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अयोध्या में रामलला का दिव्य श्रृंगार: चार समय भोग और आरती का पूरा विवरण

अयोध्या: मार्गशीर्ष माह की द्वितीया पर रामलला का अलौकिक श्रृंगार, चार समय भोग और भव्य आरती

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में विराजमान ब्रह्मांड नायक प्रभु श्री रामलला का श्रृंगार 22 नवंबर (मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष द्वितीया, विक्रम संवत 2082) को अत्यंत अलौकिक और भव्य रूप में किया गया। हर दिन की तरह शनिवार को भी प्रभु का विशेष श्रृंगार, स्नान, वस्त्र-परिवर्तन और आरती विधिवत सम्पन्न हुई।


रामलला का चार समय भोग

रामलला को प्रतिदिन चार बार भोग लगाया जाता है। सभी व्यंजन मंदिर परिसर की विशेष रसोई में बनते हैं। हर समय और हर मौसम के अनुसार भोग की प्रकृति बदलती रहती है।

सुबह का ‘बाल भोग’

दिन की शुरुआत सुबह 6:30 बजे रामलला को जगाने और बाल भोग से होती है। इसके बाद—

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  • लेप लगाया जाता है
  • स्नान करवाया जाता है
  • ताजा वस्त्र पहनाए जाते हैं

मौसम के हिसाब से वस्त्र

रामलला को प्रतिदिन अलग वस्त्र पहनाए जाते हैं।

  • गर्मी में: सूती और हल्के वस्त्र
  • सर्दी में: स्वेटर और ऊनी परिधान

प्रभु के दिव्य श्रृंगार में ताज़ी फूलों की माला विशेष रूप से दिल्ली से भेजी जाती है।

आरती समय-सारणी

अयोध्या धाम में रामलला की दैनिक आरती निम्न समय पर होती है—

  • प्रातः 6:30 बजे — मंगल आरती
  • दोपहर 12 बजे — भोग आरती
  • संध्या 7:30 बजे — संध्या आरती
  • रात 8:30 बजे — शयन आरती

रामलला के दर्शन रात 7:30 बजे तक ही किए जा सकते हैं।


भक्तों को प्रतिदिन मिलता है नया रूप

प्रतिदिन रामलला का रूप, श्रृंगार और परिधान नए होते हैं। भक्तों को हर दिन भगवान के दर्शन एक विशेष अलंकरण और भावपूर्ण छवि में प्राप्त होते हैं।

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