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मोदी-योगी नेतृत्व में धर्म संस्कृति का पुनर्जागरण, सदियों की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में धर्मध्वज का आरोहण, संत समाज भावविभोर

अयोध्या में धर्मध्वज आरोहण: सदियों की प्रतीक्षा के बाद संत समाज भावविभोर, मोदी–योगी नेतृत्व को दी सराहना

अयोध्या। 500 वर्षों की प्रतिक्षा, संघर्ष, तपस्या और अनगिनत बलिदानों के पश्चात आज का दिन अयोध्या और सनातन समाज के लिए ऐतिहासिक बन गया। श्रीराम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज का आरोहण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति की वैश्विक प्रतिष्ठा, अस्मिता और आत्मगौरव का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। अवधपुरी के संत समाज ने इसे सदियों पुरानी उस यात्रा का फल बताया, जिसके लिए संतों, भक्तों और समाज ने अपने जीवन भर धैर्य और अटूट आस्था बनाए रखी।

संत दिलीप दास ने की सराहना

राम वैदेही मंदिर के प्रतिष्ठित संत दिलीप दास ने धर्मध्वज आरोहण को अयोध्या मिशन के अंतर्गत सनातन संस्कृति के पुनरुद्धार का श्रेष्ठ उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के भव्य मंदिर और धर्मध्वज का यह क्षण संपूर्ण समाज के लिए आस्था का तीर्थ बन गया है।
संत दिलीप दास ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए कहा—
“योगी आदित्यनाथ केवल एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि धर्म परंपरा की रक्षा के प्रहरी हैं। उन्होंने जिस संकल्प, प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ धर्म की स्थापना में योगदान दिया है, वह अतुलनीय है।”

विवाह पंचमी पर हुआ पूजन-अर्चन

विवाह पंचमी के पावन अवसर पर आयोजित इस प्रतिष्ठा समारोह में साधु-संतों द्वारा प्रभु श्रीराम और माता जानकी के विवाह पर्व का पूजन-अर्चन भी किया गया। संत समाज का विश्वास है कि यह शुभ अवसर भारत के उज्ज्वल भविष्य की आस्था को और अधिक मजबूत करेगा तथा सनातन समाज के आत्मगौरव का शंखनाद साबित होगा।

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मोदी–योगी नेतृत्व को संत समाज का प्रणाम

संत समाज का मानना है कि धर्मध्वज स्थापना और मंदिर निर्माण की इस भव्य उपलब्धि के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
संतों का कहना है कि डबल इंजन सरकार ने—

  • सनातन परंपराओं के संरक्षण,
  • प्राचीन मंदिर संस्कृति के पुनर्जागरण,
  • धार्मिक स्थलों के आधुनिकीकरण,
  • मठ-मंदिरों के संवर्धन,
  • और संतों के सम्मान को नई दिशा प्रदान की है।

उनकी नीतियों और प्रयासों ने देश की आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ किया है, जिसके परिणामस्वरूप आज अयोध्या एक वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित हो रही है।

“सदियों का स्वप्न साकार हुआ” – साधु-संत

कई साधु-संतों ने भावविभोर होकर कहा कि आज वह घड़ी आ पहुंची है जिसकी कल्पना उनके पूर्वजों ने भी सदियों पूर्व की थी। उन्होंने कहा—
“धर्मध्वज का आरोहण भारत की आध्यात्मिक विरासत को और भी मजबूत करता है तथा पूरी दुनिया में सनातन परंपराओं की महिमा को प्रखर रूप से स्थापित करता है।”

अयोध्या का यह ऐतिहासिक क्षण केवल एक नगर या एक समुदाय की उपलब्धि नहीं, बल्कि समूचे भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बन चुका है। रामलला के धाम में धर्मध्वज का लहराना परंपरा, संस्कृति एवं आध्यात्मिक गौरव के उत्थान का संदेश देता है।

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