Aaj Ka Itihas 18 December: तैमूरलंग का दिल्ली पर कब्जा, दास प्रथा का अंत और गुरु घासीदास जयंती

आज का इतिहास | 18 दिसंबर: दिल्ली पर तैमूरलंग का कब्जा, दास प्रथा का अंत और गुरु घासीदास जयंती

नई दिल्ली। इतिहास के पन्नों में 18 दिसंबर की तारीख कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन राजनीति, समाज सुधार, खेल, अंतरिक्ष विज्ञान और मानवाधिकारों से जुड़े कई ऐतिहासिक फैसले और घटनाएं हुईं, जिनका असर आज भी दुनिया पर दिखाई देता है।


1️⃣ तैमूरलंग का दिल्ली पर अधिकार (1398)

आज से लगभग 600 वर्ष पहले, 1398 में मंगोल आक्रमणकारी तैमूरलंग ने सुल्तान नुसरत शाह को पराजित कर दिल्ली पर कब्जा कर लिया था। इस आक्रमण में उत्तर भारत में भारी तबाही मची और तुगलक वंश की सत्ता कमजोर हो गई।

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2️⃣ अमेरिका में दास प्रथा का अंत (1865)

मानवाधिकारों के इतिहास में 18 दिसंबर 1865 एक ऐतिहासिक दिन माना जाता है। आज ही के दिन अमेरिकी संविधान का 13वां संशोधन लागू हुआ, जिससे अमेरिका में दास प्रथा (Slavery) को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया गया।


3️⃣ भारत की अंतरिक्ष और रक्षा शक्ति का उदय

🔹 GSLV Mark-3 (2014):
ISRO ने अपने सबसे भारी रॉकेट GSLV Mark-3 का सफल प्रक्षेपण कर भारत को अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया। इसी रॉकेट ने भविष्य के गगनयान मानव मिशन की नींव रखी।

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🔹 ब्रह्मोस मिसाइल परीक्षण (2008):
आज ही के दिन भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल परीक्षण कर अपनी रक्षा क्षमता का प्रदर्शन किया था।


4️⃣ खेल जगत: सचिन तेंदुलकर का पहला वनडे (1989)

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने 18 दिसंबर 1989 को पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच खेला। हालांकि वे इस मैच में शून्य पर आउट हो गए थे, लेकिन आगे चलकर उन्होंने क्रिकेट इतिहास में शतकों का शतक लगाकर रिकॉर्ड रच दिया।


5️⃣ समाज सुधार: गुरु घासीदास की जयंती (1756)

छत्तीसगढ़ के महान समाज सुधारक संत गुरु घासीदास का जन्म आज ही के दिन हुआ था। उन्होंने सतनाम पंथ की स्थापना की और समाज से छुआछूत, भेदभाव और कुरीतियों को समाप्त करने का संदेश दिया।


आज के विशेष दिवस

🔹 अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस
दुनिया भर में प्रवासियों के योगदान को सम्मान देने और उनके अधिकारों की सुरक्षा के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है।

🔹 अल्पसंख्यक अधिकार दिवस (भारत)
भारत की विविधता और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा के संकल्प को दोहराने का दिन