Shaheed Veer Narayan Singh Death Anniversary: 10 दिसंबर 1857 को रायपुर में दी गई थी फांसी, जानें पूरा इतिहास

Martyr Veer Narayan Singh Death Anniversary: अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की प्रतीक आवाज़—10 दिसंबर 1857 को हुई थी वीरगति

रायपुर। छत्तीसगढ़ के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रथम क्रांतिकारी और प्रदेश के अग्रणी शहीद वीर नारायण सिंह बिंझवार की आज पुण्यतिथि है। 10 दिसंबर 1857 को अंग्रेजों ने रायपुर के वर्तमान जय स्तंभ चौक पर उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी थी। उनकी शहादत ने न सिर्फ अंग्रेजी शासन को झकझोर दिया बल्कि छत्तीसगढ़ में विद्रोह की चिंगारी को और प्रज्वलित कर दिया। ग्रामीणों, किसानों और क्रांतिकारियों ने विभिन्न क्षेत्रों में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया।

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अकाल के समय जनता के लिए खड़े हुए थे वीर नारायण सिंह

इतिहासकारों के अनुसार, वर्ष 1856 में छत्तीसगढ़ लगातार तीन साल के भीषण अकाल का सामना कर रहा था। लोग भोजन के लिए तरस रहे थे।
इसी दौरान सोनाखान के व्यापारी माखन के पास अनाज का विशाल भंडार था, लेकिन उसने किसानों को उधार में भी अनाज देने से इनकार कर दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने जमींदार वीर नारायण सिंह से सहायता मांगी। उन्होंने किसानों के लिए अनाज भंडार के ताले तुड़वाए और अनाज ग्रामीणों में बांट दिया। यह घटना अंग्रेज प्रशासन को नागवार गुजरी और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई।

व्यापारी माखन ने इसकी शिकायत रायपुर के डिप्टी कमिश्नर इलियट से की, जिसके बाद 24 अक्टूबर 1856 को नारायण सिंह को संबलपुर से गिरफ्तार किया गया। हालांकि, संबलपुर के राजा सुरेन्द्रसाय और किसानों की मदद से वह अंग्रेजों की कैद से बाहर निकाल लिए गए।

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अंग्रेजों के खिलाफ संगठित होकर लड़ी लड़ाई

अंग्रेजों की बढ़ती मनमानी के खिलाफ वीर नारायण सिंह ने लगभग 900 ग्रामीणों की एक टुकड़ी तैयार की, जिसने अंग्रेजी सेना के खिलाफ डटकर संघर्ष किया। कई दिनों तक दोनों पक्षों में मुठभेड़ चलती रही।

कहा जाता है कि देवरी के जमींदार—जो रिश्ते में उनके चाचा थे—ने अंग्रेजों का साथ दिया। इसके बाद अंग्रेज अधिकारी स्मिथ ने सोनाखान को चारों ओर से घेरकर वीर नारायण सिंह को गिरफ्तार कर लिया।


10 दिसंबर 1857: जब रायपुर ने खो दिया अपना वीर पुत्र

अंग्रेजों ने उन्हें रायपुर लाकर 10 दिसंबर 1857 को सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी। जनमानस को डराने की अंग्रेजी मंशा भले ही थी, लेकिन उल्टा यही घटना अंग्रेजों के लिए भारी साबित हुई।

उनकी शहादत के बाद छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह और तेज हो गया। हर वर्ग के लोगों ने उनके बलिदान को प्रेरणा मानकर आंदोलन को आगे बढ़ाया।


वीर नारायण सिंह: इतिहास में दर्ज एक अमर नाम

  • जन्म: 1795, सोनाखान, बलौदाबाजार
  • कुलीन जमींदार परिवार से संबंध
  • 300 गांवों तक जमींदारी का विस्तार
  • अंग्रेजों के खिलाफ 1857 की क्रांति के प्रमुख योद्धा
  • जनता के हित के लिए अनाज वितरण कर अंग्रेजों से टकराव
  • 10 दिसंबर 1857 को रायपुर में फांसी

आज उनकी पुण्यतिथि पर प्रदेशभर में कार्यक्रम आयोजित कर उनके बलिदान को नमन किया जाता है।