बलौदाबाजार हिंसा मामले में छत्तीसगढ़ क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के सुप्रीमो अमित बघेल को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। उनके साथ सह-आरोपी अजय यादव और दिनेश वर्मा को भी राहत मिली है। इससे पहले सिंधी समाज के आराध्य के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी वाले मामले में भी अमित बघेल को जमानत मिल चुकी है।
ऐसे में अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के साथ एक अहम शर्त भी लगाई है। अदालत ने निर्देश दिया है कि अमित बघेल अगले 3 महीने तक रायपुर जिले में प्रवेश नहीं करेंगे। उन्हें इस अवधि तक जिले से बाहर रहना होगा।
राज्य सरकार ने अमित बघेल को बलौदाबाजार हिंसा का ‘किंगपिन’ (मुख्य साजिशकर्ता) बताया था। इस आरोप के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि चार्जशीट पेश की जा चुकी है। आखिर कब तक जेल में रखेंगे।
हाईकोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने पलटा
अमित बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीबी सुरेश और अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने पैरवी की। बचाव पक्ष के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को जमानत याचिका पर सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि, इस मामले के अन्य आरोपी करीब 7 महीने से जेल में हैं, जबकि अमित बघेल के हिरासत का समय अपेक्षाकृत कम है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज की थी।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ हिरासत की अवधि कम होना जमानत खारिज करने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने इस आधार को स्वीकार नहीं किया और हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया।
‘किंगपिन’ होने के आरोप पर कोर्ट की टिप्पणी
बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि, राज्य सरकार ने अमित बघेल को हिंसा का किंगपिन’ (मुख्य साजिशकर्ता) बताया था। आरोप लगाया था कि पूरी घटना उनके इशारे पर हुई। हालांकि, इस आरोप के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके।
बचाव पक्ष के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और जांच से जुड़े सभी दस्तावेज रिकॉर्ड पर उपलब्ध हैं। ऐसे में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं है।
कोर्ट ने पूछा- आखिर कब तक जेल में रखेंगे?
अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने बताया कि, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और जांच पूरी हो चुकी है, तो आखिर आरोपी को कब तक जेल में रखेंगे? इसी आधार पर तीनों आरोपियों को जमानत देने का फैसला किया गया











