छत्तीसगढ़ समाचार: पथरिया बैराज, राजिम सस्पेंशन ब्रिज और गंगरेल बांध के लिए करोड़ों की स्वीकृति





छत्तीसगढ़ शासन के बड़े फैसले: सिंचाई, पर्यटन और बांध सुरक्षा के लिए करोड़ों की स्वीकृति

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छत्तीसगढ़ सरकार की बड़ी सौगात: सिंचाई और पर्यटन अधोसंरचना के लिए करोड़ों के फंड को मंजूरी

1. पथरिया बैराज: 56.06 करोड़ की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति

मुंगेली जिले के 1925 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की राह हुई आसान

रायपुर: राज्य शासन ने मुंगेली जिले के पथरिया विकासखण्ड के अंतर्गत पथरिया बैराज निर्माण के लिए 56.06 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के पूर्ण होने पर किसानों को खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए भरपूर पानी मिलेगा।

सिंचाई क्षमता 1925 हेक्टेयर (कुल)
खरीफ फसल 1640 हेक्टेयर
रबी फसल 285 हेक्टेयर
कुल लागत 56.06 करोड़ रुपये

शासन ने सख्त निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए। निविदा प्रक्रिया को पारदर्शी रखने और कम से कम 75 प्रतिशत बाधारहित भूमि उपलब्ध होने पर ही कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

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2. राजिम: सस्पेंशन ब्रिज निर्माण के लिए 40.60 करोड़ मंजूर

धार्मिक स्थलों के बीच सुगम आवागमन और पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

रायपुर: गरियाबंद जिले के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल राजिम में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महानदी पर सस्पेंशन ब्रिज बनाया जाएगा। इसके लिए शासन ने 40.60 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति जारी की है।

यह ब्रिज राजीव लोचन मंदिर से कुलेश्वर महादेव मंदिर और कुलेश्वर महादेव से लोमेश ऋषि आश्रम तक कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इससे त्रिवेणी संगम पर स्थित इन मंदिरों के बीच आवागमन सुगम होगा और क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। शासन ने गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

3. गंगरेल बांध (रविशंकर सागर परियोजना) की सुरक्षा के लिए 2.92 करोड़

बांध की संरचना को बनाया जाएगा और अधिक मजबूत

रायपुर: धमतरी जिले की लाइफलाइन माने जाने वाले रविशंकर सागर परियोजना (गंगरेल) की सुरक्षा और मजबूती के लिए राज्य शासन ने 2.92 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। यह कार्य ‘बाँध सुरक्षा ड्रिप फेस-II’ के तहत किया जाएगा।

इसके अंतर्गत बांध के बकेट एवं एण्डसील मरम्मत और डिस्टर्व पिचिंग के री-सेटिंग का कार्य किया जाएगा। इस मरम्मत कार्य से बांध की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी और जल प्रबंधन व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था पर पड़ेगा।