित्सा संसाधनों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में सक्रिय नेतृत्व दिया।
ग्रामीण पहुँच दाई-दीदी क्लीनिक जैसी अभिनव पहल शुरू की, जो महिलाओं द्वारा संचालित थीं और शहरी स्लम क्षेत्रों में महिलाओं को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करती थीं।
संवेदनशील नेतृत्व उनका प्रशासन पारदर्शिता और सुलभता के लिए जाना गया। उन्होंने अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर स्वास्थ्य नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया।

टीएस सिंह देव का जीवन छत्तीसगढ़ की राजनीति में उनकी अद्वितीय स्थिति को दर्शाता है—एक ऐसे महाराजा जो अपने राजसी वैभव को त्यागकर जनता के बीच सहजता से घुलमिल गए। उनका जन्मदिन और उनका प्रभावी प्रशासनिक कार्यकाल दोनों ही उनकी जनसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और उच्च नैतिक मूल्यों का प्रमाण हैं।

 

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