कांकेर में लाख पालन से बदली वनांचल की तस्वीर: 600 से अधिक किसान जुड़े, सालाना लाखों की कमाई

उत्तर बस्तर कांकेर, 19 फरवरी 2026/कभी माओवाद प्रभाव के कारण विकास से दूर रहा कांकेर जिले का वनांचल क्षेत्र आज सकारात्मक परिवर्तन और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रहा है। जहां पहले किसान मुख्य रूप से धान की खेती पर निर्भर थे, वहीं अब शासन की पहल एवं वन विभाग के मार्गदर्शन से लाख उत्पादन को अपनाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

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आदर्श लाख पालन परियोजना से नई पहचान

वनमंडल पश्चिम भानुप्रतापपुर द्वारा कोयलीबेड़ा विकासखंड के किसानों को लाख पालन का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए जिला खनिज न्यास निधि अंतर्गत आदर्श लाख पालन परियोजना को स्वीकृति मिली है। इस महत्वाकांक्षी योजना का क्रियान्वयन 06 क्लस्टरों में किया जा रहा है, जिसमें कोयलीबेड़ा, कोतुल, चारगांव, मन्हाकाल, पानीडोबीर एवं पश्चिम परलकोट के छोटेबेठिया शामिल हैं।

इन क्लस्टरों के 621 किसानों की भूमि में लगभग 4559 कुसुम के वृक्ष उपलब्ध हैं, साथ ही बेर एवं पलाश के पौधे भी हैं, जिन पर लाख पालन की अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में ब्लेजिंग, मार्किंग एवं शाखा कटाई-छंटाई का कार्य प्रगति पर है।

प्रशिक्षण कार्यशाला में उमड़ा किसानों का उत्साह

कोयलीबेड़ा विकासखंड के सुदूर वनांचल ग्राम पंचायत छोटेबोदेली के आश्रित ग्राम मन्हाकाल में कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्थानीय विधायक विक्रमदेव उसेण्डी एवं अध्यक्षता लच्छूराम गावड़े ने की।

इस अवसर पर जनपद अध्यक्ष श्यामबती मंडावी, जिला वनोपज सहकारी संघ अध्यक्ष सुकलाल देहारी, वन विभाग के अधिकारी एवं क्षेत्र के जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय संस्थान से तकनीकी सहयोग

भारतीय प्राकृतिक राल एवं गोंद संस्थान, नामुकम (रांची) के वैज्ञानिक ए.बी. आजाद एवं तकनीशियन शक्तिधर कोयरी द्वारा किसानों को बीहन लाख, पोषक वृक्ष प्रबंधन एवं वैज्ञानिक कटाई-छंटाई तकनीक की जानकारी दी गई। साथ ही लखपति स्व-सहायता समूहों को टूल किट का वितरण किया गया।

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विधायक विक्रम उसेंडी का संदेश

अंतागढ़ विधायक विक्रम उसेंडी ने कहा कि वैज्ञानिक पद्धति से लाख पालन कर किसान एक वर्ष में लाखों रुपये कमा सकते हैं। क्षेत्र में कुसुम वृक्षों की प्रचुरता है और पथरीली भूमि पर धान की पैदावार कम होती है, ऐसे में लाख उत्पादन किसानों के लिए बेहतर आजीविका का साधन है। उन्होंने किसानों से पूरी लगन से प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।

600 से अधिक किसान जुड़े, आय में भारी वृद्धि

पश्चिम भानुप्रतापपुर वनमंडलाधिकारी हेमचंद पहारे ने बताया कि क्षेत्र के 6 क्लस्टर और 10 स्वसहायता समूहों के माध्यम से 600 से अधिक किसान लाख उत्पादन से जुड़े हैं। किसानों को रांची भेजकर उन्नत प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।

लाख पालन से बदली किसानों की किस्मत

  • ग्राम बिरकोन्दल (अंतागढ़) के विकास हुर्रा ने वर्ष 2025-26 में लगभग 3 लाख रुपये की आय अर्जित की।
  • ग्राम चिलपरस (कोयलीबेड़ा) के राकेश नेताम ने 2 लाख रुपये कमाए।
  • ग्राम धनेली (भानुप्रतापपुर) के जयश्री सलाम ने 93 हजार रुपये की आय प्राप्त की।

इन किसानों का कहना है कि लाख पालन से उन्हें अतिरिक्त आय, आर्थिक मजबूती एवं आत्मनिर्भरता मिली है, साथ ही जंगल संरक्षण एवं वृक्षारोपण को भी बढ़ावा मिला है।

वनांचल में विकास की नई राह

यह परियोजना न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक संसाधनों के संरक्षण और स्थायी आजीविका का मजबूत आधार भी तैयार कर रही है। जो क्षेत्र कभी नक्सल प्रभाव से पिछड़ा माना जाता था, आज वहीं लाख उत्पादन से विकास और समृद्धि की नई कहानी लिखी जा रही है।